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  • Two Years Ago, Two Women Who Reached For Fake Bail Were Expounded By The Judge By Asking The Name Of The Accused, Despite The Network Of Fake Bail Holders Was Not Broken In The Court.

फर्जी जमानत कराने वाले गैंग सक्रिय:2 वर्ष पहले फर्जी जमानत लेने पहुंची दो महिला को आरोपी का नाम पूछ कर जज ने किया था एक्सपोज, फिर भी नहीं टूटा फर्जीवाड़े का नेटवर्क

जबलपुर6 महीने पहले
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हनुमानताल पुलिस द्वारा जब्त बही में विजय नाम की भी बही मिली है। - Dainik Bhaskar
हनुमानताल पुलिस द्वारा जब्त बही में विजय नाम की भी बही मिली है।
  • जिला कोर्ट में फर्जी बही से जमानत लेने वालों के कई प्रकरण आ चुके हैं पूर्व में सामने, जेल से छूटते ही फिर हो जाते हैं सक्रिय
  • हनुमानताल पुलिस द्वारा किए गए खुलासे ने जमानत लेने वालों के सत्यापन प्रक्रिया पर उठाए हैं सवाल

कोर्ट में फर्जी तरीके से जमानत लेने वाली गैंग जबलपुर में अर्से से सक्रिय है। दो साल पहले जिला कोर्ट के एक जज ने दो महिला जमानतदारों को आरोपी का नाम पूछ कर एक्सपोज कर दिया था। दोनों महिलाएं आरोपी का नाम नहीं बता पाई थी। इसी तरह केंट में लूट के एक आरोपी की जमानत के लिए लगाई गई कटनी के बही पर कोर्ट को संदेह हुआ। जांच कराई गई तो कटनी कलेक्टर ने रिपोर्ट में उसे फर्जी बताया। बावजूद फर्जी जमानतदारों का नेटवर्क नहीं टूटा। अब हनुमानताल पुलिस के खुलासे से कोर्ट से जमानत ले चुके कई जघन्य मामले के आरोपियों पर संशय उत्पन्न हो गया है।

दो महिलाओं ने पांच लोगों की जमानत कराने का खुलासा किया था
जानकारी के अनुसार 20 नवंबर 2019 को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की कोर्ट में धोखाधड़ी के एक आरोपी की 50 हजार की जमानत लेने दो महिलाएं खड़ी हुईं। कोर्ट ने दोनों महिलाओं से आरोपी के नाम पूछा तो वे नहीं बता पाई। दोनों के खिलाफ ओमती थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 193, 205, 120 बी भादवि का प्रकरण दर्ज हुआ। गिरफ्तार हुई बरेला निवासी सबीना (46) और कुसनेर निवासी बबीता ठाकुर (40) ने पूछताछ में खुलासा किया के वे पूर्व में पांच आरोपियों की जमानत करा चुकी थीं।

कोर्ट मोहर्रिर व मुंशी की बैठक के बावजूद नहीं बदली सूरत
तत्कालीन एसपी अमित सिंह ने इस खुलासे के बाद तब कोर्ट मुंशी और मोहर्रिर की बैठक ली थी। इसमें सभी को कोर्ट में फर्जी जमानत लेने वाली गैंग को चिन्हित करते हुए स्थानीय थाने या अधिकारियों को सूचित करने का निर्देश दिया था। बावजूद कोर्ट मुंशी और मोहर्रिंर की ओर से आज तक किसी फर्जी जमानत गिरोह की सूचना नहीं दी गई। जबकि कोर्ट में मंडराने वाले इस तरह के फर्जी लोगों को ये आसानी से चिन्हित कर सकते हैं।

जबलपुर जिला कोर्ट भवन।
जबलपुर जिला कोर्ट भवन।

सलमा बी बिजली चोर की जमानत जेनुस्वा बनकर ली थी
24 जनवरी 2020 को अपर सत्र न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर की कोर्ट में बिजली चोरी के मामले में आरोपी महेश विश्वकर्मा की जमानत लेने हनुमानताल पुलिस की गिरफ्त में आई सलमा बी पहुंची थी। उसने कोर्ट में जो बही पेश की थी, उसमें उसका नाम जेनुस्वा था। बही में पता रमखिरिया कटंगी दर्शा रखा था। इस फर्जी बही को अब हनुमानताल पुलिस ने जब्त किया है। कोर्ट ने संदेह के आधार पर इस बही की राजस्व निरीक्षक से जांच कराई, तो उसकी पोल खुल गई। इस मामले में ओमती थाने में कोर्ट के आदेश पर धारा 420 ,467,468,471,205 का प्रकरण दर्ज हुआ था। इसी मामले में सलमा बी फरार चल रही थी।

लूट के आरोपी की फर्जी बही पर हो गई जमानत
20 सितंबर 2020 को जिला कोर्ट में लूट के आरोपी की जमानत लेने के लिए कटनी जिले की बही लगाई गई। कोर्ट को संदेह हुआ। बही छहरी कटनी निवासी विजय सिंह के नाम की थी। कोर्ट ने कटनी कलेक्टर से इसकी जांच कराई, तो बही फर्जी निकली। इस मामले में ओमती थाने में धारा 419, 467, 468, 471, 205 भादवि का प्रकरण दर्ज है। आज तक इसके आरोपी नहीं पकड़े जा सके हैं। हनुमानताल पुलिस द्वारा जब्त फर्जी बही में इस नाम की भी बही मिली है। इससे साफ है कि इस गिरोह में और चेहरे हैं।

इस खुलासे से जमानतदारों को लेकर उठा संशय
हनुमानताल पुलिस ने गुरुवार को एक गैंग का खुलासा किया है। एक महिला सहित कुल सात लोग गिरफ्तार हुए हैं। ये गिरोह फर्जी बही तैयार कर कोर्ट से पांच से दस हजार रुपए में लोगों की जमानत कराता था। इसका नेटवर्क पांच जिलों की तहसील से लेेकर जिला कोर्ट के न्यायालयों में फैला हुआ है। हर साल ये गिरोह 30 से 35 लोगों की जमानत कराता था। कुछ मामले में वे स्वयं अधिवक्ता से मिलकर पैसे के लिए जमानत कराने की बात करते थे। तो कई बार अधिवक्ता ही उनसे संपर्क करते थे। बही और आधार कार्ड का सत्यापन अनिवार्य नहीं होने से वे बच जाते थे।

ये भी नहीं हुआ
हनुमानताल पुलिस की गिरफ्त में आए सरगना गाजीनगर गली नंबर एक निवासी मुन्ना उर्फ शौकत अली के खिलाफ सिविल लाइंस में 2003 से 2018 के बीच कुल 10 प्रकरण फर्जी बही के दर्ज हुए। बावजूद जेल से छूटते ही वह फिर से अपना काम करने लगता था। फिर भी वह दूसरे नामों से फर्जी बही बनाकर लोगों की जमानत लेता रहा।

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