CM ने झाबुआ कलेक्टर को हटाया, जानिए वजह:कलेक्टर पर 3 बार भड़के थे आदिवासी, 32 किमी पैदल आए छात्रों से नहीं मिले थे

वीरेंद्र राठौर/झाबुआ5 महीने पहले

प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों एक्शन में हैं। सोमवार को झाबुआ एसपी को सस्पेंड करने के बाद मंगलवार को उन्होंने यहां के कलेक्टर सोमेश मिश्रा को भी हटा दिया। इसके साथ ही अपर आयुक्त राजस्व रजनी सिंह को झाबुआ का नया कलेक्टर बनाया गया है। इस संबंध में आदेश जारी होने के बाद रजनी को इंदौर से रिलीव भी कर दिया गया है। सीएम ने दोनों ही मामलों में आदिवासी वोटबैंक को ध्यान में रखते हुए तुरंत कार्रवाई की। भ्रष्टाचार की शिकायतें तो पहले भी खूब हुईं, लेकिन आदिवासियों के बीच बनते जा रहे परसेप्शन को इस प्रशासनिक सर्जरी का बड़ा कारण माना जा रहा है। तीन उदाहरणों से समझिए प्रदेश में आदिवासियों की बढ़ती नाराजगी...

केस 1 : कलेक्टर से मिलने पहुंचे स्टूडेंट्स के पैरों में पड़ गए थे छाले
छात्रवृत्ति नहीं मिलने से परेशान स्टूडेंट्स बीते महीने 32 किमी पैदल चलकर झाबुआ कलेक्टर से मिलने पहुंचे थे। आरोप हैं कि कलेक्टर छात्रों से मिले तक नहीं, न ही किसी ने रास्ते में छात्रों को समझाने की कोशिश की। 32 किमी पैदल चलने से इन छात्रों के पैरों में छाले पड़ गए, कुछ की तबीयत खराब हुई तो उन्हें अस्पताल तक ले जाना पड़ा था। कलेक्टर का ऐसा ही रवैया जनवरी में भी सामने आया था। इससे आदिवासी स्टूडेंट्स के बीच सरकार और प्रशासन के खिलाफ गुस्सा भड़क रहा था। जानें पूरा मामला

ये आदिवासी छात्र 32 किमी चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, लेकिन कलेक्टर इनसे मिले तक नहीं।
ये आदिवासी छात्र 32 किमी चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे, लेकिन कलेक्टर इनसे मिले तक नहीं।

केस 2 : कलेक्टर को स्कूली लड़की ने कर दिया था चैलेंज
इससे पहले भी झाबुआ कलेक्टर का मामला सुर्खियों में तब आया था जब 9 महीने पहले कॉलेज के छात्र अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन देने पहुंचे थे। तब भी कलेक्टर छात्रों से मिलने नहीं पहुंचे। दो घंटे धूप में खड़े रहने के बाद छात्रों का पारा चढ़ गया। इसी भीड़ में मौजूद लड़की निर्मला ने कलेक्टर को चैलेंज करते हुए कहा था- आदिवासी छात्रों की मदद नहीं कर सकते तो हमको कलेक्टर बना दो। देशभर में इस लड़की का वीडियो वायरल हुआ था। जानिए पूरा मामला

आदिवासी छात्रा निर्मला ने झाबुआ कलेक्टर को चैलेंज कर दिया था।
आदिवासी छात्रा निर्मला ने झाबुआ कलेक्टर को चैलेंज कर दिया था।

केस 3 : सीएम को मिली थी भ्रष्टाचार की शिकायत
सीएम शिवराज सिंह चौहान से जिले में सरकारी योजनाओं और जमीनों के मामले में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसके पहले जब मार्च में सीएम भगोरिया उत्सव में शामिल होने झाबुआ के थांदला पहुंचे थे, तब भी सीएम से स्कूलों में घटिया खेल सामग्री बांटने की शिकायत की गई थी। सीएम ने जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। लेकिन मामले में FIR के आगे बात नहीं बढ़ी। इसके अलावा झाबुआ जिले में लगातार आदिवासी छात्र अपने हक के लिए कई बार आंदोलन कर चुके हैं। इन सब बातों को लेकर भी आदिवासी समाज के युवाओं में गुस्सा था।

झाबुआ जिले के पेटलावद की चुनावी सभा में सीएम। एक दिन पहले ही उन्होंने सभा ली और अगले दिन कलेक्टर को भी हटा दिया।
झाबुआ जिले के पेटलावद की चुनावी सभा में सीएम। एक दिन पहले ही उन्होंने सभा ली और अगले दिन कलेक्टर को भी हटा दिया।

अचानक मिली थी कलेक्टर पद पर पोस्टिंग
कलेक्टर सोमेश मिश्रा की पोस्टिंग 13 अप्रैल 2021 को झाबुआ में अचानक हुई थी। कोरोना काल में तत्कालीन कलेक्टर रोहित सिंह संक्रमित हो गए। साथ ही संक्रमण बढ़ रहा था। बॉर्डर का जिला होने से सरकार ने चिकित्सा शिक्षा विभाग में उप सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे सोमेश मिश्रा को अचानक कलेक्टर बना दिया। मिश्रा के पास आयुष्मान भारत मिशन के सीईओ का अतिरिक्त प्रभार भी था। लेकिन डेढ़ साल में ही आदिवासियों की लगातार मोर्चा बंदी और जयस संगठन के हल्ला बोल ने भाजपा सरकार को अलर्ट कर दिया।

प्रदेश सरकार ने मंगलवार 20 सितम्बर को सोमेश मिश्रा को हटाकर रजनी सिंह को झाबुआ का नया कलेक्टर बनाने का आदेश जारी किया।
प्रदेश सरकार ने मंगलवार 20 सितम्बर को सोमेश मिश्रा को हटाकर रजनी सिंह को झाबुआ का नया कलेक्टर बनाने का आदेश जारी किया।

झाबुआ की नई कलेक्टर बनीं रजनी सिंह
शासन ने सोमेश मिश्रा की जगह संभागायुक्त कार्यालय इंदौर में अपर आयुक्त के पद पर पदस्थ रजनी सिंह को झाबुआ कलेक्टर बनाकर भेजा है। इससे पहले वे बालाघाट जिले में जिला पंचायत सीईओ पद पर भी रह चुकी हैं। संभागायुक्त डॉक्टर पवन कुमार शर्मा से मुलाकात के बाद रजनी सिंह को इंदौर से रिलीव कर दिया गया। ​​​​अब ​​​उनके सामने आदिवासी स्टूडेंट्स और उनके परिवारों से तालमेल बैठाकर भाजपा सरकार के लिए भरोसा जीतना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इसकी बड़ी वजह है कि यह जिला मालवा-निमाड़ में आता है और आदिवासी बहुल है। सरकार का पूरा फोकस आदिवासियों पर है, यह किसी से छुपा नहीं है। ऐसे में अगले साल होने वाले चुनाव से पहले 'सबकुछ ठीक' करना CM शिवराज सिंह चौहान के लिए भी जरूरी है।

झाबुआ की नई कलेक्टर रजनी सिंह बालाघाट जिले में जिला पंचायत सीईओ भी रह चुकीं है।
झाबुआ की नई कलेक्टर रजनी सिंह बालाघाट जिले में जिला पंचायत सीईओ भी रह चुकीं है।