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कैदी की मौत पर छलका पत्नी का दर्द:SP से बोली साहब! मेरी पांच साल की बेटी रोज पूछती है पापा कहां गए हैं, अब क्या जवाब दूं

जबलपुरएक महीने पहले
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सेंट्रल जेल जबलपुर में विचाराधीन बंदी जमतरा निवासी अनिल मरावी (32) की मौत मामले में आदिवासी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित परिवार भी एसपी से मिला। अनिल की पत्नी रोशनी ने एसपी सिद्धार्थ बहुुुगुणा को रोते हुए बताया कि पांच साल की मेरी बेटी चेतना मरावी है। वह रोज पूछती है कि पापा कब आएंगे? बताओ साहब बेटी काे क्या जवाब दूं?

अनिल मरावी की पत्नी रोशनी ने दैनिक भास्कर से अपना दर्द साझा किया। बोली-“मेरे पति अनिल मरावी और बीजाडांडी से भाई मुकेश आया हुआ था। 05 दिसंबर रविवार को दोनों घर में बैठे थे। तभी गौर चौकी की पुलिस और आबकारी की टीम पहुंची। हम आदिवासी हैं। घर में तीन बॉटल देशी शराब खुद के पीने के लिए बना कर रखे थे। इस पर पति व भाई को पुलिस पकड़ ले गई।

दोनों को छोड़ने के लिए 30 हजार रुपए मांग रही थी। भाई जहां काम करता है, वहां के सेट ने 10 हजार रुपए देकर उसे तो छुड़ा लिया। पर मैं 20 हजार रुपयों का इंतजाम नहीं कर पाई। मेरे पति को बेरहमी से चौकी में मारा-पीटा गया। मैने विरोध किया तो धक्का देकर चौकी प्रभारी ने बाहर निकलवा दिया। उसी दिन जेल भेज दिया।

अनिल मरावी (20) की जेल कस्टडी में मौत हो गई।
अनिल मरावी (20) की जेल कस्टडी में मौत हो गई।

06 दिसंबर को पति की तबियत खराब हुई। पहले जेल अस्पताल में और नौ दिसंबर को मेडिकल रेफर किया गया। 10 दिसंबर की सुबह मेरे पति की मौत हो गई। मेरे घर में बूढ़ी सास कीर्ति मरावी और पांच साल की बेटी चेतना है। बताओ? इन दोनों को लेकर हम कहां जाए? कौन मेरा खर्च चलाएगा? पुलिस ने मेरा सब कुछ छीन लिया। मुझे न्याय चाहिए। दोषी पुलिस कर्मियों पर एफआईआर दर्ज हो।’

आदिवासी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित परिवार एसपी को ज्ञापन के माध्यम से निष्पक्ष जांच और चौकी प्रभारी को हटाने की मांग करता हुआ।
आदिवासी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पीड़ित परिवार एसपी को ज्ञापन के माध्यम से निष्पक्ष जांच और चौकी प्रभारी को हटाने की मांग करता हुआ।

पुलिस करे निष्पक्ष जांच-घनघोरिया

आदिवासी समाज के तमाम जिम्मेदार लोग 06 दिसंबर को गौर चौकी में हुई घटना को लेकर यहां आए थे। एक आदिवासी नौजवान को, जो अपराध में पकड़ा गया था। उसे उसकी ही पत्नी व मां के सामने इतना मारा गया कि दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। एक तरफ देश व प्रदेश की सरकार आदिवासियों के हित की बात कर रही हो। तब इस तरह की घटना गलत है। इसकी निष्पक्ष जांच हो, जो भी दोषी हो, उन पर कार्रवाई हो। पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद मिले। और इस घटना के लिए दोषी चौकी प्रभारी को तुरंत वहां से निलंबित कर हटाया जाए।

मजिस्ट्रियल जांच के आधार पर होगी कार्रवाई

एसपी सिद्धार्थ बहुगुणा ने कहा कि पीड़ित परिवार की तीन मांग थी। पहली पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद दिलाने का, इसके लिए जिला प्रशासन से बात किया हूं। दूसरी मांग थी निष्पक्ष जांच की तो मामले की पहले से ही मजिस्ट्रियल जांच चल रही है। तीसरी मांग थी कि चौकी प्रभारी सहित दोषी पुलिस कर्मियों को हटाने की, तो उनका परीक्षण कराया जा रहा है। जांच में उनके खिलाफ तथ्य मिलते हैं तो कार्रवाई होगी।