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कलेक्टर से की भ्रष्टाचार की शिकायत:पाइप बिछाने, कनेक्शन देने का कार्य पूरा; हकीकत, नहीं मिले कनेक्शन

बड़वानी2 दिन पहले
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नगर परिषद कार्यालय में सीएमओ और शिकायतकर्ताओं से चर्चा करते पीएचई विभाग के एसडीओ। - Dainik Bhaskar
नगर परिषद कार्यालय में सीएमओ और शिकायतकर्ताओं से चर्चा करते पीएचई विभाग के एसडीओ।
  • 7 साल बाद भी लोगों को एक करोड़ 14 हजार रु. की नल-जल योजना का नहीं मिला लाभ
  • कागजों में काम दिखा रहे पूरा, 87 लाख रुपए निकलने के बाद भी काम अधूरा
  • सूचना के अधिकार में जानकारी निकालकर कलेक्टर से की भ्रष्टाचार की शिकायत

नगर में 7 साल पहले स्वीकृत हुई नल जल योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है। यहां पर पेजयल योजना के तहत कागजों पर काम पूरा बताकर नलों से पेयजल वितरण करना बताया जा रहा है जबकि धरातल पर नगर में कुछ क्षेत्र में पाइप लाइन बिछाकर उसे अधूरा छोड़ दिया गया। सात साल बाद इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर होने के बाद पीएचई विभाग के अफसर मंगलवार को इसकी जांच करने नगर परिषद पहुंचे। अफसरों ने धरातल पर जांच करने के बजाय वे कार्यालय में बैठकर जानकारी लेकर चले गए।

7 साल पहले 2014 में ग्राम पंचायत में नलजल योजना के तहत 1 करोड़ 14 हजार रुपए की लागत से पांच पानी की टंकी व पाइप लाइन बिछाकर लोगों को नल कनेक्शन दिए जाने थे। योजना के स्वीकृत होने के एक साल बाद अप्रैल 2015 में इसका कार्य शुरू कराया गया। ठेकेदार ने दो बड़ी टंकी के साथ 5-5 हजार लीटर क्षमता वाली टंकी का निर्माण कराया। वहीं नगर के कुछ हिस्सों में पाइप लाइन डालकर उसे छोड़ दिया गया। नगर के कई हिस्सों में पाइप लाइन नहीं बिछाई गई। वहीं किसी भी व्यक्ति को नल कनेक्शन नहीं मिले।

अधूरी योजना को लेकर कई बार लोगों ने शिकायतें की लेकिन जिम्मेदार अफसरों ने कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं कागजों में योजना पूरी बताकर नल कनेक्शन के पानी का वितरण करना भी बता दिया गया। पेयजल योजना में हुए भ्रष्टाचार को लेकर शिवसेना के जिला अध्यक्ष मंसाराम अलावा व आरटीआई कार्यकर्ता सुनील सोनी ने सूचना के अधिकार के तहत इसकी जानकारी निकाली तो ये चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। इसकोे लेकर दोनों ने कलेक्टर से शिकायत की। इसके बाद पीएचई विभाग के अफसरों ने मंगलवार को नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर अफसरों व शिकायतकर्ताओं से चर्चा की।

दो बड़ी टंकी और पांच छोटी टंकी से होना था नगर में पेयजल का वितरण
सात साल पहले ग्राम पंचायत में मंदिर चौक पर नल-जल योजना के तहत 1.40 लाख लीटर की टंकी बनवाई गई। वहीं दूसरी बड़ी टंकी भीमा कॉलोनी में दुर्गा मंदिर के पास बनाई गई। साथ ही पांच स्थानाें पर 5 हजार लीटर की 5 टंकियों का निर्माण भी पीएचई विभाग ने कराया। 4 ट्यूबवेल खनन करने के बाद पेयजल व्यवस्था को लेकर पाइप लाइन की लाइन बिछाने का काम कई क्षेत्र में अधूरा छोड़ दिया गया। पांच हजार लीटर क्षमता की पांच में से दो टंकियां टूट चुकी है। वहीं तीन टंकियों से पाइप लाइन नहीं जोड़ने से उनका उपयोग नहीं हो रहा है। वहीं नगर में किसी भी घर पर नल कनेक्शन नहीं दिए गए हैं।

याेजना में खाते से 87 लाख रुपए निकाले
नल जल योजना के तहत स्वीकृत एक करोड़ 14 हजार रुपए में सेे अब तक कार्य करने वाले ठेकेदार काे 87 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया है। जबकि 13 लाख 14 हजार रुपए पीएचई विभाग के खाते में जमा है। इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बाद भी लोगों को नल कनेक्शन नहीं मिले हैं। गर्मी के सीजन में लोगों को पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। बावजूद अफसरों ने इसकी अब तक जांच करना उचित नहीं समझा है।

16 बार पंचनामा बनाकर बताया नगर में पानी का वितरण किया जा रहा है
योजना के तहत भ्रष्टाचार किया गया कि पीएचई विभाग के साथ अन्य विभागों के अफसरों ने नगर में 16 बार जांच कर पंचनामा बनाकर पेयजल व्यवस्था को सुचारू चलना बता दिया। पंचनामे में पेयजल वितरण के लिए डाली गई पाइप लाइन को पूरा बताकर लोगों के घरों में पानी आना बताया गया।

जबकि हकीकत में नगर के किसी भी व्यक्ति काे सात साल में एक भी नल कनेक्शन नहीं मिला। अफसरों के जांच पंचनामे पर कई जनप्रतिनिधि व अफसरों ने हस्ताक्षर किए हुए हैं। इससे भ्रष्टाचार में सबकी मिली भगत होने की आशंका जताई जा रही है। अब जरूरत है इस पूरे कार्य की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की।

वरिष्ठ अफसरों से चर्चा कर करेंगे जांच

  • नल जल योजना के अधूरे कार्य की शिकायत मिलने के बाद नगर परिषद कार्यालय में सीएमओ से समस्या व जमीनी हकीकत को लेकर जानकारी ली गई। शिकायतकर्ता से मिलकर योजना में क्या धांधली की गई इसकी जानकारी ली है। अब वरिष्ठ अफसरों से चर्चा कर दो दिन बाद किए गए कार्य की जांच की जाएगी। ठेकेदार ने अगर काम अधूरा छोड़ा होगा तो उससे काम पूरा करवाया जाएगा। -आरके गुप्ता, एसडीओ, पीएचई विभाग, सेंधवा
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