पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

अनिश्चितकालीन धरना शुरू, पुनर्वास की मांग:नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं व 20 गांवों के डूब प्रभावितों ने कारंजा चौक से निकाली रैली

बड़वानी7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
एनवीडीए कार्यालय के बाहर नारे लगाते नबआं कार्यकर्ता व डूब प्रभावित। - Dainik Bhaskar
एनवीडीए कार्यालय के बाहर नारे लगाते नबआं कार्यकर्ता व डूब प्रभावित।

वर्ष 2017 से पुनर्वास की राह देख रहे लोगों का सब्र टूट गया। मंगलवार को नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं व 20 गांवों के डूब प्रभावितों ने कारंजा चौक से रैली निकाली। रैली एनवीडीए पुनर्वास कार्यालय पर खत्म हुई। दोपहर 12.30 बजे से प्रभावितों ने कार्यकर्ताओं के साथ धरना आंदोलन शुरू किया, जो शाम 7 बजे तक चला। आंदोलन कार्यकर्ता पवन यादव ने बताया मांगों का निराकरण नहीं होने से अनिश्चितकालीन धरना देंगे। बुधवार से अनशन या भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

बारिश के दौरान लोग बाहर ही बैठे रहे। कुछ लोगों ने कार्यालय में जाने का प्रयास किया। कार्यकर्ताओं ने बताया अफसरों ने बारिश से बचने के लिए पुनर्वास कार्यालय में आसरा नहीं दिया। वर्ष 2017 में सरदार सरोवर बांध काे पूरा भरा गया था। इसके चलते नर्मदा का जलस्तर 138.68 मीटर तक पहुंचा था। जिसका नतीजा यह हुआ कि डूब से बाहर बताए कई गांवों में बैक वाटर पहुंचा था। पुनर्वास नहीं होने से डूब प्रभावित टीन शेड व पंचायत में रहने को मजबूर हैं।

400 लोगों का 14 जगह पुनर्वास, कहीं वो भी नहीं

धरना आंदोलन में ग्राम धनोरा, जांगरवा, अवल्दा, पिछोड़ी, कसरावद, राजघाट, आवली सेगांव सहित 20 गांव के डूब प्रभावित शामिल हुए। आंदोलन कार्यकर्ता पवन यादव ने बताया ग्राम पिछोड़ी के 400 लोगों को 14 स्थान पर पुनर्वास किया है। जामदा बसाहट में पुनर्वास के लिए जमीन अधिग्रहित की है। लेकिन अभी तक प्लाट नहीं दिए गए। बिजासन के लोगों को 2017 में अफसरों ने दल-बल के साथ हटाया था। अब तक इन लोगों को घर प्लाट नहीं मिला। क्योंकि बिजासन में पहाड़ी के नीचे जमीन समतल नहीं की गई है। न ही इंदौर पुनर्वास आयुक्त से मंजूरी मिली है।

गंगाराम पंचायत भवन में, धनसिंह डूब से ही बाहर

वहीं गांव के गंगाराम मुरार के परिवार को 6 दिन के बच्चे के साथ घर से बाहर निकाला था। अभी तक उसे पट्‌टा नहीं दिया है। इस कारण वह पंचायत भवन में रहने को मजबूर हैं। गेंदालाल धनसिंह अवल्दा सहित कई गांवों में 2017 में लोगों को डूब से बाहर बताया था। लेकिन 2017 में 138.68 मीटर जलस्तर पर मकान डूबे थे या घर तक पानी पहुंचा था।

खबरें और भी हैं...