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कट रहे जंगल, बढ़ रहा जंगलीपन:देश के सबसे बड़े वन क्षेत्र वाले मप्र में वनाधिकार के 88 फीसदी दावे खारिज, पेड़ काटकर जंगल पर कब्जा कर रहे अतिक्रमणकारी

बुरहानपुर11 दिन पहले
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  • प्रदेश में जंगल कटाई रोकने के दौरान लगातार घायल हो रहे वन विभाग के कर्मचारी व अफसर

देश के सबसे बड़े वन क्षेत्र वाले मप्र में जंगल खतरे में हैं। वनाधिकार अधिनियम के तहत मिलने वाले भू अधिकार पत्र (पट्‌टे) के लिए अतिक्रमणकारी लगातार पेड़ों की कटाई कर वन भूमि पर कब्जा कर रहे हैं। विरोध करने पर वनकर्मियों पर हमले, हवाई फायर, पथराव जैसी घटनाएं भी बढ़ी हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ पत्र व्यवहार हो रहा है लेकिन कब्जाधारियों की बेदखली इसलिए नहीं हो रही क्योंकि अभी प्रदेश की 27
सीटों पर उपचुनाव है।
वर्ष 2019 में फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया ने प्रदेश में दो साल में 68.49 प्रतिशत वर्ग किमी में जंगल बढ़ने की घोषणा की थी लेकिन इस साल तस्वीर बिल्कुल अलग है। प्रदेश में इस साल वन अधिकार पत्रों के लिए कुल 1 लाख 65 हजार 139 दावे किए गए हैं। इनमें से 20 हजार 41 दावों को जायज माना गया है। यानी 88 प्रतिशत दावे खारिज कर दिए गए। सबसे कम करीब 4 प्रतिशत दावे चंबल संभाग में सही पाए गए हैं। बड़े पैमाने पर दावों के अमान्य होने कारण जंगल की कटाई करके अवैध अतिक्रमण करना, एक से ज्यादा जिलों में जाकर दावा करना, गलत दस्तावेज देने जैसे कारण सामने आए हैं।
जिन समितियों ने दावों की जांच की उनकी भूमिका भी संदिग्ध
मप्र में 94 हजार 689 वर्ग किमी में जंगल है। वन अधिकार पत्र हासिल करने के लिए ग्राम समिति अनुमोदन करती है, फिर तहसील स्तर की समिति और अंत में जिला स्तरीय समिति। ग्राम समितियों ने भी बिना दस्तावेज जांचे और भौतिक सत्यापन किए दावे मान्य किए हैं। उनकी भूमिका भी संदिग्ध है।

पांच मामलों से समझिए क्या हैं इन दिनों जंगल के हाल

पेड़ की तरह काट डालने की धमकी

7 सितंबर को वनमंत्री विजय शाह के गृह जिले खंडवा के गुड़ी वनक्षेत्र के ताल्याधड़ जंगल में अतिक्रमणकारियों ने वनकर्मियों और ग्रामीणों पर हमला कर दिया।धमकी दी कि पेड़ की तरह काट डालेंगे।

गुना: पेड़ों की कटाई देखते रहे अफसर

12 जुलाई को गुना जिले के मूंदोल में वन विभाग के अफसरों के सामने ही बड़ी तादाद में अतिक्रमणकारियों ने जंगल में पेड़ काटे। उन्हें रोका नहीं गया। अफसरों का कहना था- हमारे पास अमला नहीं है। बुरहानपुर: वनकर्मियों पर हथियारों से हमला 7 अगस्त को बुरहानपुर जिले के घाघरला में 200 से ज्यादा लोग जंगल कटाई में लगे थे। वन विभाग का अमला ग्रामीणों के साथ रोकने पहुंचा तो हथियार से हमला कर दिया। करीब 100 लोग घायल हुए।

बुरहानपुर: रास्ते बंद कर दी खुली चुनौती

7 सितंबर को नेपानगर आए वनमंत्री विजय शाह वनों की कटाई करने वालों को नहीं बख्शने का दावा कर गए। इसके दूसरे दिन अतिक्रमणकारियों ने पेड़ काटकर और पत्थर डालकर घाघरला के जंगल में खुली चुनौती दी।

खरगोन: पट्‌टे की जमीन पर गांजे के पौधे

28 अगस्त को खरगोन जिले के वड़िया झिरी फलिया में दो चचेरे भाई पकड़े गए। उन्होंने पट्टे की जमीन पर 29 लाख के गांजे के पौधे लगाए थे। पुलिस पूछताछ में आदिवासियों को लालच देकर खेती की बात सामने आई।

