मां अहिल्यादेवी व्याख्यानमाला:हम भारतीय बातों को अंग्रेजी में पढ़कर हिंदी में ट्रांसलेट करते हैं, इसलिए उसका स्वरूप बिगड़ जाता है- डॉ. बालमुकुंद पांडेय

पेटलावद14 दिन पहले
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कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों ने दी प्रस्तुति। - Dainik Bhaskar
कार्यक्रम में स्कूल के बच्चों ने दी प्रस्तुति।

हम संपूर्ण समर्पण करते है, साष्टांग प्रणाम करते है, इसलिए हम हिंदू है और जो त्यागने योग्य है, उसे त्यागते है, इसलिए हम हिंदू है। संपूर्ण समर्पण कृत्य, कर्तव्य, अपने ईश्वर, अपने पूज्य के सामने करते है। बल के सामने नहीं, दंड के सामने नहीं, परंपरा का निर्वहन करना ही अच्छे संस्कारों का घोतक है। हिंदू परंपरा में कन्या के विवाह से लेकर हर निर्णय में मातृ शक्ति का निर्णय व सहभागिता रहती है।

उक्त उद्गार मां अहिल्यादेवी व्याख्यानमाला समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन प्रखर वक्ता राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के डाॅ. बालमुकुंद पांडेय ने अपने विषय भारत एक प्राचीन राष्ट्र, एक राष्ट्र-हिंदू पर व्यक्त किए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों ने भारत माता व अहिल्यादेवी के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। समिति के सदस्य नरेश नारायण शुक्ला ने स्वागत भाषण दिया। धर्म कक्षा के बच्चों ने दैनिक दिनचर्या के मंत्रों की प्रस्तुति दी। साथ ही सफलता विद्या मंदिर के बच्चों ने गणेश वंदना की प्रस्तुति दी। गुरुकुल स्कूल के बच्चों ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। विषय गीत शुभम पंवार ने प्रस्तुत किया। मुख्य वक्ता बालमुकुंद पांडेय का सम्मान समिति के सदस्य वीरेंद्र भट्ट व पंकज पटवा ने किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे भागवताचार्य पं. देवेंद्र आचार्य का स्वागत कृष्णपाल सिंह राठौर व विनोद बाफना ने किया। मंच पर समिति के अध्यक्ष गोपाल चौधरी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में पूर्ण वंदे मातरम का गायन किया गया। अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए। कार्यक्रम का संचालन यश रामावत व आभार जीवन भट्ट ने माना।

हिंदी में ट्रांसलेट कर पढ़ रहे हैं
राष्ट्र राजनीतिक इकाई नहीं है। बाहर के लोगों ने आकर हमारे राष्ट्र को बिगाड़ना चाहा है। हमारे चिंतन का केंद्र जो भारत था उस चिंतन के केंद्र को यूरोप में कर दिया। 1820 मनु स्मृति का प्रकाशन पहली बार अंग्रेजी में हुआ। जिसमें अंग्रेजों ने संस्कृत के शब्दों का अनुवाद अपने हिसाब से किया। हमारी आज की समस्या यह है कि हम भारतीय बातों को अंग्रेजी में पढ़ कर उन्हें फिर हिंदी में ट्रांसलेट कर पढ़ रहे है। इसलिए उसका स्वरूप बिगड़ता जा रहा है।

हिंदू एक परंपरा है हिंदू का यह चरित्र नहीं है, किसी को भगाएं या किसी को डराए, किसी का सिर झुकाए हिंदू का उद्देश्य नहीं है। सब को निर्भय करने का काम हिंदू का है। जब समाज निर्भय होगा तब तक भारत में हिंदुत्व रहेगा। हिंदू एक परंपरा है जो की पुरातन है और नित्य नूतन है। नए अवतार में हिंदुत्व आता है। जो की सबको गले लगाता है। भारत को भारत माता कहने में जो तैयार है वह हिंदू है।

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