कोचिंग जाने का कहकर राजघाट पहुंचे छात्र:डूबने से दोनों की मौत, स्थानीय गोताखोरों ने एक का शव डेढ़ घंटे, दूसरे का सवा दो घंटे बाद निकाला

बुरहानपुर2 महीने पहले
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गोताखोरों द्वारा पहले कृष्णपाल का शव निकाला गया। - Dainik Bhaskar
गोताखोरों द्वारा पहले कृष्णपाल का शव निकाला गया।

राजघाट पर शनिवार सुबह ताप्ती नदी में डूबने से दो युवकों की मौत हो गई। दोनों कक्षा 12वीं के छात्र थे और घर पर कोचिंग जाने का बोलकर निकले थे लेकिन राजघाट पहुंच गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि दोनों काफी देर तक घाट पर बैठे रहे। इसके बाद नौगजी के नीचे बड़े पत्थर के पास दोनों ने कपड़े उतारे और नदी में छलांग लगा दी।

यहां गहराई अधिक होने के कारण दोनों डूबने लगे। वहां मौजूद लोगों ने उन्हें डूबते देखा लेकिन वे मदद को पहुंच पाते इससे पहले दोनों गहरे पानी में समा गए। स्थानीय गोताखोरों ने डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद पहला और सवा दो घंटे बाद दूसरा शव निकाला। युवकों के डूबने की सूचना देन पर भी होमगार्ड का बचाव दल ढाई घंटे बाद मौके पर पहुंचा। तब तक दोनों के शव निकाले जा चुके थे। द्वारकापुरी निवासी 18 वर्षीय शाश्वत सुधीर छापड़िया हमउम्र दोस्त कृष्णपाल दिनेश बुंदेला के साथ सुबह 9 बजे कोचिंग जाने का कहकर निकले थे लेकिन दोनों राजघाट पहुंच गए। यहां काफी देर तक बैठने के बाद दोनों नहाने के लिए नदी में उतरे। बताते हैं दोनों को तैरना नहीं आता था। इस कारण गहरे पानी में जाने से दोनों डूब गए। मौके पर मौजूद एक मछली पकड़ने वाले ने दोनों को डूबते देखा लेकिन डर के मारे वह वहां से भाग गया। हादसे के दौरान नौगजी पर बैठे कुछ युवकों ने बताया दोनों को डूबता देख हम बचाने पहुंचे लेकिन तब तक दोनों गहरे पानी में समा चुके थे। हादसे की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना प्रभारी संजय पाठक सहित जवान मौके पर पहुंचे। होमगार्ड का बचाव दल बुलवाने के लिए कंट्रोल रूम पर सूचना दी गई लेकिन ढाई घंटे तक होमगार्ड का दल मौके पर नहीं पहुंचा।

15 गोताखोर कूदे नदी में, कृष्णपाल के बाद शाश्वत का शव निकाला

दोनों को तलाशने के लिए 15 स्थानीय गोताखोर नदी में कूद पड़े। डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद पहले कृष्णपाल और सवा दो घंटे बाद शाश्वत का शव मिला। मौके पर मौजूद लोग दोनों को नहीं पहचानते थे। घाट पर उतारे कपड़ों में शाश्वत का आधार कार्ड और कृष्णपाल का मोबाइल मिला। इससे ही दोनों की शिनाख्त हो सकी। इसके बाद पुलिस ने दोनों के परिजन को सूचना दी।

शाश्वत के परिजन भी राजघाट पहुंचे। शाश्वत जीएनटी स्कूल और कृष्णपाल सेवासदन स्कूल में कक्षा 12वीं का छात्र था। शाश्वत के पिता सुधीर सेवासदन कॉलेज में प्रोफेसर और मां पूनम नेहरू मांटेसरी स्कूल में शिक्षिका हैं। कृष्णपाल मोहद का रहने वाला है और रास्तीपुरा में चाचा राजेंद्र के यहां रहकर पढ़ाई कर रहा था। वे शकर कारखाने में नौकरी करते हैं।

समय पर मिलता इलाज तो बच सकती थी जान

बचाव दल के देरी से पहुंचने और जल्दी इलाज नहीं मिलने पर शाश्वत के परिजन ने आक्रोश जताया। उन्होंने कहा मौके पर ही डॉक्टर बुलाते और समय पर इलाज मिलता तो दोनों की जान बचाई जा सकती थी। जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद दोनों शव परिजन को सौंप दिए गए।

