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ग्रामीणों ने पकड़ी:बिस्किट के कार्टून में रख जीप से कर रहे थे शराब की तस्करी, झाड़ियों में भी छुपा रखी थी

नेपानगर10 महीने पहले
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  • अंबाड़ा में अलग-अलग ब्रांड की 100 लीटर से अधिक शराब पकड़ी, पुलिस ने सिर्फ 10 हजार रु. का केस बनाया
  • ग्रामीणों की सूचना पर एसडीएम और पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बनाया पंचनामा, जब्त की शराब

बुरहानपुर और नेपानगर सहित जिलेभर में अवैध शराब का कारोबार जमकर चल रहा है लेकिन न पुलिस कार्रवाई कर रही है और न ही आबकारी विभाग। ऐसे में आमजन को ही आगे आना पड़ रहा है। सोमवार सुबह ग्राम अंबाड़ा में भी ऐसा ही हुआ। यहां एक जीप से ले जाई जा रही अवैध शराब ग्रामीणों ने पकड़ी। साथ ही बड़े पैमाने पर झाड़ियों में छुपाकर रखी शराब भी जब्त की। ग्रामीणों ने इसकी सूचना एसडीएम और पुलिस को दी। इसके बाद एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा बनाया और मामला पुलिस को सौंपा।

सोमवार सुबह करीब 11 बजे ग्रामीणों ने जीप एमपी-08 एफए-2447 में बिस्किट के कार्टून में विभिन्न ब्रांड की अंगेजी शराब ले जाते देखी। साथ ही शराब माफियाओं द्वारा गांव के पास झाड़ियों में भी बड़े पैमाने पर अवैध शराब छुपाई थी। गांव में लंबे समय से चल रहे अवैध शराब के कारोबार से परेशान ग्रामीणों ने वाहन और झाड़ियों में रखी शराब जब्त कर ली। इसकेे बाद एसडीएम विशा माधवानी और पुलिस को इसकी सूचना दी। एसडीएम मौके पर पहुंचीं और पंचनामा बनाया। ग्रामीणों ने बताया पकड़ी गई शराब करीब 100 लीटर से ज्यादा है। इसमें बीयर और व्हिस्की भी शामिल है। इतनी बड़ी मात्रा में शराब पकड़ाने पर भी पुलिस ने एक ही आरोपी दर्यापुर निवासी कैलाश पिता पूनमचंद के खिलाफ 34 आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस ने पकड़ी गई शराब की कीमत सिर्फ 10 हजार 210 रुपए आंकी है।

पंचनामा तो बनाया, केस बनाने में दिनभर लगा दिया, वाहन भी जब्त

अवैध शराब पकड़ाने के बाद एसडीएम ने पंचनामा बनाकर मामला पुलिस के सुपुर्द कर दिया लेकिन पुलिस ने दोपहर तक भी मामले में केस दर्ज नहीं किया। बताया जा रहा है कि वाहन में करीब 20 से ज्यादा बिस्किट के कार्टून थे, जिनमें रखकर अवैध शराब ले जाई जा रही थी। एसडीएम ने वाहन भी जब्त किया, जो दोपहर तक एसडीएम कार्यालय परिसर में ही खड़ा रहा। ग्रामीणों का कहना था कि सूचना देने पर पुलिस जल्दी आ गई। पंचनामा बनाने में भी देर नहीं हुई लेकिन केस बनाने में पूरा दिन लग गया। त्वरित कार्रवाई न होने से माफियाओं के हौसले बुलंद होते हैं और प्रशासन के ऊपर भी ये माफिया अनावश्यक राजनीतिक दबाव बनवाने में लग जाते हैं।

नेटवर्क बढ़ाने के लिए ठेकेदारों ने गांव-गांव में बना रखे हैं एजेंट

सूत्रों के अनुसार अवैध शराब का कारोबार और कोई नहीं बल्कि लाइसेंसी दुकानों के ठेकेदार ही कर रहे हैं। उन्होंने गांव-गांव में अपने एजेंट बना रखे हैं। उन तक रोजाना वाहन के जरिए अवैध रूप से शराब पहुंचाई जा रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि अवैध शराब पकड़ाने के बाद आबकारी विभाग और पुलिस यह पता लगाने की भी कोशिश नहीं करती कि इसके पीछे किसका हाथ है और शराब कहां से कहां ले जाई जा रही थी। यही कारण है कि ऐसी कार्रवाई होने के बाद पुलिस और आबकारी दोनों निश्चिंत हो जाते हैं और माफिया अपना काम करते रहते हैं। शराब पकड़े जाने पर किसके इशारे पर सप्लाय है, कौन जिम्मेदार है जैसे सवाल अहम होने चाहिए।

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