पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बिना पानी वाले नल:प्रशासन का दावा- घर-घर नल लगाने में अव्वल हम फायदा नहीं...भूजल में प्रदेश में सबसे फिसड्डी जिला

बुरहानपुर/नेपानगर7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • जल जीवन मिशन में काम तेज, भूजल पुनर्भरण का काम सुस्त, भूजल पर ही निर्भरता जिले की

जिले में 2 दशक पहले 200 फीट पर मिलने वाला पानी अब 500 से 800 फीट पर भी मुश्किल से मिल रहा है। क्योंकि पानी का दोहन बड़े पैमाने पर हो रहा है, लेकिन भूमिगत जलस्तर बनाए रखने के कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। ताप्ती नदी किनारे 100 फीट पर मिलने वाले पानी के लिए अब 500 फीट तक खनन करना पड़ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि भूमिगत जल पुनर्भरण में बुरहानपुर जिला प्रदेश में सबसे पीछे है।

वहीं प्रशासन जल जीवन मिशन में गांवों तक पाइपलाइन बिछाने और घरों तक नल कनेक्शन पहुंचाने में प्रदेश में सबसे अव्वल होने का दावा कर रहा है। जबकि जमीनी हकीकत इससे कहीं उलट है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि घरों तक नल तो पहुंचा देंगे, लेकिन गिरते जलस्तर के बीच पानी कहां से लाएंगे।

जिले में सिर्फ 0.27 बीसीएम (अरब घनमीटर) पानी का ही रिचार्ज हो रहा है। इसमें 0.24 बीसीएम पानी बारिश का होता है। ऐसे में हालात यह हैं कि बुरहानपुर के प्रगति नगर, सिंधीबस्ती और इंदिरा कॉलोनी में 700 से 800 फीट गहराई तक ट्यूबवेल खनन करने पर भी पानी नहीं मिल रहा है। इंदिरा कॉलोनी में फिलहाल पानी का सबसे ज्यादा संकट है। यहां जल प्रदाय के लिए हर दिन 12 हजार लीटर के 12 से 15 टैंकर से संपवेल भरा जा रहा है। 1.80 लाख लीटर पानी सम्पवेल में भरने के बाद इसे टंकी में चढ़ाकर करीब पांच हजार की आबादी को आपूर्ति की जा रही है। रूईकर वार्ड और लालबाग के कुछ हिस्सों में पानी सप्लाय के लिए पातोंडा रोड के सम्पवेल काे भी टैंकरों से पानी लाकर भरा जा रहा है। शहर के 10 से ज्यादा वार्ड ऐसे हैं जहां जलस्तर 700 फीट से भी नीचे गिर चुका है।

3 जगह की जमीनी हकीकत... दर्जनों गांवों में पाइपलाइन बिछाई, लेकिन टेस्टिंग नहीं कर पाया विभाग

  • सारोला में करीब 25 दिन पहले पाइप लाइन के लिए सड़क खोदी गई। लेकिन इसे दुरूस्त नहीं किया। घरों तक पाइप लाइन बिछाने के बाद भी कनेक्शन नहीं दिए। टंकी का काम भी अधूरा है।
  • सीवल में 2 ट्यूबवेल खनन कराए, लेकिन पाइपलाइन की टेस्टिंग नहीं हुई। मोटर नहीं लगाई, नालियां खोद अधूरी छोड़ दी।
  • बड़ीखेड़ा पंचायत के पांचइमली में 1 ट्यूबवेल खनन किया, इसे आज तक चालू नहीं किया। टंकी व संपवेल का काम अधूरा होने के कारण घरों तक नल कनेक्शन नहीं दिए।

214 गांवों में घर-घर तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य, लेकिन पूरा होना मुश्किल, कई गांवों में काम अधूरे

जिले में 2 साल से जल-जीवन मिशन के तहत 214 गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए टंकी और पाइपलाइन बिछाई जा रही है। लेकिन यहां पेयजल के लिए भूमिगत स्रोतों पर ही निर्भरता है। गांवों में ट्यूबवेल और कुओं से पानी प्रदाय करने की योजना है। 156 गांवों में पहले से कुएं और ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति हो रही है।

58 गांवों में ट्यूबवेल कराए गए हैं। लेकिन जलस्तर गिरने के कारण धुलकोट क्षेत्र के दवाटिया, सराय, रोहिणी, खकनार सहित 10 से ज्यादा गांवों में परेशानी हो रही है। दर्जनों गांवों में पाइप लाइन बिछाने के बाद भी पीएचई विभाग इसकी टेस्टिंग नहीं कर पाया है। 65 गांवों अब तक टंकियों का निर्माण नहीं हुआ है, वहीं 72 संपवेल अधूरे पड़े हैं। कहीं मोटर तो कहीं बिजली कनेक्शन नहीं लग पाया है। इन सबके बीच अफसर 31 जुलाई तक काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं।

31 जुलाई तक संपवेल का काम पूरा कराएंगे

31 जुलाई तक संपवेल का काम पूरा कराएंगे। टंकियों में समय लगेगा। जहां काम पूरा हो चुका है, वहां मुहिम चलाकर पानी चालू किया जा रहा है। पाइपलाइन, बिजली, पंप, ट्यूबवेल का अधिकांश काम हो गया है। हमने प्रस्तावित से ज्यादा काम कराया है। कलेक्टर द्वारा ठेकेदारों को नोटिस जारी कराए हैं। आपदा प्रबंधन के तहत भी नोटिस जारी कराए हैं।
-प्रतापसिंह बुंदेला, कार्यपालन यंत्री पीएचई विभाग

जलस्रोतों के पास बनाएंगे वाटर रिचार्ज के स्रोत

कुछ पंचायतें ऐसी जहां 12 माह पानी रहता है। बाकी गांवों में योजना के तहत बनाए जलस्रोतों के पास तालाब, चैक डैम सहित वाटर रिचार्ज के अन्य स्रोत बनाएंगे, ताकि भूमिगत जलस्तर बना रहे। प्रयास करेंगे हर गांव में ऐसी जल संरचनाएं बनाएं। इसके लिए जिपं के साथ मिलकर काम करेंगे।
- प्रवीण सिंह, कलेक्टर

खबरें और भी हैं...