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  • The Monsoon Arrived 48 Days Ago, The Spring Is Also Dry, Now The Rest Rests In The Remaining 30 Days Of August.

मौसम का हाल:मानसून 48 दिन पहले आया, सावन भी सूखा सा बीता, अब अगस्त के बचे 30 दिनों में टिकी आस

जबलपुर6 दिन पहले
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मानसून की बेरुखी से बेचैनी का आलम है। हालात ऐसे हैं कि मानसून आये शहर में 48 दिन बीते गये और अब तक सिर्फ 11 इंच बारिश हुई है। जून माह में ऐसा लगा जैसे इस बार अच्छी बारिश होगी पर जून तो छोड़िए जुलाई भी बीत गया लेकिन पूरे शहर को तर कर दे ऐसी बारिश अब तक नहीं हो सकी है। थोड़ी बहुत बरसात हुई पर उमस कुछ खत्म हो और ठण्डक के साथ कुछ सुखद अहसास हो जो सावन में होता है वैसा कुछ भी नहीं है। फिलहाल बारिश को लेकर अब पूरी उम्मीद अगस्त माह में है। अगस्त में यदि बारिश नहीं हुई तो सितंबर में जाते हुये मानसून से उम्मीद रखना ठीक नहीं, इसलिए अब आने वाले 30 दिन बारिश के लिहाज से बहुत आवश्यक हैं। शहर में बारिश का जो औसत है वह 52 इंच है। अभी तक 11 इंच पानी गिरा है उसमें भी ऐसा पानी ज्यादा रहा जो कहीं गिरा और कहीं सूखा ही रह गया। मौसम विभाग का वर्षा मापक यंत्र भले ही 11 इंच बारिश दर्शाए पर स्थिति एकदम सूखे सी नजर आ रही है।

मानसून की बेरुखी से बेचैनी का आलम है। हालात ऐसे हैं कि मानसून आये शहर में 48 दिन बीते गये और अब तक सिर्फ 11 इंच बारिश हुई है। जून माह में ऐसा लगा जैसे इस बार अच्छी बारिश होगी पर जून तो छोड़िए जुलाई भी बीत गया लेकिन पूरे शहर को तर कर दे ऐसी बारिश अब तक नहीं हो सकी है। थोड़ी बहुत बरसात हुई पर उमस कुछ खत्म हो और ठण्डक के साथ कुछ सुखद अहसास हो जो सावन में होता है वैसा कुछ भी नहीं है। फिलहाल बारिश को लेकर अब पूरी उम्मीद अगस्त माह में है। अगस्त में यदि बारिश नहीं हुई तो सितंबर में जाते हुये मानसून से उम्मीद रखना ठीक नहीं, इसलिए अब आने वाले 30 दिन बारिश के लिहाज से बहुत आवश्यक हैं। शहर में बारिश का जो औसत है वह 52 इंच है। अभी तक 11 इंच पानी गिरा है उसमें भी ऐसा पानी ज्यादा रहा जो कहीं गिरा और कहीं सूखा ही रह गया। मौसम विभाग का वर्षा मापक यंत्र भले ही 11 इंच बारिश दर्शाए पर स्थिति एकदम सूखे सी नजर आ रही है।

सर्दी-खाँसी, बदन दर्द और बुखार
मौसम का विपरीत असर सेहत पर भी पड़ रहा है जिससे आदमी औसत से अधिक सर्दी, जुकाम और बुखार की चपेट में आ रहा है। इसमें कोविड जैसे लक्षण नहीं होते हैं यह सर्दी जुकाम का वायरस है जिसमें गला नहीं सूखता और साँस लेने में तकलीफ नहीं होती है। सर्दी, खाँसी, आँखें लाल, बुखार, बदन में दर्द होता है। मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. अजय तिवारी कहते हैं कि अभी कोरोना वायरस से अलग मौसमी बुखार भी परेशान किये हुये है। इसकी वजह यही है कि मौसम वायरल बुखार के एकदम अनुकूल है। इसमें अंतर यही होता है कि सर्दी-जुकाम में साँस नहीं फूलती है और यह निमोनिया में नहीं बदलता है। एक तरह से यह सीजनल वायरल बुखार है। इससे भी बचने का तरीका यही है कि पौष्टिक आहार लें और सावधानी बरतें।

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