पैसे नहीं, काम मिल नहीं रहा, कहाँ जाएँ साहब:लॉकडाउन लगने से श्रमिकों की मुसीबत, कहीं भी बैठो तो पुलिस करती है कड़ाई

जबलपुर6 महीने पहले
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हर दिन कमाने हर दिन खाने वाले इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। - Dainik Bhaskar
हर दिन कमाने हर दिन खाने वाले इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं है।
  • काम की आस में मजदूर हर दिन बैठे रहते हैं मंडी में

कोरोना संक्रमण फैलने और लॉकडाउन लगने से सबसे ज्यादा प्रभावित मजदूर वर्ग हो रहा है। हर दिन कमाने हर दिन खाने वाले इन मजदूरों के पास कोई काम नहीं है। कृषि उपज मंडी के सामने और दीनदयाल चौक के आसपास एक दर्जन से ज्यादा मजदूर पूरा दिन इसी आस में बैठे रहते हैं कि कोई काम मिल जाये।

मजदूरों का कहना है कि कोई फुटपाथ पर रहता है तो कोई झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहा है अब तो हाल ऐसा है कि राशन भी खत्म हो गया है और पैसे भी नहीं बचे हैं आखिर हम कहाँ चले जाएँ साहब। यहाँ भी पुलिस नहीं बैठने देती है डंडे मारकर भगाती है। ऐसा ही चलता रहा तो भूखे मर जाएँगे। हम गरीबों की कोई सुनता ही नहीं है।

कोई मंडला तो कोई शहडोल जिले का रहने वाला

मंडी गेट के सामने बैठे एक दर्जन से ज्यादा मजदूरों जिसमें आशा बाई, धनीराम, राधा बाई, गुड्डा, पूजा बाई, अरविंद, दशरथ, त्रिलोक आदि ने बताया कि कोई शहडोल जिले के दूरदराज गाँव का है तो कोई मंडला के निवास, बबलिया और आसपास के गाँव से आया है। कुछ कुंडम क्षेत्र के रहने वाले हैं। वे अपने गाँव जा नहीं सकते वहाँ भी जाएँगे तो क्या खाएँगे।

उम्मीद में गुजर जाता है पूरा दिन

लाॅकडाउन में मजदूरों से वहीं काम कराया जा सकता है जहाँ निर्माण स्थल के आसपास ही मजदूर रह रहे हों, बाकी किसी तरह के काम की परमीशन नहीं है। ऐसे में मजदूरों का एक बड़ा वर्ग प्रभावित हो रहा है। दीनदयाल चौक के आसपास बैठे मजदूरों ने बताया कि यहाँ बैठे रहने पर कई बार लोग आते हैं तो कोई भोजन दे जाता है तो कोई राशन, कुछ लोग ऐसे भी आते हैं कि पैसे भी दे जाते हैं। इसी उम्मीद में मजदूर पूरे दिन बैठे रहते हैं कि उन्हें कुछ मिल जायेगा।

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