जानिए, UPSC में अहिंसा से पूछे गए इंटरव्यू में सवाल:53वीं रैंक लाने वाली जबलपुर की बेटी से पूछा- 'अफगानिस्तान संकट के समय आप वहां होती तो क्या करतीं?'

जबलपुरएक वर्ष पहले
यूपीएससी परीक्षा में देश भर में 53वीं रैंक।

जबलपुर की बेटी अहिंसा जैन ने यूपीएससी की परीक्षा पास की है। 2020 में 164वीं रैंक आई थी। सहायक आयकर आयुक्त (प्रशिक्षण के तहत) वर्तमान में एनएडीटी, नागपुर में प्रशिक्षण ले रही अहिंसा ने छठवें प्रयास और लगातार दूसरे साल यूपीएससी की परीक्षा में शामिल हुई थीं। इस बार 53वीं रैंक मिली है। जानिए, उनसे इंटरव्यू में किस तरह के सवाल पूछे गए और कैसे जवाब दिए?

अहिंसा ने बताया कि मेरा इंटरव्यू 23 अगस्त को आरएन चौबे सर के बोर्ड में हुआ था। मैं थोड़ा नर्वस थी। चौबे सर ने माहौल को हल्का करने में काफी मदद की। उनका पहल सवाल था कि आप आईआरएस की जॉब में है। आपको कैसा लग रहा है। एकेडमी में क्या-क्या सिखाते हैं। आपका एक्सपीरियंस कैसा है?

अहिंसा ने अपने अनुभव सुनाए। बताई कि ट्रेनिंग से उसका पर्सनालिटी डेवलपमेंट बढ़ाने में मदद मिली है। एक अधिकारी के तौर पर किस तरह निर्णय लेने होते हैं। इसकी समझ बढ़ी है।

अहिंसा जैन के मुताबिक इंटरव्यू में अधिकतर सवाल आप से जुड़े होते हैं।
अहिंसा जैन के मुताबिक इंटरव्यू में अधिकतर सवाल आप से जुड़े होते हैं।

बोर्ड चेयरमैन का दूसरा सवाल था कि सरकार रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स क्यों लेकर आई है, इस बिल में क्या बदलाव किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर क्या विवाद था? दरअसल टेलीकॉम कंपनियों से टैक्स विवाद के चलते केंद्र सरकार ने रेट्रो टैक्स रोल बैक बिल पास किया है। इस बिल के वापस लेने से पुरानी तारीखों से कैपिटल गेन पर टैक्स वसूली का नियम खत्म कर दिया है। अहिंसा के मुताबिक चूंकि मेरा ग्रेज्युएशन इलेक्ट्रॉनिक एवं टेलीकम्युनिकेशन में है, इस कारण इसका जवाब मैं अच्छे से दे सकी।

अफगानिस्तान संकट के समय आप वहां होती तो क्या करती? अपने दूतावास को खाली कराने का सरकार का निर्णय सही है या नहीं?

मैंने बताया कि इंडिया डेमोक्रेटिक कंट्री है। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हो चुका, जो आतंकवाद पोषित और डेमाक्रेसी में विश्वास न रखने वाली संस्था है। इस कारण भारत सरकार का निर्णय सही है। मेरा भी यही निर्णय होता।

पिछले प्रयास में आपकी रैंक मनचाही नहीं मिली, ये इंटरव्यू लेने वाली की गलती थी या आपकी कमी रह गई?

इंटरव्यू लेने वाले सभी कैंडिडेट को समान पैरामीटर्स ही पर परखते हैं, तो उनकी गलती तो नहीं है। कहीं न कहीं मेरी तरफ से ही चूक रह गई। फिर बताया कि इस अटैम्ट (प्रयास) में मैने क्या अलग किया। अपने हॉबीज पर पहले दिन से फोकस किया। अभी तक मेरी हॉबीज मैकेनिकल थी। एकेडमी में रहकर पर्सनालिटी डेवलपमेंट करने में मदद मिली।

अहिंसा ने बेंगलुरु में जॉब किया था। अगला सवाल था कि दोनों शहरों (जबलपुर और बेंगलुरु) में क्या अलग है?

बेंगलुरु आईटी सिटी है, तो जबलपुर नेचर सिटी है। मैं टैक्स विभाग से हूं तो अन्य सवाल इससे जुड़े ही सदस्यों ने पूछे। मसलन जीएसटी के अलग-अलग श्रेणी के बारे में जानकारी ली। जीएसटी के फायदे व नुकसान के बारे में पूछा गया।

पिता-भाई ने बचपन में साइकिल चलाना सिखाया था, उसी पर जवाब से इंटव्यू मैंने समाप्त किया।
पिता-भाई ने बचपन में साइकिल चलाना सिखाया था, उसी पर जवाब से इंटव्यू मैंने समाप्त किया।

आखिरी में बोर्ड मेम्बरों ने कहा कि उनके सवाल हाे चुके हैं, आपको कुछ अलग से अपने बारे में बताना है, तो बता सकती हैं। अहिंसा के मुताबिक मैने अपनी साइकिलिंग हॉबी के बारे में बताया कि कैसे तीसरी क्लास से मैं साइिकल से पढ़ने जाने लगी थी और फिर ये मेरी हॉबी बन गई। मेरे पापा और भाई ने मुझे साइकिल चलाना सिखाया था। मैंने अपना इंटरव्यू समाप्त किया था। अल्बर्ट आइंस्टीन के कोड से कि- जिंदगी साइकिल चलाने की तरह है। अपना बैलेंस बनाए रखने के लिए आपको चलते रहना होता है, जो बोर्ड सदस्यों को काफी पसंद आया था।

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