सतर्क रहें:कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस का खतरा, अब तक 8 मरीज इंदौर रैफर

बड़वानी8 महीने पहले
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  • ऑपरेशन के बाद स्वस्थ हुए मरीज, कम हुई कोरोना मरीजों की संख्या

कोरोना संक्रमितों की संख्या में अब कमी आ रही है लेकिन खतरा अब भी बना हुआ है। अब भी सतर्क रहने की जरुरत है, क्योंकि कोरोना महामारी के बाद अब ब्लैक फंगस (म्यूकर माइकोसिस) ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। खास तौर पर कोरोना के इलाज के बाद मरीजों में इस बीमारी के लक्षण दिख रहे हैं।

अब तक 7 से 8 मरीजों को इंदौर रैफर किया गया है। अब तक तीन से चार मामलों में मरीजों के ऑपरेशन कराने की जानकारी सामने आई है। ब्लैक फंगस आंखों, दांत, जबड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। इसलिए दांतों व जबड़े में दर्द, गाल व आंखों के आसपास सूजन और दर्द हो तो इसे हल्के में न लें। डॉक्टर को दिखाकर इलाज कराएं। यह ब्लैक फंगस हो सकता है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर से लोग जूझ रहे हैं। अस्पताल में बेड के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन व ऑक्सीजन की किल्लत से परेशानी का सामना कर रहे थे। वहीं अब ब्लैक फंगस ने परेशानी बढ़ा दी है। वहीं ब्लैक फंगस के इलाज के लिए दवाइयां व इंजेक्शन भी नहीं मिल रहे हैं। 7 से 8 मरीजों को इंदौर रैफर किया गया है।

मरीजों के परिजनों ने बताया इंदौर में ऑपरेशन हुआ लेकिन दवाई व इंजेक्शन की व्यवस्था के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ा। महाराष्ट्र व गुजरात में भी इंजेक्शन उपलब्ध नहीं हुए। हालांकि सूझबूझ व सतर्कता बरतकर इस बीमारी को भी हरा सकते हैं। अब तक 7 से 8 मरीज जांच कराने डॉक्टरों के पास पहुंचे हैं।

उन्हें दांत व जबड़ों में दर्द की शिकायत थी। इन सभी को कोरोना हुआ था। डॉ. चक्रेश पहाड़िया ने बताया कोरोना इलाज के बाद या शुगर पीड़ित इस दूसरी लहर में नई समस्या के साथ डॉक्टरों के पास आ रहे हैं। शुरू के दो से तीन दिन दर्द रहता है। गंभीरता से इसे न लेने पर 8 से 10 दिन में यह जानलेवा हो सकता है।

आंखों की राेशनी भी जा सकती है। उन्होंने बताया 13 साल में वर्ष 2019 से पहले ब्लैक फंगस के दो केस आए थे। अब दूसरी लहर में इस बीमारी के मरीज आ रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. अनीता सिंगारे ने बताया जिला अस्पताल से दो मरीज को इंदौर रैफर किया गया है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष सिंह ने इसकी जानकारी दी थी।
हल्के में न लें दांत, जबड़े व आंख में दर्द और सूजन, डॉक्टर को दिखाकर कराएं इलाज

इसलिए हो सकता है फंगस
डॉ. पहाड़िया ने बताया इम्यूनिटी कम होने या शुगर होने या मरीज को कोरोना इलाज के दौरान स्टीराॅयड दिया जाता है, जो जरूरी भी है। जीवन रक्षक दवा है। स्टीरॉयड को इम्यूनो सप्रसेंट कहा जाता है। इससे इम्यूनिटी कम होती है। इस कारण बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
सायनस में फंगस के कारण हुआ दाढ़ में दर्द
57 वर्षीय महिला के सायनस में फंगस थी। इस कारण उन्हें दाढ़ में दर्द व सूजन की शिकायत हुई। डेंटिस्ट को दिखाया गया। इसके बाद डॉक्टर ने उन्हें इंदौर रैफर किया। ऑपरेशन हुआ। अभी वे आईसीयू में भर्ती है। इसी तरह 53 वर्षीय पुरुष को कोरोना इलाज के बाद कान व गाल में दर्द होने पर डॉक्टर को दिखाया गया। प्राथमिक स्टेज पर ही बीमारी पकड़ में आ गई। ऑपरेशन के बाद सेहत में सुधार है।
इनमें से कोई भी लक्षण हो तो डॉक्टर को दिखाएं

  • चेहरे पर किसी भी प्रकार के दर्द का महसूस होना।
  • आंखों में दर्द और लाल होना।
  • कम दिखाई देना।
  • एक हिस्से में सिरदर्द।
  • चेहरे पर सुन्नपन होना।
  • सूंघने की क्षमता अचानक कम।
  • एक तरफ की नाक बंद होना।
  • तालु में सूजन, छाले होना।
  • कान के पास, दांत व जबड़े में दर्द होना।

डिस्चार्ज से पहले ईएनटी व डेंटिस्ट करें जांच
56 वर्षीय महिला कोरोना पॉजिटिव हो गई। इलाज के दौरान बिना दर्द के उनके दांत गिरने लगे। जबड़े में ढीलापन की आशंका में डेंटिस्ट डॉ. पहाड़िया को दिखाया। उन्होंने सिटी स्कैन करवाया। इसमें सायनस में फंगस होने पर इंदौर रैफर किया। इलाज के दौरान दवाइयां व इंजेक्शन के लिए परेशान होना पड़ा।

ब्लैक फंगस की दवाइयों व एम्फोटेरेसिन बी और लाइपोसोमल एम्फटेरेसिन बी इंजेक्शन के लिए परेशानी हुई। महाराष्ट्र व गुजरात में भी नहीं मिले। उन्होंने सुझाव दिया कि केयर सेंटर या अस्पताल से डिस्चार्ज करने से पहले मरीजों की ईएनटी व डेंटिस्ट से जांच कराई जाए, ताकि ब्लैक फंगस को प्राथमिक स्तर पर ही जांच कर इलाज कराया जा सके।

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