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सुधर जरूरी:सिर्फ 23 यूनिट स्टॉक, मेंटेनेंस के लिए भवन खाली कराया, गलियारे में हो रहा रक्तदान

बड़वानीएक महीने पहले
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  • जिला अस्पताल के ब्लड बैंक के हालात खराब, नया भवन बना नहीं, पुराने के मेंटेनेंस में देरी

जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक की हालत खराब हो गई है। मेंटेनेंस के लिए ब्लड बैंक के भवन को खाली करा दिया। अब गलियारे में (आने-जाने वाले रास्ते में) रक्तदान कराया जा रहा है। वहीं ब्लड का स्टॉक भी बहुत कम है। ब्लड बैंक में मंगलवार केवल 23 यूनिट ब्लड था। जबकि रोजाना 40 से ज्यादा लोगों को ब्लड की जरूरत होती है। जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का निर्माण होना है। इसकी प्रक्रिया शुरू हुए 5 साल से ज्यादा हो चुका है। मशीनें आ चुकी हंै, जो धूल खा रही हैं। लेकिन काम शुरू नहीं हो सका। वहीं करीब 4 माह पहले पुराने भवन को मेंटेनेंस के लिए खाली कराया था। इसका भी काम बंद है। अब गलियारे में गर्मी के बीच मरीज के परिजन सहित अन्य लोग रक्तदान कर रहे हैं। कलेक्टर ने कुछ दिन पहले ब्लड बैंक का निरीक्षण किया था और निर्देशित किया था की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए। बावजूद व्यवस्थाओं में कोई सुधार नहीं किया । जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है नया भवन बनने के बाद ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट को शुरू किया जा सकेगा। यदि प्रयास किए होते तो ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट खुल जाती और लोगों को फायदा होने के साथ ब्लड बैंक में खून की कमी नहीं होती। ब्लड कंपोनेंट यूनिट के लिए करीब 4 साल पहले मशीनें आई थी। इनमें से कुछ ब्लड बैंक में रखी है और कुछ टीबी वार्ड में रखी है।

समस्या... तय गाइडलाइन के आधार पर संचालित नहीं हो रही ब्लड बैंक
जिला अस्पताल में संचालित होने वाली ब्लड बैंक तय मापदंडों के आधार पर नहीं चल रही है। जगह कम होने की वजह से पिछले कई सालों से ब्लड बैंक का लाइसेंस भी रिनूवल नहीं हुआ है। लेकिन इमरजेंसी सुविधा होने के कारण इसे बंद नहीं किया जा रहा है। ब्लड बैंक के संचालन के लिए कम से कम 7 कमरे की जरूरत होती है। यहां पर पैथोलॉजिस्ट तक नहीं है। जिसके बिना ब्लड बैंक का संचालन करना नियमों के अनुरूप है।

स्थिति... हर माह 500 से ज्यादा सिकलसेल के मरीज आ रहे सामने
जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में हर साल सिकलसेल के मरीज सामने आ रहे है। जिन्हें बिना डोनेशन के ब्लड दिया जाता है। अभी इन्हें सभी कंपोनेंट का ब्लड दिया जाता है। जबकि इन्हें केवल पीआरबीसी की जरूरत रहती है। लेकिन ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट शुरू नहीं होने के कारण सभी तत्वों युक्त ब्लड ही चढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा कैंसर, थैलेसीमिया के मरीजों को भी बिना डोनेशन के ब्लड दिया जाता है। यदि ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट तैयार हो जाए तो इस तरह के मरीजों को राहत होगी।

मयाद... जानें कितने दिन तक खराब नहीं होता
जानकारी अनुसार ब्लड की एक्सपायर डेट 35 दिन की है। लेकिन पीआरबीसी की 42 दिन होती है। प्लाजमा का उपयोग कभी भी किया जा सकता है। प्लेटलेट्स की अवधि 7 दिन रहती है। फिर खराब हो जाती है।

एक यूनिट इनके लिए

पीआरबीसी : एनीमिया व खून की कमी के रोगियों के लिए। प्लाजमा: बर्न व ब्लडिंग डिसऑर्डर के मरीजों के लिए।

प्लेटलेट्स : डेंगू, चिकनगुनिया आदि के मरीजों के लिए।

ये बोले जिम्मेदार

^ पुराने भवन का मेंटेनेंस कराया जा रहा है। काम करने वाले कर्मचारी संक्रमित हो गए थे। इसलिए काम बंद है। एक सप्ताह के भीतर पूरा काम कर दिया जाएगा। वहीं ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट के लिए भवन बनाया जाना है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। -जुगलकिशोर, इंजीनियर जिला अस्पताल बड़वानी। ^ ब्लड बैंक की व्यवस्थाएं सुधारी जाएगी। संबंधितों को निर्देशित कर मेंटेनेंस का काम जल्द पूरा कराया जाएगा। -डॉ. आरसी चोयल, सिविल सर्जन जिला अस्पताल बड़वानी।

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