पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अच्छी खबर:53 दिन बाद 1 जून से अनलॉक होगा बड़वानी, बीते साल भी 1 जून से ही खुला था बाजार

बड़वानी25 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • सावधानी बरतें

53 दिन के बाद अब 1 जून को फिर से जिंदगी अनलॉक होगी। यह संयोग है पिछले साल भी 25 मार्च से लगे लॉकडाउन के बाद 1 जून से अनलॉक-1 की शुरुआत हुई थी। अनलॉक को लेकर जिले में कार्यवाही शुरू हो गई है। 1 जून से 50 फीसदी दुकानों को खोलने की छूट मिलेगी। कलेक्टर के निर्देश पर राजस्व अमले ने रविवार को शहर की दुकानों पर पेंटर से नंबर लिखवाने का काम शुरू किया, जो सोमवार तक पूरा होगा। तारीख के अनुसार संबंधित सम या विषम नंबरों की दुकानें खुलेंगी। यानी पहले दिन 1 जून को विषम नंबरों की दुकानें खुलेंगी लेकिन शनिवार रात 10 बजे से सोमवार सुबह 6 बजे तक जनता कर्फ्यू रहेगा। कलेक्टर शिवराजसिंह वर्मा ने बताया सोमवार से दुकानदारों व कर्मचारियों को टीका लगाएंगे। 15 जून के बाद वे दुकानें खुलेंगी, जिनके संचालकों व कर्मचारियों ने टीका लगवाया है।

इसका प्रमाण दुकान पर रखना होगा। बिना टीका दुकान चलाने पर 15 दिन के लिए दुकान सील की जाएगी। केमिस्ट, राशन, किराना, फल और सब्जियां, डेयरी, आटा चक्की, पशु आहार की दुकानें खुलेंगी। दूध व केमिस्ट दुकानों को छोड़कर शेष दुकानें शाम 5 बजे तक खुली रहेगी।

ये जरूरी है...

फल-सब्जी वालों को भी फ्रंट लाइन वर्कर मान लगाएंगे टीका
जिले में स्थाई दुकानदार या फिर ठेले पर फल, सब्जी सहित अन्य वस्तुएं बेचने वाले लोगों को फ्रंट लाइन वर्कर मानकर टीका लगाया जाएगा। इन लोगों को अपना मोबाइल नंबर, आधार कार्ड की जानकारी संबंधित एसडीएम को सोशल मीडिया के माध्यम से देना होगी। एसडीएम घनश्याम धनगर ने दुकानों की निगरानी के लिए शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। नियम के खिलाफ दुकान खोलने पर कार्रवाई की जाएगी।

अब तक की स्थिति

  • 8294 लोग संक्रमित हुए अब तक
  • 7962 लोग स्वस्थ होकर लौटे घर
  • 83 लोगों की अब तक हुई मौत
जानिए..जिले में किन शर्तों के साथ क्या खुलेगा
जानिए..जिले में किन शर्तों के साथ क्या खुलेगा

लेकिन इस दर्द से लें सबक

क्योंकि... अब तक 83 लोगों की मौत की पुष्टि, गैर सरकारी आंकड़ा और ज्यादा

1 जून से जिंदगी फिर से अनलॉक हो रही है। लेकिन हम लोगों को अनलॉक के मायने समझना होंगे। छूट का फायदा उठाने में समझदारी दिखाना होगी, ताकि हम खुद को और परिवार को तीसरी लहर से बचा सके। क्योंकि कोरोना की वजह से कई परिवारों के चिराग बुझ गए। किसी ने बेटा खोया, तो किसी ने पति या पत्नी को।

कई परिवार तो ऐसे हैं जिनके घर में अब कमाने वाला हीं नहीं बचा। वारिस के रूप में अब छोटे-छाेटे बच्चे व महिलाएं बची हैं। जिनके सामने बच्चों की परवरिश, इलाज के लिए कर्ज में ली राशि का भुगतान व आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।

अब सतर्क रहें वरना हालात और बुरे हो जाएंगे
जिले में हेल्थ बुलेटिन के अनुसार अब तक 83 लोगों की मौत हुई है। लेकिन हकीकत इससे उलट है। जानकारी के मुताबिक मरने वालों की संख्या 500 से अधिक है। जिला मुख्यालय पर स्थित मुक्तिधाम में अप्रैल माह में रोजाना 5 से 15 तक चिताएं जली है। अप्रैल महीने में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। पिछले दिनों मुक्तिधाम में ये हालात थे, कि चिता जलाने के लिए टीन शेड कम पड़ गया। परिसर में लोगों को अंतिम संस्कार करना पड़े।

राहत की बात है कि गांवों व फलियों में स्थिति बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ी। वर्ना महामारी को काबू करना आसान नहीं होता, क्योंकि जिले के हजारों लोग रोजगार के लिए महाराष्ट्र पलायन करते हैं। महाराष्ट्र में लॉकडाउन के पहले इन लोगों की घर वापसी हुई। अब सतर्क रहना जरूरी है। लापरवाही बरती, तो इसका खामियाजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ेगा। इसके चलते बाजार खुलने के बाद गाइड लाइन का पालन जरूर करें, ताकि ऐसी भयावह तस्वीर फिर से न बने।

खबरें और भी हैं...