शाश्वत के नेत्र दान, मां बोलीं- बेटे की आंखें दुनिया देखेंगी

जिला अस्पताल में शाश्वत की मां पूनम ने बेटे की पूरी देह दान करने की इच्छा जताई लेकिन यहां पर्याप्त सुविधाएं नहीं होने के कारण सिर्फ नेत्र दान किए। पूनम बोलीं- मेरा बेटा गया नहीं है। उसकी आंखें दुनिया देखेंगी। कृष्णपाल के परिजन ने भी आंखें दान करने की इच्छा जताई लेकिन किसी कारणवश यह संभव नहीं हो सका।

सादी वर्दी में होने से लोगों ने नहीं पहचाना

होमगार्ड जवान मौके पर पहुंचे थे। वे युवकों को तलाशने नदी में भी उतरे लेकिन सादी वर्दी में होने के कारण लोग उन्हें पहचान नहीं पाए।
-रोशनी बिलवाल, होमगार्ड कमांडेंट, बुरहानपुर

ताप्ती में हर साल डूबने से हो रही 12 से ज्यादा मौतें

ताप्ती के 6 घाट, किस पर भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं

ताप्ती नदी के साढ़े 3 किमी के हिस्से में 6 घाट हैं। यहां सालभर में डूबने से करीब 12 से ज्यादा मौतें होती हैं। बावजूद इसके घाटों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। बाढ़ आने पर ही प्रशासन घाटों पर होमगार्ड के जवान तैनात करता है। वहीं सालभर यहां कोई इंतजाम नहीं रहता। लोग घाटों पर सालभर सुरक्षा के इंतजाम रखने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन इसको लेकर प्रशासन लापरवाह बना हुआ है। यही कारण है कि हर साल डूबने से मौतें हो रही हैं।

शहर में ताप्ती नदी के नागझिरी घाट, पीपल घाट, खातू घाट, राजघाट, खलखली घाट व सतियारा घाट हैं। इन घाटों पर लोग नहाने, मछली पकड़ने व कपड़े धोने पहुंचते हैं। डूबने की ज्यादा घटनाएं राजघाट व सतियारा घाट पर होती हैं। राजघाट व नागझिरी घाट तैरने के शौकीनों की पसंदीदा जगह है। सावन मास व अन्य त्योहारों पर बड़ी संख्या में लोग पूजन के लिए भी ताप्ती नदी पहुंचते हैं। फिर भी प्रशासन ने यहां सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए हैं। ताप्ती में इस साल अब तक 5 लोगों की डूबने से मौत हुई है। शाश्वत व कृष्णपाल से पहले राजघाट पर एक बालक व बुजुर्ग की डूबने से मौत हुई थी। छोटे पुल के नीचे युवक का शव मिला था। पिछले साल लड़का-लड़की बाइक सहित नदी में कूद पड़े थे। बलवाड़ टेकरी के लोगों ने उन्हें बचाया था। राजघाट क्षेत्र निवासी महेश चौहान ने बताया गहरे पानी व नए पुल पर सेल्फी लेने भी लोग पहुंचते हैं।

जिले में होमगार्ड के 148 जवान, चेकपोस्ट, थानों पर भी ड्यूटी

जिले में होमगार्ड का 148 जवानों का बल है। इनमें से कुछ की जिले की सीमाओं पर स्थित चेकपोस्ट और थानों में ड्यूटी लगाई गई है। शनिवार को हादसे के दौरान कुछ जवान स्वतंत्रता दिवस की परेड की रिहर्सल में गए थे। कमांडेंट रोशनी बिलवाल ने बताया टीम का वाहन भी परेड की रिहर्सल के लिए गया था। इससे ही मोटर बोट घटनास्थल ले जाना थी। इसलिए थोड़ी देरी हुई। बाढ़ सहित अन्य आपदा में बचाव के लिए छह जवानों की कंट्रोल रूम पर ड्यूटी रहती है। इनके अलावा इमरजेंसी के लिए 20 जवान लाइन में भी तैनात हैं।

मुख्यालय से संसाधन मांगे हैं- कमांडेंट

जिले में अभी 3 मोटर बोट हैं। इनके अलावा लाइफ जैकेट, लाइफ रिंग, रस्से व टॉर्च सहित अन्य संसाधन हैं। ताप्ती नदी का पानी बढ़ने पर जवानों की घाटों पर तैनाती की जाती है। कमांडेंट ने बताया तैनाती के दौरान जवानों के रहने के लिए टेंट की जरूरत है। मुख्यालय से इसके सहित 25 लाइफ जैकेट व 25 लाइफ रिंग की मांग की है। ये जल्द मिल जाएंगे।

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