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यूपीएससी 2019 का रिजल्ट जारी:सतना के विनायक और आशीष का सिविल सेवा परीक्षा में चयन

जबलपुर2 महीने पहले
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संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा-2019 में यहां के विनायक चमडिय़ा और आशीष सिंह का चयन हुआ है। विनायक चमडिय़ा की 322 वीं और आशीष सिंह की 490 वीं रैंक लगी है। 24 वर्षीय दोनों प्रतिभागियों ने मेन्स की परीक्षा समाजशास्त्र विषय से दी थी। विनायक सिविल इंजीनियर हैं और आशीष टैक्सटाइल टेक्नालॉजी में बीटेक हैं।

विनायक : पहले ही प्रयास में सफलता -24 वर्षीय विनायक के पिता संदीप चमडिय़ा के पिता शुगर मर्चेन्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष हैं और मां डाली गृहणी हैं। दो भाइयों में सबसे बड़े विनायक का यूपीएससी के लिए यह पहला प्रयास था। एनआईटी कुरुक्षेत्र से वर्ष 2018 में सिविल इंजीनियर वर्ष बनने के बाद उन्हें एलएंड टी से साढ़े 6 लाख के पैकेज का जॉब आफर हुआ था,लेकिन उनकी मन सिविल सेवा में लगा हुआ था। उन्होंने बताया कि मेन्स की कोचिंग के लिए वह मई 2019 में दिल्ली चले गए। इसके बाद दिन में कम से कम 8 से 10 घंटे सेल्फ स्टडी की।
विनायक ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रतिभागियों के लिए कहा कि सेल्फ स्टडी पर फोकस करें और स्वयं के नोटस तैयार करें। इंजीनियर होने के बाद भी समाजशास्त्र विषय के चुनाव के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि यह उनकी अभिरुचि का विषय था।

आशीष सिंह: अभी लेंगे एक और चांस

यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा-2019 में 490 वीं रैंक पर कामयाब रहे यहां के आशीष सिंह की यह दूसरी कोशिश थी। उन्होंने कहा कि वह आईएएस आफीसर बनना चाहते हैं, इसलिए एक और चांस लेंगे।। आशीष के पिता बीएन सिंह यहां रेलवे में कार्यालय अधीक्षक हैं और मां केशकली गृहिणी हैं। उन्होंने आईआईटी नईदिल्ली से वर्ष 2017में टैक्सटाइल टेक्नालॉजी से बीटेक किया था। आशीष ने ऑनलाइन के सेल्फ स्टडी की और इसके लिए उन्होंने कैंपस सेलेक्शन को ठुकरा दिया था। तैयारी के लिए उन्होंने हर दिन कम से कम ६ घंटे दिए। आशीष सिंह के मुताबिक कई बार टाइम अधिक लगता है। मन लगा कर स्टडी की जरुरत होती है। आंसर के लिए प्रतिभागी को अधिक से अधिक प्रैक्टिस की भी आवश्यकता होती है।

सिंगरौली के मनोज ने 531वीं रैंक हासिल की|सिंगरौली (मोरवा)
सिंगरौली के मनोज शाह ने यूपीएससी की परीक्षा में 531वीं रैंक हासिल की हैं। मनोज बताते हैं कि उन्होंने पढ़ाई करते समय कभी भी तनाव नहीं लिया। उन्होंने बताया कि स्कूल, कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वह शुरूआत से प्रत्येक सब्जेक्ट की स्टडी और रिवीजन के लिये बाकायदा टाइम टेबल बना लेते थे। मनोज अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को भी देते हैं। खासकर अपने बड़े भाई नरेन्द्र शाह से वह ज्यादा ही प्रभावित हुये।
मनोज बताते हैं कि उन्होंने शुरूआत से प्रशासनिक सेवा में जाने का मन निर्धारित नहीं किया था। वह 2007 में डीएवी झिंगुरदह से 10वीं और 2009 में कोटा राजस्थान से १२वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, फिर 2013में आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई के करके २ साल जॉब की। इसके बाद उन्होंने आईआईएम कोलकाता से एमबीए किया। इसके बाद उनका झुकाव प्रशासनिक सेवा की ओर होने लगा। इस झुकाव का बड़ा कारण आसाम कैडर के आईएएस अपने बड़े भाई नरेन्द्र शाह को भी मानते हैं।

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