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जूडां हड़ताल:इलाज हुआ मुश्किल, निराश होकर लौट रहे मरीज; मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गहमागहमी बरकरार

जबलपुर18 दिन पहले
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इलाज नहीं मिलने से मरीज को वापस ले जाते परिजन। - Dainik Bhaskar
इलाज नहीं मिलने से मरीज को वापस ले जाते परिजन।

मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल में सुलह नहीं हो सकी है। जूडॉ ने तीन और माँगें जोड़ दी हैं। हाईकोर्ट द्वारा हड़ताल अवैध बताने के बाद सरकार ने जिस तरह से मेडिकल स्टूडेंट़्स को बर्खास्त किया है, इससे तल्खी बढ़ गई है। जूनियर डॉक्टर्स का कहना है कि सरकार हमसे सीट लीविंग बॉन्ड के पैसे माँग रही है, हमसे हॉस्टल छोड़ने को कहा जा रहा है। विरोध जताते हुए जूडॉ कटोरा लेकर भीख भी माँग रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे पास कोई विकल्प नहीं नहीं बचा है।

जबलपुर मेडिकल कॉलेज में जूडॉ अध्यक्ष डॉ. पंकज सिंह ने बताया कि रविवार को उन्होंने अन्य पदाधिकारियों के साथ चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग से मुलाकाल की। जिसमें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इसलिए हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल को कई संगठनों का समर्थन मिल रहा है। इधर जबलपुर हाईकोर्ट में जूडॉ के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की गई है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट ने हड़ताल अवैध घोषित कर दी थी, इसके बाद भी डॉक्टर्स वापस काम पर नहीं लौटे हैं।

कब क्या हुआ

  • 31 मई से जूडॉ एसोसिएशन अपनी 6 सूत्रीय माँगों को लेकर हड़ताल पर चला गया था।
  • गुरुवार को हाईकोर्ट ने जूनियर डॉक्टरों की माँगों को अवैध करार देकर 24 घंटे में वापस लेने को कहा था। ऐसा नहीं करने पर सरकार को कानून के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
  • आदेश के तुरंत बाद सरकार के निर्देश पर जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी ने प्रदेश के पाँच मेडिकल कॉलेजों के 468 पीजी फाइनल ईयर के छात्रों के नामांकन रद्द कर दिए। इसके बाद अब ये छात्र परीक्षा देने के लिए योग्य नहीं रहे।

जूडॉ की और ये 3 माँगें

  • 31 मई के बाद इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों पर की गई कार्रवाई को वापस लिया जाए।
  • 2018 के जूडॉ, जिनका 3 साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है उनको सीनियर रेजीडेंट माना जाए।
  • सरकार ने 17% स्टाइपेंड बढ़ाने पर सहमति दी है, जूडॉ ने 24% बढ़ाने की माँग की थी। अब जूडॉ ने 17% बढ़ाने के साथ प्रतिमाह 3 या 4 चार हजार रुपए बढ़ाने की माँग की है।

रूटीन सर्जरी टली, हो रही परेशानी
हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज में मरीज भटक रहे हैं। इलाज नहीं मिलने से वे लौट रहे हैं। वहीं पहले से भर्ती मरीजों को भी समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। रूटीन सर्जरी टाल दी गईं। दूसरे जिलों से आने वाले मरीजों के सामने विकट समस्या खड़ी हो गई है। मरीजों के परिजन आिर्थक रूप से परेशान हो रहे हैं।

  • इस बात से नाराज जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देना शुरू कर दिया।
  • शुक्रवार को हड़ताल पर जाने वाले डॉक्टरों को हॉस्टल खाली करने और सीट छोड़ने पर बॉन्ड की शर्तों के अनुसार पैसा जमा करने के लिए लिखा।
  • इस्तीफा देने वाले डॉक्टरों को नोटिस जारी किए। इसमें सीट छोड़ने की एवज में बॉन्ड भरने के साथ ही हॉस्टल खाली करने का नोटिस भेजा।
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