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नर्मदा में आस्था:संतों से प्रेरित होकर 8 साल में 5 बार की नर्मदा की परिक्रमा

बड़वानीएक महीने पहले
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  • मुस्लिम युवक ने मार्च 2012 में शुरू की थी पहली परिक्रमा, पिपलूद के नृसिंह मंदिर में कर रहे चातुर्मास

नर्मदा परिक्रमा पर आने वाले साधु-संतों और श्रद्धालुओं से प्रेरणा हासिल कर मुस्लिम समुदाय के एक युवक ने 8 साल में 5 बार मां नर्मदा की परिक्रमा की है। खरगोन जिले के नांद्रा गढ़ी निवासी नसीर पिता बाबू खान इन दिनों सरदार सरोवर बांध के बैक वाटर में डूब चुके ग्राम पिपलूद स्थित नृसिंह मंदिर में चातुर्मास कर रहे हैं। 7 मार्च 2012 को उन्होंने पहली नर्मदा परिक्रमा शुरू की थी, जो 3 साल 8 माह 18 दिन में पूरी की थी। इस साल 7 मार्च को छठी परिक्रमा शुरू की है। 14 मई को वे पिपलूद आए थे। चातुर्मास पूरा होने के बाद आगे की यात्रा शुरू करेंगे। 2007 में मथुरा में उन्होंने जय गुरुदेव से नामदान लिया था।

हिन्दू-मुस्लिम को लेकर कुछ लोग धार्मिक उन्माद फैलाते हैं। वहीं नसीर खान परिक्रमा कर लोगों को सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं। मुस्लिम होकर परिक्रमा करने के बाद भी किसी ने विरोध नहीं किया। उन्होंने कहा सभी धर्म समान हैं। लेकिन बली प्रथा न होने से जैन धर्म प्रिय है।

बदला मानस... वाहनों में रेत भरते थे नसीर, परिक्रमा में आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं को देख हुए प्रभावित

53 वर्षीय नसीर खान 1984-85 में ग्राम बेहगांव स्थित खदान पर ट्रक, ट्रैक्टर ट्राली व डंपर में रेत भरने का काम करते थे। इस दौरान परिक्रमा पर आने वाले साधु-संतों व श्रद्धालुओं से प्रभावित हुए। 7 मार्च 2012 को पहली परिक्रमा शुरू की। साथ ही संकल्प लिया कि जब तक जीवित रहेंगे नर्मदा की परिक्रमा करेंगे और जीवनभर जूते या चप्पल नहीं पहनेंगे।

बांधों के कारण 3600-4000 किमी हो गई यात्रा

नसीर ने बताया पहले नर्मदा की परिक्रमा 3200 किमी की थी। लेकिन बांधों के बनने से अब यह 3600 से 4000 किमी हो गई है। कई स्थानों पर नर्मदा से कुछ किमी दूर से यात्रा करना पड़ती है। क्योंकि बैकवाटर के कारण मूल परिक्रमा मार्ग खत्म हो गया है। परिक्रमा के दौरान उन्हें कई अनुभव हुए। रास्ता भटकने पर मां नर्मदा ही किसी को भेजकर सही रास्ते पर ले गई।

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