सुपरस्टार टाइगर ब्रदर्स हीरा-पन्ना की कहानी, VIDEO:पन्ना रिजर्व पार्क के दोनों बाघ 20 महीने साथ-साथ रहे, अब साम्राज्य खड़ा करने के लिए हो गए अलग

पन्ना4 महीने पहले
20 माह की उम्र पूरी कर चुके दोनों शावकों को अब जीवन जीने के तौर-तरीकों को सीखना है।

विंध्याचल की पहाड़ियों के बीच बनाए गए पन्ना टाइगर रिजर्व में दो शावक भाइयों की कहानी काफी चर्चित है। ये दोनों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। इसकी मुख्य वजह उनका सहजता के साथ घूमना था। इससे पर्यटकों को उनकी फोटो और वीडियो लेने पर आसानी होती थी। हालांकि, अब दोनों साथ नहीं हैं। अपना-अपना इलाका बनाने के लिए अलग हो चुके हैं।

टाइगर रिजर्व पार्क हर हफ्ते बाघों की कहानियां जारी करता है। इस बार दो बाघ शावकों की कहानी जारी की है। फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा का कहना है कि अकोला बफर के जंगल में जन्मे दो नर बाघ पी234-31 व पी 234-32, जिन्हें हीरा और पन्ना के नाम से भी जाना जाता है, सुपरस्टार ब्रदर्स के रूप में प्रसिद्ध हैं। वे अकोला बफर क्षेत्र में पर्यटकों को सहजता के साथ घूमते नजर आते हैं। हीरा और पन्ना रिजर्व की बाघिन पी-234 के शावक हैं।

फील्ड डायरेक्टर ने बताया कि बाघिन पी-234 ने नवंबर 2019 में तीन शावकों को जन्म दिया था, जिनमें दो नर व एक मादा शावक थी। दुर्भाग्य से मादा शावक पी234-33 की 14 नवंबर 2020 को सड़क हादसे में मौत हो गई।

2020 में एक शावक को लगा था रेडियो कॉलर

NTCA और राज्य सरकार ने अक्टूबर 2020 में पन्ना लैंडस्केप के 14 बाघों को रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दी थी। भारतीय वन्यजीव संस्थान के साथ आयोजित की जाने वाली यह एक शोध परियोजना है, जो पन्ना लैंडस्केप के बाघों की आवाजाही और प्रसार के बारे में डाटा एकत्र करेगी। दोनों भाई के एकसाथ रहने के कारण रेडियो कॉलर लगाना बेहद मुश्किल था। फिर भी सूझबूझ और अनुभव के आधार पर पी 234-31 को रेडियो कॉलर लगाया जा चुका है। पी 234-32 का फिलहाल बाकी है।

अलग हो चुके हैं दोनों शावक

बाघ के बच्चे डेढ़ साल की उम्र तक मां के साथ रहते हैं। जब वह शिकार करना सीख जाते हैं, तो अपना ठिकाना खुद बनाते हैं। शावक दिसंबर 2020 तक मां के साथ नजर आए, लेकिन जनवरी 2021 के बीच में पहली बार इन दोनों को बाघिन से अलग देखा गया था। मां से अलग होने के बाद शावक कुछ दिन भूखे रहे। फिर एक दिन मां इनके पास पहुंची और शिकार करके उनके खाने की व्यवस्था कर चली गई। 23 जुलाई को एक शावक को पूर्व दिशा में अकेले जाते हुए देखा गया था। शर्मा के मुताबिक, 24 जुलाई को नर बाघ पी234-31 अकोला बफर की सीमा के बाहर उत्तर वन मंडल के जंगल में प्रवेश कर चुका था। उसके बाद पी234-32 नहीं देखा गया, क्योंकि दूसरे भाई को रेडियो कॉलर नहीं लगा, इसलिए उसका मूवमेंट ट्रेक नहीं हो पाता है।

क्षेत्र की तलाश करेंगे दोनों भाई

20 माह की उम्र पूरी कर चुके दोनों शावकों को अब जीवन जीने के तौर-तरीकों को सीखना है। दोनों अब अपने लिए उपयुक्त क्षेत्र की खोज में निकलेंगे, जहां वे स्वच्छंद विचरण करते हुए वंश वृद्धि कर सकें। शर्मा के अनुसार, नर बाघ के व्यवहार की समझ के मुताबिक यह अनुमान लगाया गया था कि दोनों भाई PTR से बाहर पन्ना लैंडस्केप में कहीं अपने लिए क्षेत्र की तलाश करेंगे, क्योंकि PTR में इनके लिए कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां ये स्थापित हो सकें। अकोला बफर में पहले से ही तीन सशक्त नर बाघ टी-7, पी-111 और पी-234 (21) का कब्जा है। अब इस क्षेत्र में किसी अतिरिक्त नर बाघ के लिए जगह नहीं बची। ऐसी स्थिति में दोनों भाइयों को नर बाघों से संघर्ष करके उन्हें यहां से भगाना होगा या फिर अपने लिए नए इलाके की खोज में कहीं और बाहर निकलना पड़ेगा।

7000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है अकोला बफर

पन्ना लैंडस्केप 15000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है। यह उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिला से मध्यप्रदेश के सागर, छतरपुर, दमोह, पन्ना व सतना जिले से होते हुए चित्रकूट उत्तर प्रदेश तक जाता है। जिन 14 बाघों को रेडियो कॉलर लगाया गया है, उनमें 4 बाघ कोर-बफर सीमा व चार बफर क्षेत्र में घूम रहे हैं, जबकि 6 बाघ लैंडस्केप में फैले हैं। लगभग 7000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले अकोला बफर के जंगल को पन्ना-दमोह राज्य मार्ग दो भागों में विभाजित करता है।

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