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सरदार सरोवर बांध:संकट मोचन ही संकट में, मुंह तक पहुंचा पानी डूब पीड़ित बोले- अब इससे बुरी दशा क्या होगी

बड़वानी12 दिन पहले
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  • नर्मदा किनारे बसे चिखल्दा में बने मंदिरों तक पहुंचा बैकवाटर, पूजन तक करने नहीं जा पा रहे लोग

सरदार सरोवर बांध डूब क्षेत्र में आने वाले मंदिर पहले अगरबत्ती की सुगंध से महकते थे और रोज सुबह-शाम आरती की गूंज से लोग आनंदित हो उठते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। खुद संकट मोचन ही संकट में आ गए हैं। हम बात कर रहे हैं नर्मदा पार चिखल्दा गांव की। यहां पूरा गांव जलमग्न है। मंदिरों में पानी घुस गया है। यहां बना हनुमान मंदिर आधा पानी में समा गया है और हनुमानजी के मुंह तक पानी आ गया है। वहीं महादेव अभी सुरक्षित है। इनके गर्भगृह तक ही पानी पहुंचा है। इस मंजर को देखकर डूब पीड़ितों का कहना है कि अब इससे बुरी दशा क्या होगी। फिर भी कोई सुनवाई नहीं। चिखल्दा के राजेंद्रकुमार पांडेय बताते है कि गांव में पानी आने के बाद से गांव के लोग तो जान बचाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए। लेकिन भगवान अब भी वहीं फंसे हुए है। अब तो इनका पूजन करने तक नहीं जा पाते। क्योंकि यहां पर मौजूद पुलिस जवान मंदिरों तक किसी को जाने ही नहीं देते। रात में कभी-कभी चोरी-छिपे कोई भगवान को भोग लगा आता है। ये भी कभी-कभी ही हो पाता है। चिखल्दा गांव के बस स्टैंड पर स्थित गांधी प्रतिमा के आसपास भी दो मीटर से ज्यादा पानी जमा है। यहां अक्सर सुबह के समय लोग जलस्तर देखने के लिए पहुंचते है। वहीं चिखल्दा के पास खेड़े पर बसे लोगों के घरों तक पानी आ गया है। गांव के जिस भी व्यक्ति से बात करों तो वह सरकार को ही कोसता हुआ नजर आता है।

चारों तरफ पानी, फिर भी अनशन खत्म नहीं कर रहे डूब प्रभावित

सरदार सरोवर बांध का जलस्तर 138 मीटर पहुंच गया है। इसके साथ ही निमाड़ क्षेत्र के कई गांव जलमग्न हो गए। अगर पानी इसी गति से बढ़ता रहा तो कई गांव और जलमग्न हो जाएंगे। क्रमिक अनशन कर रहे लोगों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के पुनर्वास आयुक्त ने डूब प्रभावितों के सामने बात रही और बताया की 15 दिन में चल रही प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। बुधवार को पिछोड़ी में 19 दिन से जारी क्रमिक अनशन स्थल के चारों और पानी पहुंच गया है। फिर भी डूब प्रभावित नहीं हटे और बल्लियों की छत बनाकर उस पर बैठकर प्रदर्शन किया।

राजघाट पर दत्त भगवान जल समाधि में
राजघाट पर बने दत्त मंदिर के शिखर तक पानी पहुंच गया है और भगवान दत्त पानी में समाधि ले चुके हैं। मंदिर के पुजारी सचिन शुक्ला ने बताया जब तक गर्भगृह में पानी नहीं पहुंचा था। तब तक पूजन किया। जलस्तर बढ़ने के बाद से अब घर पर ही दत्त भगवानी के चित्र का पूजन करते हैं। इनकी मांग है कि दत्त मंदिर को नर्मदा किनारे ही विस्थापित किया जाए।
डूब क्षेत्र में 345 मंदिर हैं, 200 मंदिरों में अब भी स्थापित हैं भगवान
नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ताओं के अनुसार बड़वानी जिले में सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में 345 मंदिर थे। इनमें से कुछ तो विस्थापित हो गए। लेकिन अब भी 200 मंदिर मूल गांवों में ही है। इन सभी में भगवान भी विराजमान है। कुछ पूरे डूब चुके है। कुछ के गर्भगृह तक पानी पहुंचा है। कुछ अभी सुरक्षित है।
138 मीटर पर पहुंचा नर्मदा का जलस्तर
राजघाट पर नर्मदा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को दोपहर12 बजे 138.100 मीटर पर जलस्तर पहंुचा। जो मंगलवार को137.700 मीटर था। लगातार बढ़ते जलस्तर ने डूब ग्रामों में रह रहे लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकांश डूब क्षेत्र के गांव टापू बन चुके। फिर भी यहां अब भी लोग रह रहे है। वहीं बढ़ते जलस्तर के विरोध में नर्मदा बचाओ आंदोलन कार्यकर्ता सहित डूब पीड़ित क्रमिक अनशन कर रहे है।

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