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नवरात्रि:माँ जगतजननी की कृपा से भक्तों के नष्ट हो जाते हैं पाप और बाधाएँ

जबलपुर12 दिन पहले
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  • नवरात्रि के तीसरे दिन होगी माँ चंद्रघण्टा की पूजा-उपासना

नवरात्रि पर्व पर श्रद्धालुओं द्वारा माँ जगतजननी की भक्ति आराधना की जा रही है। मंदिरों के साथ घरों में पूजन-अर्चन कर माता से आशीर्वाद माँगा जा रहा है। कोरोना महामारी के चलते किसी प्रकार के बड़े आयोजन नहीं हो रहे हैं। लेकिन पाठ-अनुष्ठान किए जा रहे हैं। माँ दुर्गा की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघण्टा है। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन व आराधना की जाती है। इस दिन साधक का मन मणिपुर चक्र में प्रविष्ट होता है। चंद्रघण्टा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं।

माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घण्टे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघण्टा देवी कहा जाता है। माँ चंद्रघण्टा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएँ नष्ट हो जाते हैं। इनकी आराधना सद्यः फलदायी है। माँ भक्तों के कष्ट का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। इनका उपासक सिंह की तरह पराक्रमी और निर्भय हो जाता है। इनके घण्टे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की प्रेतबाधा से रक्षा करती है।

माँ स्वरूपों के अनुसार चढ़ाएँ पुष्प, लगाएँ भोग

माँ नौ स्वरूपों के अनुसार माता को पुष्प और भोग प्रिय हैं। पं. राजकुमार शर्मा शास्त्री ने बताया कि माता को जो पुष्प और भोग प्रिय हैं उन्हें चढ़ाने से सभी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। तृतीय स्वरूप माँ चंद्रघण्टा को गुड़हल के पुष्प की माला व कनेर के पुष्प चढ़ाएँ। माता को दूध से बनी मिठाई, मिश्री, गन्ने का प्रसाद अर्पित करें। चतुर्थ स्वरूप माँ कुष्मांडा को मोगरा के पुष्प एवं लाल गुलाब अतिप्रिय हैं। कद्दू के आटे का बना व्यंजन, दूध, मिश्री, केले का भोग अर्पित करें।

पंचम स्वरूप स्कंद माता को जासौन चमेली बेला का पुष्प अर्पित करें। शकरकंद का हलुआ, खीर, छेने की मिठाई, मौसंबी अर्पित करें। षष्टम स्वरूप देवी माँ कात्यायिनी को लाल फल सेब, अनार, इमरती, खोवे की चलेबी का भोग प्रिय है। सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि को लाल सुर्ख जासौन का फूल, गुलाब की माला, मोगरा, चम्पा, नीबू चढ़ाएँ तथा रबड़ी, गुलाब, जामुन, गन्ना, दूध प्रिय हैं। अष्टम स्वरूप माँ महागौरी को नारियल, श्रीखण्ड, दही, मिश्री, मौसंबी, संतरा, खोवे की चलेबी प्रिय हैं। नवम् स्वरूप माँ सिद्धि दात्री को पुड़ी, खीर, हलुआ, मंगौड़े का भोग अर्पित करें।

कालीधाम में 501 अखण्ड ज्योति कलश की स्थापना - नवरात्रि पर्व पर श्री सिद्धशक्ति पीठ कालीधाम ग्वारीघाट के दंडी स्वामी कालिकानंद सरस्वती महाराज द्वारा कालीधाम शिष्य परिवार की ओर से 501 अखण्ड मनोकामना जयोति कलश की स्थापना की गई है। प्रतिदिन माँ भगवती का नौ दिनों तक पूजन-अर्चन एवं 3 आचार्यों द्वारा 108 दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जा रहा है। महाराज जी ने बताया कि वैश्विक महामारी का प्रकोप खत्म करने के संकल्प के साथ भक्तों ने ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए हैं। ------------------------------- संयुक्त रजक समाज की बैठक आज संयुक्त रजक समाज ने नवरात्रि में मूर्ति स्थापना नहीं करने का निर्णय लिया था, लेकिन अब समाज द्वारा इस निर्णय पर फिर से विचार करने को लेकर 19 अक्टूबर को शाम 7 बजे से रजक समाज भवन सदर में आवश्यक बैठक आयोजित की गई है। --------------------------------------- माँ त्रिपुर सुंदरी के दरबार में रहा सतचण्डी का पाठ कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए कर रहे अनुष्ठान फोटो सुशील जबलपुर।

माता त्रिपुर सुंदरी तेवर के दरबार में कोरोना महामारी के चलते इस बार भक्तों की बहुत कम उपस्थिति है। माता को जल चढ़ाने पर पाबंदी के चलते भी सुबह श्रद्धालु मंदिर नहीं पहुँच रहे हैं। लेकिन माता के दरबार में इस वर्ष देश, प्रदेश एवं संस्कारधानी से कोरोना महामारी से मुक्ति के लिए सतचण्डी पाठ का अनुष्ठान किया जा रहा है। इसके साथ ही माता के समक्ष मनोकामना ज्योति कलश भी श्रद्धालुओं द्वारा रखे गए हैं। जवारा कलश भी पूजन-अर्चन कर रखे गए हैं।

सतचण्डी पाठ के अनुष्ठान को लेकर मंदिर समिति की विगत दिवस आयोजित बैठक में निर्णय लिया गया था। समिति के मुख्य कार्यकारिणी सदस्य महेश केमतानी, बरगी विधायक संजय यादव, भगवत पटेल, उमेश यादव, पुजारी बबलू दुबे, रमेश महाराज, गौतमजी आदि ने बताया कि माता के दर्शन के लिए मंदिर में भीड़ न लगे तथा दूर दराज के भक्तों के लिए देवी माँ के ऑनलाइन दर्शन करने की व्यवस्था प्रशासन द्वारा की गई है, साथ ही प्रतिदिन मंदिर की साफ-सफाई के साथ पूरे मंदिर प्रांगण को सेनिटाइज किया जा रहा है। मंदिर में इस वर्ष भण्डारा भी नहीं होगा। ------------------------ गौरी पूजन, पुष्प वाटिका, जनकपुरी भ्रमण प्रसंग की प्रस्तुति - घमापुर रामलीला मंच में रविवार को लीला मंच से गौरी पूजन, पुष्प वाटिका, जनकपुरी भ्रमण प्रसंग की प्रस्तुति महंत रामेश्वरानंद के मार्गदर्शन, पं. प्रभात दुबे एवं एड. श्यामचन्द्र तिवारी व सहयोगियों द्वारा दी गई। इस अवसर पर डॉ. एसी सोनकर, विजय सिंह ठाकुर, एड. बलराज सोनकर, कमलेश तिवारी, राजेश सेन, सरमन राजपूत, विष्णु दीक्षित, प्रिंस तिवारी आदि उपस्थित थे।पी-2

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