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पोला पर्व:हनुमानजी की परिक्रमा कर फसल के अच्छे उत्पादन की कामना की, सफेद रंग के बैल ने तोड़ा तोरण, लोगों ने पूजन-अर्चन कर खिलाए मिष्ठान्न

खरगोन11 दिन पहले
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बैलों को सजाकर गलियों में घुमाया। - Dainik Bhaskar
बैलों को सजाकर गलियों में घुमाया।

भादौ अमावस्या पर कुनबी पाटिल समाज व किसान परिवारों ने पोला पर्व मनाया। शाम 6 बजे कुनबी पाटिल धर्मशाला से कुछ दूरी पर बंधे कच्चे सूत के तोरण को तोड़ने की परंपरा निभाई गई। मान्यता है कि जिस रंग का बैल तोरण तोड़ता है उस साल उसी रंग की फसलों का उत्पादन अधिक होता है।

इस बार बद्दू सिंधिया के सफेद बैल ने पोला तोरण तोड़ा। कुनबी पाटिल समाज प्रमुख बद्री पटेल सहित अन्य समाजजनों ने तोरण तोड़ने की रस्म के बाद बैलों का पूजन कर मीठी पुड़ी व गुड़ खिलाया। खेड़ापति हनुमानजी मंदिर में बैलों को ले जाकर परिक्रमा करवाई।

गोवंश की रक्षा के साथ अच्छे फसल उत्पादन की कामना की। इससे पहले गोवंश को फूल, झूल, गुब्बारे, घुंघरू आदि से सजाया गया। शाम करीब 4 बजे शृंगारित बैलजोड़ी को ढोल-तासे के साथ झूमते हुए गांव की गलियों में घुमाया गया। डीएसपी राकेश आर्य सहित पुलिस बल ने व्यवस्था संभाली।

बरसात ने फीका किया व्यवसाय - सोमवार को पोला पर्व के साथ ही साप्ताहिक हाट था। दोपहर में दो बार हुई एक घंटे की तेज बारिश के कारण आसपास के लोगों की ग्राहकी कम रही। परचून व्यवसायियों ने बताया ग्राहकी का अभाव रहने से निराशा हुई। जबकि पोला व हॉट होने से कपड़ा, किराणा, खाद्य सामग्री आदि की अच्छी बिक्री की उम्मीद थी।

और इधर... हनुमान मंदिर परिसर में तोड़ा तोरण
और इधर... हनुमान मंदिर परिसर में तोड़ा तोरण

भादौ अमावस्या पर ग्राम बड़ा टांडा दसनावल में किसानों ने पोला पर्व उत्साह से मनाया। सुबह हनुमानजी का जलाभिषेक किया गया। बैलों को स्नान के बाद नई नाथ मछौंडी, फूलमाला, गुब्बारे आदि से सजाया गया।

हनुमान मंदिर में आम के पत्तों का तोरण बांधा गया। शाम को ढोल-तासों के साथ बैलों को दौड़ाते हुए तोरण तोड़ने की रस्म निभाई गई। गोवंश का पूजन कर मिष्ठान्न खिलाए। कुछ घरों में रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया गया।

मराठा समाज : बैलों को आकर्षक रूप से सजाकर ग्राम में घूमाया
मराठा समाज : बैलों को आकर्षक रूप से सजाकर ग्राम में घूमाया

सोमवार को पोला अमावस पर मराठा समाज के लोगों ने बैलों को आकर्षक रुप से सजाकर मंदिर के सामने पूजन कर नैवेध खिलाकर पोला पर्व मनाया। ग्राम वणी के मराठा समाज के बंटी राव व बल्लू राव ने बताया भादौ मास की पोला अमावस पर मराठा समाज ने सोमवार को बैलों को सुबह से नहलाकर उन्हें सजाया गया।

यह पर्व परंपरागत तरीके से मनाया जाता है। शाम को मंदिर के सामने ले जाकर पूजन कर नैवेध व पकवान खिलाए। समाज के लोगों ने सजे हुए बैलों को ढोल के साथ ग्राम में भ्रमण कराया। पोला पर्व का यह पर्व जीवन में गाय व बैलों के महत्व को बताने के लिए मनाया जाता है।

किसान वर्ग इसे उत्सव की तरह मनाते हैं। हल चलाने वाले बैल जोड़ी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। उसे सजाकर मंदिरों में ले जाया जाता है। घर में बनने वाले पकवान खिलाए जाते हैं।

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