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यहां के हाल भी बेहाल:इंदौर में बेसहारा बुजुर्गों के साथ जो हुआ उससे जुदा नहीं है यहाँ के हाल

जबलपुर3 महीने पहले
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दो दिनों से ज्यादा किसी को रुकने नहीं देते - Dainik Bhaskar
दो दिनों से ज्यादा किसी को रुकने नहीं देते
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इंदौर में गरीब और बेसहारा बुजुर्गों को शहर से उठाकर बाहर फेंकने की घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा, लोग भले ही इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों को गालियाँ दे रहे हैं लेकिन धन्य हैं वे कर्मचारी जिन्होंने बेसहारा गरीबों की हालत देश के सामने तो रख दी। जो घटना इंदौर में हुई वैसी लगभग रोज ही हर शहर में होती है, यदि ऐसा नहीं है तो फिर शहर के चौराहों, तिराहों, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, मेडिकल, नर्मदा तटों पर दुनिया के सताए, ठिठुरते हुए रात काटने वाले कौन हैं।

उन्हें किसी ने उठाकर फेंका नहीं लेकिन उठाकर अच्छी जगह रहने को भी तो नहीं कहा, फिर इंदौर और बाकी शहरों के नगर निगमों में अंतर क्या। नगर निगम द्वारा मेडिकल कॉलेज के पास संचालित रैन बसेरा में ऐसे कठोर नियम बनाए गए हैं कि वहाँ अधिकांश गरीब रह ही नहीं पाते हैं। यही कारण है कि रैन बसेरा के बाहर बने शेड के नीचे कई बुजुर्ग दिन काटते हैं या फिर निकल पड़ते हैं किसी दूसरे ठौर के लिए।

नगर निगम गरीबों और बेसहारा लोगों के लिए रैन बसेरा संचालित करता है जिनमें ग्वारीघाट रैन बसेरा, तिलवारा, पिसनहारी की मढ़िया, मेडिकल कॉलेज अस्पताल और गोकुलदास धर्मशाला के रैन बसेरा शामिल हैं। एक तरह से निगम केवल मॉनिटरिंग करता है जबकि एनजीओ इसका संचालन करते हैं।

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास बने नगर निगम के रैन बसेरा में शनिवार दोपहर को जब बुजुर्गों की हालत देखने का प्रयास किया गया तो अंदर रखे अधिकांश पलंग खाली थे क्योंकि अंदर इतनी ठंड थी कि कोई वहाँ रहना ही पसंद नहीं कर रहा था। रैन बसेरा के गेट पर ही वॉटर फिल्टर रखा था जो कि लम्बे समय से बंद है। अंदर सफाई जरूर नजर आई लेकिन अजीब सी बदबू थी जिससे वहाँ रहने वाले भी परेशान थे। यहाँ के टॉयलेट गंदे हैं, दीवारों में सीलन है, प्लास्टर उखड़ रहा है, बिजली व्यवस्था बदहाल है।

शेड में काट रहे ठंडी रातें

रैन बसेरा के बाहर शेड में कई लोग रह रहे हैं क्योंकि अंदर जगह का रोना रोया जाता है। शेड के नीचे लेटे श्याम ने बताया कि रात में इतनी ठंड होती है कि नींद नहीं आती। पहले तो अलाव जलता था अब वह भी नहीं जलता। सिर छिपाने की जगह बस है। उसने बताया िक यहाँ की साफ सफाई तक दूसरी संस्था करवाती है।

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