अतिक्रमणकारियों की अपनी हदबंदी, खूंटे ठोंक बांटी जमीन

अरविंद पटेल | बुरहानपुर बुरहानपुर जिला मुख्यालय से 57 किमी दूर घाघरला का जंगल। नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में आता है। सीएम चुनाव प्रचार के लिए यहां आएंगे। यहां प्रशासन और वन विभाग की नहीं अतिक्रमणकारियों की अपनी हदबंदी है। जंगल में बड़े पैमाने पर पेड़ों को काटकर और खूंटे गाड़कर जमीन बांट रखी है, कि यह जमीन तेरी, यह मेरी। एक-एक अतिक्रमणकारी द्वारा कब्जा की गई जमीन 100-200 फीट नहीं, बल्कि पांच से सात एकड़ तक है। दो महीने में वन अमले और ग्रामीणों पर तीन बार हो चुके हमले का खौफ इस कदर है कि मजदूर और किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं। दूर कहीं कुल्हाड़ी चलने की आवाज सुनते ही लोग सहम जाते हैं। अकेले खेत जाना तो किसी के भी बस की बात नहीं रही। जंगल से लगे घाघरला, नावरा, गोराडि़या, मझगांव और अमुल्ला सहित अन्य गांव हैं। इन गांवों के जंगल में कहीं एक तो कहीं दो कम्पार्टमेंट हैं। एक कम्पार्टमेंट में करीब1200 हेक्टेयर जमीन है। लेकिन अब यहां कुल्हाड़ी चल रही है। गांव से एक किमी दूर जंगल से लगे खेत में मौजूद रमाकांत पाटील और रघुनंदन पाटील ने बताया मजदूर खेत तक आने से डर रहे थे। ट्रैक्टर-ट्रॉली में बैठाकर लाए हैं। पांच से सात लोगों को एक साथ खेत आना पड़ रहा है। यहां काम करते हुए भी आंखें और कान जंगल से आ रही छोटी से छोटी आहट पर चौकन्ने हो जाते हैं। हम यहां खतरे के बीच रह रहे हैं।

पेड़ों की कटाई की शिकायतें मिल रही हैं, सख्ती से निपट रहा विभाग
^श्योपुर, बुरहानपुर, शिवपुरी, सीहोर आदि जिलों से पट्‌टों के लिए जंगल के पेड़ काटने की शिकायतें मिली हैं। विभाग सख्ती से अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। वनकर्मियों की सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से चर्चा हुई है। संबंधित जिलों के कलेक्टर-एसपी से बात कर संयुक्त टीम बनाई है। यह भी तय कर रहे हैं कि एकदम से हमला हो जाए तो वनकर्मियों के पास अश्रु गैस के गोले व पर्याप्त सुरक्षा संसाधन रहे। ऐसी योजना है। अभी फाइनल नहीं हुआ है पर तैयारी चल रही है। प्रदेश में 95 हजार किलोमीटर का वन क्षेत्र हैं, इनमें से 34 हजार वन क्षेत्र में बिगड़े वन क्षेत्र हैं। वन समितियों को मजबूत कर रहे हैं ताकि जंगल को बचाया जा सके। जो लोग पेड़ों की कटाई कर पट्‌टे मिलने के नाम पर जो लोग उकसा रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे। दिसंबर 2005 के पहले दावे स्वीकृत हो गए जबकि इसके बाद के दावे अपने आप अमान्य हो गए होंगे। जो वास्तविक हकदार है, उसे तो पट्‌टे मिलेंगे ही। -विजय शाह, वन मंत्री,मप्र शासन​​​​​​​

प्रोटेक्शन के लिए खंडवा से आया अमला, इनके पास डंडे तक नहीं
जंगल में स्थानीय अमले के प्रोटेक्शन के लिए वन मंडल (उत्पाद)खंडवा के अमले को यहां तैनात किया गया है। लेकिन बंदूक तो छोडि़ए इनके पास डंडे तक नहीं हैं। इस अमले को पिछले एक महीने से नीमसेठी चौकी पर तैनात किया गया है। इनमें वनरक्षक नंदकुमार अग्निहोत्री, वनरक्षक दिग्विजयसिंह मेहता, वनरक्षक सुंदरलाल सावले आदि शामिल हैं।​​​​​​​

अतिक्रमणकारियों ने कटे पेड़ और झाड़ियां डालकर बना रखी मेढ़
नवाड़ निकालकर खेती करने के लिए अतिक्रमणकारी जंगल पर कब्जा कर रहे हैं। यहां खूंटे गाड़ने के साथ ही उन्होंने कटे पेड़ और झाडि़यां डालकर बांटी गई अपनी-अपनी जमीन की मेढ़ बना रखी है। मेढ़ के आसपास नजर आ रहे हैं तो सिर्फ कटे हुए पेड़ों के ठूंठ। किसान हेलमेट लगाकर आवाजाही कर रहे हैं। यहां तक कि खेत में काम के दौरान भी हेलमेट नहीं उतार रहे हैं।​​​​​​​

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