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आमजन भी परेशान:जिनका सीलिंग से वास्ता नहीं, ऐसे छोटे प्लॉटधारी भी हो रहे प्रताड़ित

जबलपुर8 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो
  • हजारों प्रकरण एसडीएम, सीलिंग शाखा में लंबित हैं, नहीं हो रही सुनवाई

सीलिंग एक्ट भले ही समाप्त कर दिया गया हो, लेकिन इसकी आड़ में अभी भी वे लोग परेशान हो रहे हैं, जिनका सीलिंग से दूर-दूर तक वास्ता नहीं है। जिले में हजारों प्रकरण ऐसे हैं, जो बेवजह खसरों में गलत दर्ज होने के कारण भूमि मालिकों को दर-दर की ठाेकरें खानी पड़ रही हैं। पता चला है कि इन प्रकरणों में अधिकतर छोटे प्लॉटधारी हैं, जिनके खसरों में या तो सीलिंग प्रभावित लिख दिया गया है या फिर आवासीय प्लाॅट को व्यावसायिक बता दिया गया है। इस त्रुटी सुधार के लिए छोटे प्लॉटधारी तहसीलदार से लेकर कलेक्टर तक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई पुख्ता आश्वासन नहीं मिल रहा है। इसके कारण उनके सामने कई समस्याएँ खड़ी हो गई हैं और वे मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। हर अधिकारी अपनी-अपनी बात करते हैं, लेकिन समस्या के निदान के लिए कोई उचित जवाब उन्हें नहीं मिलता।

अधिवक्ता भी परेशान
एडवोकेट अभय तिवारी ने बताया कि ओसवाल कॉलोनी, ग्वारीघाट में उनका एक भूखंड नगर निगम व टीएनसीपी से स्वीकृत है, जिसका खसरा नम्बर 18-2, 18-3 है। इसके पी-2 खसरा के कॉलम 12 में सीलिंग प्रभावित दर्ज हो गया है, जिसके कारण रजिस्ट्री नहीं होने से भूखंड को बेचने का सौदा आखिरी मौके पर कैंसल करना पड़ा। जबकि कलेक्टर ने जाँच कर अपनी रिपोर्ट में उक्त खसरे को क्लीनचिट दी है। इसके बाद भी उक्त खसरे में आज तक गलत प्रविष्टि नहीं हटाई गई है।

बिना आदेश सीलिंग में दर्ज हुई भूमि
जानकारी के अनुसार जिन लोगों के द्वारा ऑनलाइन खसरे दर्ज किए गए, उनमें कई ऐसे हैं, जिसमें तहसीलदार का कोई ऑर्डर नहीं है। इसके कारण खसरे के कॉलम नम्बर 12 में या तो सीलिंग प्रभावित लिख दिया गया है या फिर व्यावसायिक या चरनोई भूमि। जबकि नियम यह कहता है कि बिना तहसीलदार के ऑर्डर के कोई भूमि खसरे में न तो संशोधित होती है और न ही दर्ज की जा सकती है। लेकिन ऐसी गड़बड़ियाँ कई भूमियों में की गई हैं।

वर्षों से काट रहे चक्कर | खसरों में गड़बड़ी से परेशान बेतला निवासी मनीषा पांडे, मोहनिया निवासी घनश्याम पटेल और अधारताल निवासी संदेश कुमार जैन आदि ने कहा कि उनके छोटे-छोटे प्लॉट हैं, जिनमें कॉलम नम्बर 12 में सीलिंग से प्रभावित लिखा हुआ है। इसके कारण उनका न तो नक्शा पास हो रहा है और न ही वह उस प्लॉट को बेच पा रहे हैं। इससे उनके पूँजी भी फँस कर रह गई है।

इसके निराकरण के लिए उन्होंने तहसीलदार, एसडीएम के यहाँ आवेदन भी किया, लेकिन उन्हें बताया गया कि फाइल सीलिंग शाखा में भेज दी गई है। सीलिंग शाखा में आवेदन किया तो पता चला कि कलेक्टर के पास मामला विचाराधीन है। परेशान लोग इस दफ्तर से उस दफ्तर भटक रहे हैं, लेकिन कहीं भी समस्या का निराकरण नहीं हो रहा है।

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