कृषि उपज मंडी:4500 रु. तक कपास बिकने की उम्मीद थी, 4100 रु. में बिकी, किसानों में मायूसी

बड़वानीएक वर्ष पहले
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  • मंडी में 74 क्विं. कपास की आवक } गाड़ी खाली करने की मजदूरी देना पड़ेगी, इसलिए निरस्त नहीं की नीलामी

कृषि उपज मंडी में रविवार को कपास की आवक हुई। 5 वाहन व 7 बैलगाड़ी यानी करीब 74 क्विंटल कपास की आवक हुई। भाव 3805 से 5105 रुपए क्विंटल रहा। उपज के कम भाव मिलने से किसानों में मायूसी छा गई। किसानों ने बताया नीलामी निरस्त करने पर भी हमें नुकसान उठाना पड़ेगा। क्योंकि गाड़ी में कपास भरने के लिए 500 रुपए हम्माली देना पड़ी। अब खाली कराने पर भी रुपए देना पड़ेंगे। इसलिए मजबूरी में किसान उपज बेचकर लौट गए। बड़वानी निवासी किसान श्रीराम पूनमचंद धनगर व गोपाल लक्ष्मण निवासी भीलखेड़ा बसाहट 1-1 बैलगाड़ी में 6-6 क्विंटल कपास लेकर मंडी आए थे। श्रीराम ने बताया भाव 3965 रुपए क्विंटल मिला। जबकि इससे खराब क्वालिटी का कपास 4000 रुपए क्विंटल बिका है। उन्हें कपास का भाव 5 हजार रुपए तक मिलने की उम्मीद थी। इसी तरह गोपाल का कपास 4100 रुपए क्विंटल बिका। उन्हें भी 4500 रुपए तक भाव मिलने की उम्मीद थी। कम भाव से किसानों में नाराजगी है। अन्य किसानों ने बोली कम लगाने पर विरोध भी जताया। किसानों का आरोप है कि व्यापारी बोली कम भाव से शुरू कर रहे हैं। इस कारण किसानों को कम भाव मिल रहा है।

यहां 50 किलो से ज्यादा रही आवक
वैवाहिक सीजन के चलते किसान विवाह कार्यक्रमों में व्यस्त है। वहीं कपास की आवक भी कम हो गई है। इसके चलते रविवार को भवती रोड पर कपास की आवक 50 किलो से ज्यादा रही। व्यापारी नवीन जैन ने बताया क्वालिटी अनुसार कपास का भाव 4000 से 5100 रुपए क्विंटल रहा।

51000 क्विटलं से ज्यादा हुई आवक
कृषि उपज मंडी में कपास खरीदी का सीजन खत्म होने को है। आवक कम हो गई है। वहीं सीसीआई द्वारा अंजड़, सेंधवा व खेतिया में खरीदी की जा रही है। इस कारण बड़वानी व पाटी के किसान उपज लेकर अंजड़ व सेंधवा तक जा रहे हैं। मंडी में अभी तक 51000 क्विंटल से ज्यादा कपास की आवक हो चुकी है।

अगस्त में हुआ था खरीदी का मुहूर्त

मंडी में 31 अगस्त को कैबिनेट मंत्री प्रेमसिंह पटेल ने कपास खरीदी का मुहूर्त किया था। मुहूर्त सौदे में 8181 रु. क्विं. कपास बिका था। इसके बाद से भाव कम रहा। पिछले साल मंडी में 11 सितंबर से खरीदी शुरू हुई थी। सितंबर 2019 से मार्च 2020 तक 63329.95 क्विंटल कपास की आवक हुई थी।

शासन ने डेढ़ रु. से घटाकर 50 पैसे प्रति सैकड़ा किया मंडी शुल्क, 33% रह जाएगी आय
बड़वानी | व्यापारियों की मांग पर सरकार ने मंडी शुल्क डेढ़ रुपए प्रति सैकड़ा से घटाकर 50 पैसे प्रति सैकड़ा कर दिया है। इससे मंडी की आय कम होगी। वहीं कर्मचारियों को वेतन भुगतान में भी परेशानी होगी। मंडी में आवक कम होने से पहले ही आय कम हो चुकी है। इसके चलते कर्मचारियों अभी तक नवंबर माह का वेतन नहीं मिला है। रविवार को करीब 74 क्विंटल कपास की आवक हुई। जानकारी अनुसार इससे मंडी प्रबंधन को ढाई से तीन हजार रुपए आय होगी। कर्मारियों के अनुसार पिछले महीने 12850रुपए मंडी की आय हुई थी। जबकि 15 कर्मचारियों को वेतन देने के लिए मंडी प्रबंधन को 5.12 लाख रुपए चाहिए। कपास की आवक कम हाे चुकी है। एक पखवाड़े में सौंफ की आवक शुरू होने के आसार है। 50 पैसे प्रति सैकड़ा मंडी शुल्क करने से आय में और कमी होगी। ऐसी स्थिति में मंडी प्रबंधन को वेतन व अन्य खर्च के लिए राशि जुटाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं कर्मचारियों ने नियमितिकरण, वेतन व पेंशन निर्धारण के लिए सरकार से मांग की थी, जो अब तक अधूरी है। इसके लिए सितंबर महीने में कर्मचारियों ने धरना आंदोलन व हड़ताल भी की थी। लेकिन अभी तक मांगों का कोई निराकरण नहीं हुआ है।

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