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हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से माँगा जवाब:चुनिंदा निजी अस्पतालों को ही क्यों दी गई सीधे निर्माताओं से रेमडेसिविर खरीदने की अनुमति, अगली सुनवाई 17 को

जबलपुरएक महीने पहले
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मप्र हाईकोर्ट - Dainik Bhaskar
मप्र हाईकोर्ट

मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि चुनिंदा निजी अस्पतालों को सीधे निर्माताओं से रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने की अनुमति क्यों दी जा रही है। चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस अतुल श्रीधरन की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से यह भी पूछा है कि निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन पर रोक क्यों लगाई गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 17 मई को निर्धारित की गई है।

हाईकोर्ट ने गुरुवार को सुनवाई शुरू होते ही 19 अप्रैल 2021 को 19 बिंदुओं पर दिए गए आदेश के संबंध में बिंदुवार पालन प्रतिवेदन रिपोर्ट माँगी। डिवीजन बैंच ने आरटीपीसीआर टेस्ट बढ़ाने सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असंतोष जाहिर किया। कोर्ट मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कहा कि रेमडेसिविर के संबंध में सरकार की नीति एक समान नहीं है।

राज्य सरकार ने कुछ निजी अस्पतालों को सीधे निर्माताओं से रेमडेसिविर खरीदने की अनुमति दी है, जबकि ज्यादातर निजी अस्पतालों को सरकार की ओर से रेमडेसिविर इंजेक्शन दिए जा रहे हैं। डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से इस पर जवाब माँगा है।

महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव ने कहा कि सरकारी आँकड़ों में केवल कंफर्म कोविड मरीजों की मौतों के आँकड़ों को शामिल किया जाता है। संदिग्ध मरीजों और घर में होने वाली मौतों को कोविड के आँकड़ों में शामिल नहीं किया जाता है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश में डेडिकेटेड कोविड हेल्थ सेंटर 672, डेडिकेटेड कोविड अस्पताल 21 और कोविड केयर सेंटर 255 बनाए गए हैं।

निजी अस्पताल में जाँच रिपोर्ट आने तक हो सकेगा कोविड का इलाज| डिवीजन बैंच ने गैलेक्सी अस्पताल जबलपुर में जाँच रिपोर्ट आने तक कोविड का इलाज करने की अनुमति दे दी है। यह आवेदन वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत सिंह की ओर से दायर किया गया था।

निजी अस्पतालों में क्यों रोका गया वैक्सीनेशन

हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज शर्मा की ओर से आवेदन दायर कर कहा गया कि सीएमएचओ जबलपुर ने 3 मई को आदेश जारी कर निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन पर रोक लगा दी है। सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों से 30 अप्रैल के बाद बचे हुए वैक्सीन वापस करने के लिए कहा है। श्री शर्मा ने कहा कि निजी अस्पतालों में वैक्सीनेशन पर रोक लगने से उन लोगों को दूसरा डोज लगाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा, जो निजी अस्पतालों में पहला डोज लगवा चुके हैं। इस पर डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से जवाब माँगा है।

जिला स्तर पर शिकायतों के निराकरण की व्यवस्था नहीं

कोर्ट मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने कहा कि राज्य सरकार ने जिला स्तर पर एक समिति का गठन किया गया है, जो सप्ताह में दो बार ऑक्सीजन और रेमडेसिविर के वितरण, निजी अस्पतालों में निर्धारित दरों पर इलाज, आयुष्मान कार्ड पर इलाज के बारे में बैठक करेगी, लेकिन समिति के पास पीड़ितों की शिकायत सुनने का अधिकार नहीं है। शिकायतों के निराकरण के लिए राज्य स्तर पर तीन आईएएस अधिकारियों की समिति बनाई गई है। श्री नागरथ ने कहा कि राज्य स्तरीय समिति के पास पीड़ितों की शिकायत लेकर पहुँचना संभव नहीं है।

सरकारी और निजी अस्पतालों को ऑक्सीजन आवंटन में भेदभाव

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे और नर्सिंग होम एसोसिएशन के अधिवक्ता श्रेयस पंडित ने शासकीय अधिकारियों के व्हाट्सएप ग्रुप का स्क्रीन शॉट पेश कर बताया कि सरकारी अस्पतालों को ऑक्सीजन का आवंटन ज्यादा और निजी अस्पतालों को कम किया जा रहा है। डिवीजन बैंच को बताया गया कि ऑक्सीजन का आवंटन मरीजों की संख्या के अनुपात में किया जाना चाहिए।

2.60 लाख रेमडेसिविर के लिए ग्लोबल टेंडर जारी

महाधिवक्ता पुरूषेन्द्र कौरव ने बताया कि सरकार लगातार रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता को बढ़ाने का प्रयास कर रही है। 31 मार्च को 60 हजार और हाल ही में 2 लाख रेमडेसिविर के लिए ग्लोबल टेंडर निकाले गए हैं। इससे प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कमी दूर हो सकेगी। कोर्ट मित्र श्री नागरथ ने कहा कि 31 मार्च को निकाले गए टेंडर के 60 हजार रेमडेसिविर अभी तक नहीं मिल पाए हैं। सरकार को रेमडेसिविर की उपलब्धता के बारे में दूरदर्शी योजना बनानी चाहिए।

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