• Hindi News
  • Local
  • Mp
  • Jhabua
  • 358 Cases Of Lumpy Virus In The District, Two Deaths In The Figures, Silence In The Animal Market, Considering To Increase The Ban

लंपी वायरस:जिले में लंपी वायरस के 358 केस, आंकड़ों में दो की मौत, पशु हाट बाजार में सन्नाटा, रोक बढ़ाने पर विचार

झाबुआ19 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
रविवार को झाबुआ हाट बाजार के दिन पशु बाजार का स्थान खाली रहा। - Dainik Bhaskar
रविवार को झाबुआ हाट बाजार के दिन पशु बाजार का स्थान खाली रहा।

जिले में लंपी वायरस से पीड़ित पशु अब लगभग हर जगह मिल रहे हैं। पशु चिकित्सालयों में भीड़ लग रही है। लोग उपचार के लिए तो पहुंच ही रहे हैं, साथ ही झाड़ फूंक भी करवा रहे हैं। ऐसे में बीमारी बढ़ भी रही है। हालांकि अफसर बता रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है। लोग समय पर उपचार के लिए मवेशी लेकर आ रहे हैं। अभी तक जिले में दूध उत्पादन पर भी असर नहीं पड़ा है। एक सप्ताह से अधिक समय से पशु हाट बाजार पर लगाई रोक का असर अब दिख रहा है। रविवार को झाबुआ में भी पशु हाट स्थल पर सन्नाटा पसरा रहा।

अब प्रशासन रोक को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। अभी 15 दिन की रोक लगाई गई है। जिले में पंद्रह दिन पहले से वायरस पहुंच चुका है। पिटोल, राणापुर, रंभापुर, मेघनगर, रामा, पेटलावद सहित सभी जगह पशुओं में संक्रमण मिल रहा है। सबसे ज्यादा चिंता रंभापुर, काकानवानी, हरिनगर, खवासा, भामल और इनके आसपास के गांवों को लेकर है। ये सभी स्थान राजस्थान और गुजरात की सीमा के पास हैं। रंभापुर और आसपास का इलाका जिले का सबसे बड़ा दूध उत्पादक क्षेत्र है। यहां संक्रमण को नियंत्रित करना सबसे अधिक जरूरी है।

पशुओं के टीकाकरण के लिए पर्याप्त डोज अभी नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में पशुपालकों को सलाह दी जा रही है कि वो संक्रमित या लक्षण वाले पशुओं को अलग रखें।

एक ही लैबोरेटरी
वायरस की जांच के लिए पूरे देश में एक ही लैबोरेटरी है। ये भोपाल में है। ऐसे में जांच के लिए सारे सैंपल यहां पहुंच रहे हैं। अफसरों ने जिलों में पशुपालन विभाग के अफसरों से कहा है कि इस वायरस के लक्षण आंखों से ही स्पष्ट दिखाई देते हैं। चेचक के बड़े रूप की तरह शरीर पर फफोले होते हैं। ऐसे में जांच के लिए सैंपल भेजने की बजाय वायरस की पुष्टि मवेशी की स्थिति देखकर करें।

-लगातार सर्वे चल रहा
विभाग की टीम गांव-गांव में सर्वे कर रही है। मृत्यु दर बहुत अधिक नहीं है। अब पशुपालक खुद उपचार के लिए मवेशियों को ला रहे हैं। -विल्सन डावर, उप संचालक, पशुपालन विभाग

खबरें और भी हैं...