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  • Officers Carelessly Suppressed Thousands Of Tons Of Rejected Coal, Not Even Once Tender; Committee Formed Now After Seven Years

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सिंगाजी परियोजना:अफसरों ने लापरवाही से दबा दिया हजारों टन रिजेक्टेड कोयला, एक बार भी नहीं निकाला टेंडर; सात साल बाद अब बनाई कमेटी

बीड़10 महीने पहले
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संत सिंगाजी ताप परियोजना में बिजली उत्पादन को करीब सात साल हो चुके हैं। करोड़ों टन कोयला जलाया जा चुका है। बिजली उत्पादन के दौरान रिजेक्ट कोयला भी निकलता है। अन्य ताप परियोजनाएं हर साल रिजेक्टेड कोयला (मिल िरजेक्ट) टेंडर निकालकर बेचती हैं, लेकिन सिंगाजी परियोजना में अफसरों की लापरवाही से सात साल में हजारों टन कोयला फेंक दिया गया या जमीन में दबा दिया गया। इससे कंपनी और सरकार को लाखों रुपए का नुकसान हुआ है। मामला उठने पर अब ईडी ने मिल रिजेक्ट बेचने के लिए अफसरों की एक कमेटी बनाई है। जल्द ही टेंडर निकालने की तैयारी है।

संत सिंगाजी ताप परियोजना में 2013 में बिजली उत्पादन शुरू किया गया था। 2020 तक परियोजना की जिम्मेदारी पांच ईडी संभाल चुके हैं, लेकिन एक ने भी मिल रिजेक्ट के लिए टेंडर निकालना उचित नहीं समझा। जबकि सारणी, बिरसिंहपुर, चचाई जैसी ताप परियोजनाओं में हर साल मिल रिजेक्ट बेचने के लिए टेंडर निकालकर लाखों रुपए की कमाई की जाती है। सिंगाजी परियोजना में लापरवाह अफसरों ने सात साल में हजारों टन कोयला जमीन में दबा दिया या कीचड़ में डालकर नष्ट कर दिया। एमपीपीजीसीएल मुख्यालय के जिम्मेदार अफसरों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

बारिश में निकलता है जहरीला पानी

परियोजना में यहां-वहां पड़ा मिल रिजेक्ट बारिश में गीला हो जाता है। तेज बारिश में इससे जो पानी निकलता है वह पीला हो जाता है। इसमें सल्फर, कार्बन डाईआक्साइड होती है। यह जहरीला पानी नदी-नालों में मिलकर मछलियों की जान लेता है। कुछ महीनों में ऐसा दो-तीन बार हो चुका है।

सात साल में पहली बार बनी कमेटी

कुछ माह पहले ही परियोजना की कमान संभालने वाले ईडी वीके कैलासिया की नजर मिल रिजेक्ट पर पड़ी। उन्होंने अन्य परियोजनाओं से जानकारी ली तो इसे बेचने की बात सामने आई। उन्होंने सिंगाजी परियोजना के मिल रिजेक्ट को बेचने के लिए अफसरों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी परियोजना में कितने टन मिल रिजेक्ट पड़ा है, इसका अनुमान लगाकर टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद तैयारी चल रही है
हमने मिल रिजेक्ट का मापदंड तय करने के लिए अफसरों की कमेटी बना दी है। टेंडर निकालने की तैयारी भी चल रही है। कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद टेंडर निकाले जाएंगे।- वीके कैलासिया, ईडी, सिंगाजी ताप परियोजना

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