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मृत्यु पर गम बांटिए..!:80 से ज्यादा संगठन, समाज ने दिया मृत्यु भोज बंद करने के अभियान को समर्थन

बुरहानपुर10 महीने पहले
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  • सामाजिक बदलाव के लिए दैनिक भास्कर की समाज के साथ एक पहल

मृत्यु भोज के खिलाफ जिले के 80 से ज्यादा समाज और संगठन आगे आए हैं। व्यक्तिगत रूप से भी इस कुप्रथा को बंद करने के लिए सकारात्मक समर्थन मिल रहा है। कुछ संगठन इसको लेकर मुख्यमंत्री से कानून बनाने की मांग उठा रहे हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण से उपजी वर्तमान परिस्थितियों के मद्देनजर एक सप्ताह पहले भास्कर ने मृत्यु भोज बंद करने का अभियान शुरू किया। इस बीच हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई, बौद्ध सहित अन्य 80 से ज्यादा समाजों का समर्थन मिला। अधिकांश लोगों ने फेसबुक, वाट्सएप, लिखित और व्यक्तिगत संपर्क कर मृत्यु भोज पर अपने सुझाव साझा किए। इनमें से कुछ समाजों में पहले से ही यह कुप्रथा बंद है। उन्होंने भी समर्थन कर अभियान पर जोर दिया। वहीं कुछ समाज इसको लेकर निरंतर प्रयासरत हैं। आर्ट ऑफ लिविंग ने ऑनलाइन साप्ताहिक सत्संग में इस अभियान पर चर्चा की। सत्संग में 196 परिवारों के करीब दो हजार सदस्य सीधे जुड़े थे। सभी सदस्यों ने इस पर सहमति जताई। आगामी गुरुवार को भी इससे ज्यादा परिवार अभियान को समर्थन देंगे। वहीं गायत्री परिवार से जुड़े सैकड़ों सदस्यों ने भी संस्था स्तर पर समर्थन दिया।

मृत्यु भोज के खिलाफ जिले के 80 से ज्यादा समाज-संगठनों का मिला समर्थन

16 संस्कारों में तेरहवीं का कोई उल्लेख नहीं
डॉ. सूरज खोदरे (गुर्जर) मुख्यमंत्री के नाम मांग पत्र भी बना चुके हैं। इसमें उन्होंने मृत्यु भोज बंद करने के लिए कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने वर्तमान, आर्थिक, सामाजिक और शास्त्रोक्त रूप से इस कुप्रथा को बंद करने की मांग की है। इसमें गरुड़ पुराण धर्मकांड प्रेतकल्प के अध्याय 35, 43 और 46 का जिक्र किया है। उन्होंने बताया सनातन धर्म के 16 संस्कारों में मृत्यु भोज का कहीं उल्लेख नहीं है। दुख की घड़ी के 10 दिन सूतक वाले परिवार का भोजन नहीं करने का भी उल्लेख है। कुनबी मराठा संगठन के पूर्व अध्यक्ष मोहन बलीराम पाटील ने बताया मैंने अध्यक्ष रहते गांव-गांव में समाजजन को यह कुप्रथा बंद करने के लिए प्रेरित किया। इसके लिए आज भी प्रयासरत हूं।

ये समाज और संगठन आए आगे
हिंदू-मुस्लिम, ईसाई धर्म गुरु, भावसार समाज, जैन समाज, सोनार समाज, पाटीदार समाज, मुस्लिम समाज, लेवा पाटील, सूर्यवंशी मराठा समाज, गुजराती समाज, तेली गुजराती समाज, यादव समाज, रघुवंशी समाज, अग्रवाल समाज, सिंधी समाज, खत्री समाज, हहैय कलचुरी समाज, प्रजापति समाज, गुर्जर समाज, संयुक्त माली, अहिर नाभिक सहित अन्य समाजों ने सहमति जताई है। इसके अलावा गायत्री परिवार, रोटरी क्लब, जिला पुरातत्व समिति, जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने भी इस कुप्रथा को बंद किए जाने का समर्थन किया है।

वॉट्सएप करें
यदि समाज और संगठन इस कुप्रथा को पूरी तरह बंद करने के लिए सहमत हैं तो पदाधिकारी समाज की सहमति हमें वॉट्सएप पर भेज सकते हैं। हम आपकी सहमति को प्रकाशित करेंगे जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिल सके। जो पदाधिकारी नहीं हैं वे भी अपनी राय दे सकते हैं। मृत्यु भोज में शामिल नहीं होने का निर्णय लेने वाले भी सिर्फ सहमत लिखकर आप हमें 9753085125 पर वॉट्सएप भेज सकते हैं।

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