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  • The Lawyers And Their Staff Should Be Given The Freedom Of Movement In The Lockdown, The Concerned Collectors Will Be Able To Issue The Pass.

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हाईकोर्ट का आदेश:वकीलों और उनके स्टाफ को लॉकडाउन में आवागमन की छूट दी जाए, संबंधित कलेक्टर जारी कर सकेंगे पास

जबलपुर9 दिन पहले
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मप्र हाईकोर्ट - Dainik Bhaskar
मप्र हाईकोर्ट

मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बैंच ने आदेशित किया है कि जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में हाईकोर्ट के वकीलों और उनके स्टाफ को लॉकडाउन के दौरान आवागमन में नहीं रोका जाए। विशेष तौर पर ऐसे समय पर जब वकीलों को तत्काल फाइलिंग या फिर वर्चुअल सुनवाई करनी हो।

डिवीजन बैंच ने कहा है कि वकीलों और उनके स्टाफ के लिए संबंधित जिलों के कलेक्टर पास जारी कर सकेंगे। इस संबंध में स्थानीय हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के जरिए भी जिला कलेक्टर को पास जारी करने हेतु ऑनलाइन अथवा ऑफलाइन आवेदन दिया जा सकता है।

यह है मामला- यह जनहित याचिका स्टेट बार कौंसिल के सदस्य एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व सदस्य सुनील गुप्ता की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में लॉकडाउन और कोरोना कर्फ्यू का आदेश बिना सोचे समझे जारी किया गया है।

इस आदेश में न्यायपालिका के महत्वपूर्ण अंग वकीलों और उनके स्टाफ के हितों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। अधिवक्ता सिद्धार्थ राधेलाल गुप्ता ने तर्क दिया अर्जेंट मामलों की फाइलिंग या सुनवाई के लिए लॉकडाउन के दौरान आने-जाने वाले वकीलों और उनके स्टाफ पर जुर्माना और अन्य कार्रवाई की जा रही है। इसके कारण वकीलों को उनके कार्यालय का संचालन करना मुश्किल हो रहा है।

आवेदन करने पर जारी किया जाएगा पास

राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ए. राजेश्वर राव ने कहा कि वकीलों और उनके स्टाफ को आवेदन करने पर लॉकडाउन के दौरान आने और जाने के लिए कलेक्टरों द्वारा पास जारी किए जाएँगे।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के माध्यम से भी पास के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन किया जा सकता है। सुनवाई के बाद डिवीजन बैंच ने याचिका का निराकरण करते हुए कहा कि जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर हाईकोर्ट के वकीलों और उनके स्टाफ को लॉकडाउन के दौरान आवागमन से छूट दी जाए।

हत्या की श्रेणी में आता है कोरोना मरीज का ऑक्सीजन हटाना

मानव अधिकार आयोग को लिखा पत्र

कार्यालय संवाददाता, जबलपुर। इंडियन मेडिकल काउंसिल के प्रोफेशनल कंडक्ट, इथिक्यूट एंड इथिक्स रेग्युलेशन 2002 में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि किसी भी मरीज की लाइफ सेविंग डिवाइस हटाना इच्छा मृत्यु या हत्या की श्रेणी में आएगा। इसके बाद भी अस्पतालों में बिना किसी अनुमति के कोरोना मरीजों की लाइफ सेविंग डिवाइस यानी ऑक्सीजन हटाई जा रही है। यह पत्र राष्ट्रीय मानव अधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो के विधिक सलाहकार अधिवक्ता यश सोनी ने मानव अधिकार आयोग को लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि हाल ही में देखने में आया कि बड़ी संख्या में कोरोना मरीजों के परिजन शिकायत कर रहे हैं कि उनके मरीज की ऑक्सीजन े हटा दी गई है। जिससे मरीज की मृत्यु हो गई। पत्र में मानव अधिकार आयोग से इंडियन मेडिकल काउंसिल के प्रोफेशनल कंडक्ट इथिक्यूट एंड इथिक्स रेग्युलेशन 2002 का पालन सुनिश्चित कराने की माँग की गई है।

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