नोटिस / पूरे प्रदेश में लागू क्यों नहीं हो रहा रेन-वॉटर-हार्वेस्टिंग नियम?

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  • जनहित याचिका पर नोटिस जारी कर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य से माँगा जवाब

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 04:00 AM IST

जबलपुर. कानून में प्रावधान होने के बाद भी रेन वाॅटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का पालन पूरे प्रदेश में न होने का आरोप लगाने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की युगलपीठ ने अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है। अधिवक्ता आदित्य संघी की ओर से दायर इस जनहित याचिका में कहा गया है कि पूरे प्रदेश में भूमि के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। कुछ जिलों में जलस्तर तो पाँच सौ मीटर नीचे तक पहुँच गया है। उन जिलों में लोगों को पानी लाने के लिए कई किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता है।

आवेदक का आरोप है कि भूमि विकास नियम की धारा 80 में रेन-वॉटर-हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर ही मकान का नक्शा स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है। नियम का कड़ाई से पालन नहीं किये जाने के कारण अकेले जबलपुर शहर में ही बारिश के मौसम में 25 अरब लीटर पानी व्यर्थ में बह जाता है। कमोबेश यही स्थिति पूरे प्रदेश की है। आरोप यह भी है कि नक्शा पास करने के दौरान नगर निगम द्वारा शुल्क तो ले लिया जाता है, लेकिन रेन-वॉटर-हार्वेस्टिंग का प्रावधान कागजों तक ही सीमित रह जाता है। इस बारे में अनावेदकों को उचित निर्देश दिए जाने की प्रार्थना करते हुए यह याचिका दायर की गई। मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपना पक्ष स्वयं रखा, जबकि केन्द्र सरकार की ओर से एएसजी जेके जैन व राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके वर्मा हाजिर हुए।

छतरपुर में क्यों नहीं खुल पा रहा सरकारी मेडिकल कॉलेज?

छतरपुर में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोले जाने की प्रार्थना करते हुए दायर जनहित याचिका पर जवाब पेश करने हाईकोर्ट ने राज्य सरकार व अन्य को दो सप्ताह का समय दिया है। चीफ जस्टिस अजय कुमार मित्तल और जस्टिस बीके श्रीवास्तव की युगलपीठ ने मामले पर जवाब पेश करने दो सप्ताह का समय देकर अगली सुनवाई 20 जुलाई को निर्धारित की है। छतरपुर के समाजसेवी हरि प्रकाश अग्रवाल द्वारा दायर इस याचिका में कहा गया है कि कोरोना महामारी के चलते वहाँ पर शासकीय मेडिकल कॉलेज की तुरंत आवश्यकता है, लेकिन शासन द्वारा लचर रवैया अपनाने के कारण पूर्व में ही स्वीकृत इस शासकीय मेडिकल कॉलेज के निर्माण में देरी पर देरी हो रही, जो अवैधानिक है। मामले पर मंगलवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से डॉ. रश्मि पाठक, राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली और मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए अधिवक्ता सतीश वर्मा हाजिर हुए।

लोक संचालनालय के जेडी को बनाया गया एडिशनल डायरेक्टर
लोक संचालनालय विभाग भोपाल में ज्वाॅइंट डायरेक्टर के पद पर पदस्थ धीरेन्द्र चतुर्वेदी की वह अवमानना याचिका जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने मंगलवार को निराकृत कर दी, जिसमें कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए आदेश के बाद भी उन्हें ज्वाॅइंट डायरेक्टर से एडिशनल डायरेक्टर पद पर 3 माह में पदोन्नति न दिए जाने को चुनौती दी गई थी। मामले पर मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आकाश चौधरी और राज्य सरकार की ओर से उपमहाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली हाजिर हुए। श्री गांगुली ने अदालत को बताया कि कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का पालन हो चुका है।
प्रदेश के 1601 वकीलों को दी गई आर्थिक सहायता
मप्र स्टेट बार काउंसिल ने कोरोना संकट से जूझ रहे अब तक 1601 वकीलों को मप्र अधिवक्ता सहायता (प्राकृतिक आपदा एवं अप्रत्याशित परिस्थितियाँ) 2020 के तहत 5-5 हजार रुपए की आर्थिक सहायता पहुँचाई है। ये अधिवक्ता प्रदेश के अलग-अलग 84 बार एसोसिएशनों के सदस्य हैं। अब तक काउंसिल ने कुल 80 लाख 5 हजार रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान की है। उक्त राशि सीधे वकीलों के खाते में ट्रांसफर की गई है।

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