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शावकों को मां का इंतजार:वन विभाग के अधिकारिकायों ने बाघिन के आने का इंतजार किया, शावकों को पदचिन्हों के पास छोड़ा

कटनीएक महीने पहले
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वनि विभाग ने शावकों को पिंजरे में उस स्थान पर रखा है, जहां बाघिन के पंजे के निशान दिखे थे। - Dainik Bhaskar
वनि विभाग ने शावकों को पिंजरे में उस स्थान पर रखा है, जहां बाघिन के पंजे के निशान दिखे थे।

अपनी मां से बिछड़कर बरही वनपरिक्षेत्र के झिरिया गांव में आए बाघ के दो शावक वन विभाग के लिए सिरदर्द बन रहे हैं। वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद थी कि अपने शावकों को खोजते बाघिन उन्हें लेने आएगी, लेकिन दो दिन बीतने के बाद भी बाघिन नहीं आई। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने रेस्क्यू कराते हुए दोनों शावकों काे गांव से हटाकर जंगल में उस स्थान पर रख दिया, जहां पर बाघिन के पदचिन्ह मिले हैं। दोनों शावको के लिए वन विभाग ने भोजन की व्यवस्था भी की है। रेस्क्यू के दौरान जबलपुर के सीसीएफ और डीएफओ सहित पूरी टीम मौजूद रहे।

बता दें कि 12 दिसंबर को झिरिया गांव निवासी रामनरेश साहू के घर के पास बनी बाड़ी में बाघ के दो शावकों के आने की जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम वहां पर पहुंची थी। दोनों शावक की उम्र करीब एक से डेढ़ है। शावक जहां पर हैं, वहां पर बेरिकेड्स लगाकर सुरक्षा घेरा बना दिया गया है। ग्रामीणों को उस ओर जाने से मना कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि झिरिया गांव का जंगल बांधवगढ़ टाईगर रिजर्व के जंगल से लगा हुआ। ऐसा माना जा रहा है कि बाघ के शावक बांधवगढ़ से ही झिरिया के जंगल आए होंगे और फिर वहां से गांव की ओर आ गए हैं।

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