दोस्त की मौत से दुखी होकर खुद को मारी गोली:कटनी में फ्रेंडशिप-डे से एक दिन पहले खुदकुशी; सोशल मीडिया पर लिखा-बहुत दर्द देती हैं, तेरी यादें

रवि पांडेय, कटनी4 महीने पहले

सो जाऊं तो जगा देती हैं, जग जाऊं तो रुला देती हैं, बहुत दर्द देती हैं, तेरी यादें...

दोस्त की याद में ये पंक्तियां कटनी के उस युवक ने सोशल मीडिया पर लिखी थीं, जो अब इस दुनिया में नहीं है। फ्रेंडशिप-डे यानी 7 अगस्त से एक दिन पहले शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात घर की तीसरी मंजिल पर उसका शव मिला। उसने गोली मारकर खुदकुशी कर ली। उसकी बॉडी के पास एक कट्टा पड़ा था और सिर में गोली का सुराख था। इस वाकये से ठीक पहले उसने अपने दोस्तों को कॉल करके कहा था- कल मेरी मिट्‌टी में आ जाना। आधी रात को भागे-भागे दोस्त उसके घर पहुंचे तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

ये कहानी है कटनी शहर के सिविल लाइन इलाके में रहने वाले 22 साल के गगन सोनी की। जो अपने दोस्त योगेश तिवारी की जुदाई के गम में बेहद परेशान था और बीती कई रातों से सो नहीं पा रहा था। दरअसल इस साल 7 फरवरी को ऐसा कुछ हुआ जिसने गगन की जिंदगी बदलकर रख दी। एक सड़क हादसे में योगेश और श्रजल शुक्ला की मौत हो गई। श्रजल भी गगन का दोस्त था लेकिन योगेश से ज्यादा करीबी थी। हादसे में योगेश के गुजर जाने से जैसे गगन की जिंदगी का एक हिस्सा भी चला गया। वो हर समय उदास रहने लगा। वो उन जगहों पर जाता रहता, जहां उसने योगेश के साथ वक्त गुजारा था। वहां बैठकर अकेले में रोता था।

गगन ने सोशल मीडिया पर योगेश की फोटो शेयर कर ये लाइनें लिखी थीं।
गगन ने सोशल मीडिया पर योगेश की फोटो शेयर कर ये लाइनें लिखी थीं।

योगेश से दोस्ती लत में बदल चुकी थी

योगेश और गगन की दोस्ती बचपन की थी। जो करीब 18 साल पहले तब शुरू हुई थी जब योगेश पहली बार नानी के घर आया था। जो कि गगन के घर के पड़ोस में रहती थीं। यहीं से दोनों की दोस्ती बढ़ती चली गई। दोनों ने एक ही स्कूल में दाखिला ले लिया। दसवीं तक की पढ़ाई भी साथ-साथ की। साथ पढ़ते-पढ़ते कब दोनों एक-दूसरे के लिए जरूरी हो गए, पता ही नहीं चला। गगन और योगेश जिंदगी का ज्यादा से ज्यादा समय एक-दूसरे के साथ बिताने लगे। दरअसल ये दोस्ती एक लत में बदल चुकी थी। एक-दूसरे के बिना एक दिन भी जीना दोनों के लिए मुश्किल था। ऐसे में योगेश की मौत ने गगन को गहरा सदमा दे दिया।

दो बार की खुदकुशी की कोशिश

योगेश के जाने के करीब एक माह बाद गगन ने वो किया जिसका अनुमान भी घरवाले नहीं लगा सकते थे। दोस्त की याद में उसने खुदकुशी की कोशिश की। वो अपनी बाइक से एक तेज रफ्तार ट्रक से सामने से जा भिड़ा। शरीर पर जो चोट आई उसके घाव तो एक माह में ही भर गए लेकिन गगन के मन का घाव अब भी हरा था। उसने दोबारा छत से कूदकर जान देने की कोशिश की। फिर चोट आई लेकिन वो फिर बच गया। मौत उसके साथ खेल रही थी। हर बार जिंदगी जीत रही थी।

तीसरी बार कट्टे से मारी खुद को गोली

खुदकुशी के इन तरीकों को नाकाम होने के बाद गगन ने कट्‌टे का इंतजाम किया। 5-6 अगस्त की दरमियानी रात कनपटी में गोली मारी। गगन दुनिया छोड़ गया। प्राइवेट जॉब करने वाले मध्यमवर्गीय पिता, हाउस वाइफ मां और एक बड़े भाई कभी समझ ही नहीं पाए कि गगन डिप्रेशन के चरम पर है और उसे लगातार काउंसिलिंग की जरूरत है। काउंसिलिंग तो उन्होंने की लेकिन मां की तरह, पिता की तरह और भाई की तरह। दोस्त की तरह नहीं। जबकि गगन की जिंदगी में दोस्त की कमी थी।

डिप्रेशन ने ली युवक की जान

कोतवाली टीआई अजय सिंह ने भी बताया कि युवक ने अपने आप को गोली मारने से पहले दोस्तों को फोन लगाया था और कहा था कि कल मिट्टी में आ जाना। यह सुनकर उसके दोस्त घर के बाहर पहुंचे थे, युवक की खोजबीन करने के दौरान वह अपने घर की तीसरी मंजिल में मृत अवस्था में मिला। उसके सिर से खून निकल रहा था और पास में ही एक देशी कट्टा रखा था। पुलिस का कहना है कि युवक डिप्रेशन में था। मामले की जांच की जा रही है।

सड़क हादसे में योगेश की मौत के बाद वह काफी अकेला महसूस करता था।

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