फांसी हुई तो कहा-हमें तोप से बांधकर उड़ा दो:50-50 गज दूर उड़े थे जबलपुर के राजा और उनके बेटे के चीथड़े; जानिए पूरी कहानी

आकाश निषाद (जबलपुर)6 दिन पहले

1857 की क्रांति में सबसे पहले किसी राजघराने से किसी ने बलिदान दिया तो वह थे पिता-पुत्र राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह। आजादी की लड़ाई के बीच गोंडवाना साम्राज्य के इन पिता-पुत्र को तोप से बांधकर उड़ा दिया गया था। इन्होंने मध्य भारत के जबलपुर से आजादी की ऐसी चिंगारी जगाई, जो शोला बन गई। इनकी बात इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि रविवार यानी 18 सितंबर को राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान दिवस है। इस मौके पर जबलपुर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ पहुंचे। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने डुमना एयरपोर्ट पर उपराष्ट्रपति धनखड़ की अगवानी की। जानते हैं भारत माता के दोनों वीर सपूतों की कहानी...

जानिए, कैसे तोप से उड़ा दिए गए पिता-पुत्र

बात 19वीं शताब्दी के मध्य की है। अंग्रेजों और लार्ड डलहौजी की हड़प नीति के खिलाफ प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की पृष्ठभूमि तैयार हो रही थी। इसकी जानकारी राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह को लगी। जबलपुर स्थित गढ़ा पुरवा में मंडला, सिवनी, नरसिंहपुर, सागर और दमोह समेत मध्य प्रांत के रजवाड़े परिवार जमींदार मालगुजार के साथ 52 गढ़ों से सेनानी भी मिलने आने लगे थे। इस बीच, सूबेदार बलदेव तिवारी ने अपनी 52वीं नेटिव इन्फेंट्री के साथ बलवा कर दिया। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह को कैंटोनमेंट से हटाकर रेजीडेंसी में रखा गया। डिप्टी कमिश्नर और दो अंग्रेज अफसर का न्याय आयोग बनाया गया। दोनों पिता-पुत्र पर 3 दिन तक राजद्रोह का केस चलाया गया। राजा के खिलाफ आरोप लगाया गया कि वह अपनी कविताओं के माध्यम से मध्य भारत में विद्रोह सुलगा रहे हैं। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई।

जबलपुर में शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के स्मारक को सजाया गया है।
जबलपुर में शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के स्मारक को सजाया गया है।

खुद की थी तोप से उड़ाने की गुजारिश

इतिहासकार डॉ. आनंद सिंह राणा के मुताबिक राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने विरोध करते हुए फांसी की सजा को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने खुद को तोप में बांधकर गोले से उड़ाने की गुजारिश की थी। इसके बाद 18 सितंबर 1857 को सुबह 11 बजे जबलपुर में दोनों को तोप से बांध दिया गया। इस दौरान दोनों राजाओं के चेहरे में शिकन तक नहीं थी। तोप से उड़ाने के आदेश देने के पहले राजा शंकर शाह ने स्वरचित कविता का प्रथम छंद गाया। इसमें अंग्रेजों के सर्वनाश की प्रार्थना की गई थी। इसी कविता को अंग्रेजों ने अपराध का आधार बनाया था। दूसरा छंद रघुनाथ शाह ने गाया। इसके बाद दोनों पिता-पुत्र को तोप के मुंह से बांधकर उड़ा दिया गया।

गोंडवाना साम्राज्य के राजा राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह।
गोंडवाना साम्राज्य के राजा राजा शंकर शाह और उनके पुत्र कुंवर रघुनाथ शाह।

50-50 गज दूर बिखरे चिथड़े

गढ़ा गोंडवाना संरक्षण संघ के अध्यक्ष किशोरीलाल भलावी के मुताबिक तोप की आवाज और दोनों को उड़ाने से चारों तरफ धुआं भर गया। राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह के सिर्फ हाथ-पैर तोप से बंधे रह गए। बाकी शरीर के मांस के लोथड़े और हड्डियां 50-50 गज दूर जाकर गिरे। इन्हें उनकी वीरांगना पत्नियां फूल कुंवर और मन कुंवर ने एकत्रित किया। कुंवर रघुनाथ शाह के पुत्र लक्ष्मण शाह ने उनका अंतिम संस्कार किया। इसके बाद गोंडवाना साम्राज्य में यह चिंगारी शोला बनकर जाग उठी। यह भारत देश का पहली घटना थी। जब अंग्रेजों ने पिता-पुत्र को एक साथ तोप में बांधकर उड़ा दिया गया था।