MP हाईकोर्ट के जज बने महाधिवक्ता कौरव:सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की अनुशंसा के बाद राष्ट्रपति भवन से मिली मंजूरी

जबलपुर4 महीने पहले
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महाधिवक्ता रहे पुरुषेंद्र कुमार कौरव अब एमपी हाईकोर्ट के नए जस्टिस नियुक्ति किए गए हैं। - Dainik Bhaskar
महाधिवक्ता रहे पुरुषेंद्र कुमार कौरव अब एमपी हाईकोर्ट के नए जस्टिस नियुक्ति किए गए हैं।

जबलपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता पुरुषेंद्र कौरव एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस नियुक्ति किए गए हैं। उनके नाम की अनुशंसा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 01 सितंबर को की थी। राष्ट्रपति ने भी इस अनुशंसा पर मंजूरी की मुहर लगा दी। कौरव वर्तमान में मप्र सरकार के महाधिवक्ता थे।

2009 में कौरव सबसे कम 33 वर्ष की उम्र में उप महाधिवक्ता, फिर अतिरिक्त महाधिवक्ता और जून 2017 में पहली बार महाधिवक्ता बनाए गए। उस समय शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने तत्कालीन एजी रवीश अग्रवाल का इस्तीफा मंजूर करने के बाद कौरव को दिल्ली से वापस बुलाकर यह जिम्मा सौंपा था। वे शुक्रवार सुबह 10:30 बजे पदभार ग्रहण करेंगे। खास बात है कि वह सबसे कम उम्र के हाईकोर्ट न्यायाधीश हैं। उल्लेखनीय है कि कौरव का नाम न्यायाधीश पैनल के लिए 5 मई 2019 को भेजा गया था।

कांग्रेस की सत्ता जाते ही फिर बनाए गए महाधिवक्ता
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार में वापसी के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था। प्रदेश में 15 महीने बाद फिर सत्ता बदली तो एक बार फिर पुरुषेंद्र कौरव एमपी के 18वें महाधिवक्ता बने। 45 वर्षीय पुरुषेंद्र कौरव के नाम को राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी मिल गई तो वे महाधिवक्ता के पद से सीधे हाईकोर्ट में जज बनने वाले वे पहले व्यक्ति होंगे। महाधिवक्ता पद संभाल चुके कई लोग हाईकोर्ट में जज बने, लेकिन पद संभालते हुए ऐसा पहली बार होगा।

एमपी हाईकोर्ट का जस्टिस बनाए जाने का ये आदेश आया।
एमपी हाईकोर्ट का जस्टिस बनाए जाने का ये आदेश आया।

डीमेट सहित व्यापमं के मामले में की थी पैरवी
वर्ष 2009 में उप महाधिवक्ता और 2012 से अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर कार्यरत रहते हुए कौरव ने डीमेट सहित व्यापमं के बहुचर्चित मामलों में मप्र शासन की ओर से पैरवी की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में राज्य से संबंधित मामलों की पैरवी के लिए दिल्ली भेज दिया था। साल 2017 में महाधिवक्ता के पद से रवीश अग्रवाल के इस्तीफा देने के बाद वापस बुलाया गया।

एमपी हाईकोर्ट।
एमपी हाईकोर्ट।

उम्र सबसे कम फिर भी वरिष्ठ थे कौरव
13 मई 2017 को जब कौरव को वरिष्ठ अधिवक्ता बनाया गया, तब उनकी उम्र महज 40 साल थी। इस तरह वे प्रदेश के सबसे कम उम्र के सीनियर लॉयर बने। इससे पहले भी जब उन्हें वर्ष 2009 में उप महाधिवक्ता और 2012 में अतिरिक्त महाधिवक्ता बनाया गया, तब भी इन पदों तक पहुंचने वालों में उनकी उम्र सबसे कम थी।

2001 में किया था लॉ, 2006 से स्वतंत्र वकालत
वर्ष 2001 में एनईएस लॉ कॉलेज जबलपुर से कानून की पढ़ाई करने के बाद कौरव ने अपने मामा वीरेन्द्र चौधरी के साथ जबलपुर से वकालत शुरू की। उन्होंने वर्ष 2006 में स्वतंत्र वकालत शुरू की और 15 साल में ही इस मुकाम तक पहुंच गए कि अब उनके नाम को सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस के तौर पर भेजा गया था।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से रहा जुड़ाव
नरसिंहपुर जिले में गाडरवारा तहसील के ग्राम डोंगरगांव में पुरुषेंद्र कौरव का जन्म 4 अक्टूबर 1976 को हुआ था। छात्र जीवन में कौरव का अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ाव रहा। वर्ष 2010 में उन्हें एबीवीपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया था।

कौरव को हर तरह के मामले में पैरवी के लिए जाने जाते हैं। अभी 25 अगस्त को ही उन्होंने एमपी सरकार को ओबीसी के प्रकरण में बड़ा ही महत्वपूर्ण अभिमत दिया था। इसी के बाद हाईकोर्ट में लगे 6 प्रकरणों को छोड़कर अन्य सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण देने के निर्देश सरकार ने दिए हैं।

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