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आगरा जिले से लगे हाईवे पर रोका:किसान संगठनों के साथ दिल्ली जा रही पाटकर को यूपी पुलिस ने रोका, नबआं कार्यकर्ता नाराज

बड़वानी2 महीने पहले
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  • कार्यकर्ताओं ने बड़वानी में कृषि सुधार विधेयक की कॉपी जलाई

दिल्ली के रामलीला मैदान में गुरुवार से आयोजित होने वाले दो दिनी किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए जा रही नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख मेधा पाटकर के काफिले को यूपी की सैया थाना पुलिस ने रोक लिया। पार्वती नदी के पुल पर उन्हें रोका गया। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने वहीं चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। दूसरी ओर बड़वानी स्थित कारंजा चौक पर तीन कृषि विधेयकों की कॉपी जलाई गई। नबआं कार्यकर्ताओं ने बताया मेधा पाटकर निमाड़ के 200 से ज्यादा कार्यकर्ताओं के साथ राजस्थान होते हुए दिल्ली जा रही थी, जिन्हें बुधवार की रात राजस्थान-यूपी बार्डर पर ही पुलिस ने रोक लिया। इसके विरोध में मेधा पाटकर वहीं सड़क पर 12 घंटे के उपवास पर बैठी। गुरुवार सुबह मेधा पाटकर ने उपवास तोड़ा और कार्यकर्ताओं ने नेशनल हाईवे पर चक्काजाम कर दिया। वहीं शहर के कारंजा चौक पर नबआं कार्यकर्ताओं ने गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे तीनों कृषि विधेयकों की कॉपी जलाकर विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं की मांग है कि पाटकर को दिल्ली जाने दिया जाए। रामलीला मैदान पर गुरुवार को देश के 26 किसान संगठन के पदाधिकारियों का सम्मेलन होने वाला था लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली पहुंचने के पहले ही अलग-अलग राज्यों से आने वाले कार्यकर्ताओं को बीच में ही रोक लिया।

स्थानीय प्रशासन की मांग पर एक घंटे के लिए हटाया जाम

राजस्थान-यूपी बार्डर पर मौजूद कार्यकर्ता ने बताया गुरुवार सुबह से कार्यकर्ता चक्काजाम किए हुए थे। स्थानीय प्रशासन की मांग पर दोपहर में एक घंटे के लिए चक्काजाम हटाया था। इसके बाद दोबारा से कार्यकर्ता नेशनल हाईवे जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। देर रात तक चक्काजाम जारी रहा। इस दौरान नेशनल हाईवे से गुजरने वाले वाहनों की लाइन दोनों ओर तीन से चार किमी दूर तक लग गई। देर शाम तक नेशनल हाईवे से चक्काजाम खत्म नहीं किया गया था।

वो तीन कानून... जिनका विरोध जता रहे देश के 26 किसान संगठन
पहला कृषक उपज व्यापर व वाणिज्य संवर्धन व सरलीकरण अधिनियम 2020 के नाम से कृषि उपज मंडी समिति के खेती उपज खरीदी के अधिकार पर आंच लाकर निजी मंडियों को टैक्स से भी और उपज की खरीदी की भी छूट देता है। वह मंडियों का आधार कि सानों से छीन लेगा। दूसरा क़ानून कृषक सशक्तिकरण व संरक्षण कीमत आश्वाशन और कृषि सेवा पर करार अधिनियम 2020 का बड़ा नाम धारण किया है। प्रत्यक्ष में यह क़ानून बड़ी कंपनियों को अनेक दलालों के द्वारा व उत्पादक कंपनियों के द्वारा किसानों के साथ अनुबंधित खेती की स्वतंत्रता देता है। इससे कंपनियां अपनी पसंद के बीज, दवाईयां और खाद किसानों को बेचकर उन्हें उपज बिक्री के लिए बंधक बनाएगी। तीसरा कानूनए आवश्यक वस्तु संसोधन अधिनियम 2020 नाम से है जो अति आवश्यक वस्तुओं की अन्नसुरक्षा ही धोखे में लाने वाला क़ानून है। इससे 1955 से बने क़ानून में बदलाव लाकर दलहन, तिलहन,अनाज, प्याजए आलू आदि की जमाखोरी होगी। कुछ शर्तों के साथ दी गई छोटी बड़ी कंपनियां व पूंजीनिवेशकों बड़ी लूट की छूट साबित होगी।

और इधर
कार्यकर्ताओं ने बिजली कंपनी में की शिकायत

बड़वानी | नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ताओं ने कारंजा चौक पर प्रदर्शन करने के बाद रैली के रुप में बिजली कंपनी कार्यालय पहुंचे और अस्थाई पुनर्वास केंद्रों (टीनशेड) का बिजली कनेक्शन जोड़ने की मांग की। एनवीडीए ने बिजली बिल का भुगतान नहीं किया। इसके चलते पाटी नाका, सौंदूल और अंजड़ स्थित टीनशेड का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है। कार्यकर्ताओं ने बताया विविकं कार्यालय पहुंचकर कार्यपालन यंत्री डीएस राजपूत और एई पीसी पटेल से मिले। इनका कहना है कि बिजली बिल का भुगतान होने के बाद ही कनेक्शन जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कई बार एनवीडीए अधिकारियों से बिजली बिल भुगतान करने के लिए चर्चा कर चुके हैं। बावजूद भुगतान नहीं किया जा रहा है। तीनों स्थानों पर 14 अस्थाई बिजली कनेक्शन लगे हैं। इनका 16.12 लाख रुपए बकाया है। तीनों स्थानों पर बने टीनशेडों में डूब पीड़ित रह रहे हैं।​​​​​​​

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