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मृत्यु पर गम बांटिए..!:ब्राह्मण, यादव, पाटीदार, सिर्वी समाज समेत अन्य सहमत, बंद कराएंगे मृत्युभोज

बड़वानी10 महीने पहले
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  • सामाजिक बदलाव के लिए दैनिक भास्कर की समाज के साथ एक पहल

दैनिक भास्कर की सामाजिक बदलाव की मुहिम में ब्राह्मण, यादव,पाटीदार, सिर्वी, प्रजापत, नाई, जैन समाज सहित आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए हैं। समाज प्रमुखों ने मृत्युभोज को बंद कराने की सहमति दी है। समाज प्रमुखों का कहना है कि वह आने वाले समय में समाज में चल रहे मृत्युभोज काे बंद कराएंगे। वहीं जिले में कुछ समाज पहले से ही मृत्युभोज को बंद कर चुके हैं। दैनिक भास्कर की इस पहल को कई समाजों ने सराहा है। अलग-अलग समाजों के पदाधिकारियों ने वाट्सएप ग्रुप पर अपनी-अपनी सहमति मैसेज कर दर्ज कराई है। कुछ समाज प्रमुखों का कहना कि मृत्युभोज के कारण कई गरीब परिवार कर्ज तले दब जाते हैं, जिन्हें उस कर्ज को चुकाने के लिए या तो अपनी जमीन बेचनी पड़ती है या अपने गहने गिरवी रखने पड़ते हैं। जो समाज दैनिक भास्कर की इस पहल में शामिल हुए हैं, उन्होंने अन्य समाजों के लोगों से भी अपील की है कि मृत्युभोज जैसी इस कुप्रथा को बंद कराने के लिए आगे आएं।

कुम्हार समाज
इस कुप्रथा से कई लाेग बन गए कर्जदार

राजपुर के संतोष प्रजापत ने बताया मैं प्रजापत (कुम्हार) समाज से हूं और हमारे समाज में इस कुप्रथा का चलन बहुत अधिक है। इस कुप्रथा के कारण हमारे समाज के कई लोग कर्जदार हो गए। मैं स्वयं पहले आगे आकर इस कुप्रथा को बंद कराने के लिए समाजजनों को जागरूक करूंगा और अगर मेरे खुद के घर भगवान ना करे ऐसी होनी होती है तो सबसे पहले मैं इस प्रथा को खत्म करने की पहल करूंगा। मैं दैनिक भास्कर की पोस्ट और पहल को अपने समाज के वाट्सएप ग्रुप पर रोज भेज रहा हूं और समाज के लोगों को जागरूक कर इस कुप्रथा को बंद करवाने का प्रयास कर रहा हूं।

क्षत्रिय भावसार समाज
मृत्युभोज है सामाजिक अपराध, रोकना होगा

क्षत्रिय भावसार समाज के पूर्व प्रांतीय सचिव महेंद्र भावसार अंजड़ ने बताया कैसी परंपरा और कैसी रीति। रोते रोते बने भोजन को खाने वाले यह क्यों भूल जाते हैं कि परिवार पर विपदा आई है। मनोबल बढ़ाने में आगे आएं न कि बारहवें की पंगत का आनंद ले। मृत्युभोज सामाजिक अपराध है इसे रोकना ही होगा। भावसार समाज मिष्ठान या नमकीन भोज में नहीं बनाएगा। उन्होंने बताया 14 जून 2010 को मेरी माताजी लक्ष्मीदेवी भावसार का निधन हुआ। परिवारजनों ने संकल्प के साथ मृत्युभोज को न देकर उनकी स्मृति में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया और दवाएं नि:शुल्क बांटी।

मृत्युभोज बंद कराने की ये समाज दे चुके सहमति
यादव समाज अध्यक्ष राजाराम यादव, वाणी समाज अध्यक्ष खेमचंद वाणी निवाली, सर्व ब्राह्मण समाज के प्रदेश सहसचिव अनिल जोशी,प्रजापत समाज के संतोष प्रजापत राजपुर, बरानिया समाज के रघुनंदन बरानिया सेंधवा, सिर्वी समाज अध्यक्ष दिनेश चौधरी, जैन, नाई समाज सहित आदिवासी समाज के सदस्यों ने मृत्युभोज की इस कुप्रथा को अपनी-अपनी समाज में बंद कराने की सहमति दी है।

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