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बिना पास के प्रवेश रोका:सीधे रास्ते पर चौकी लगाकर आवाजाही पर रोक, जंगल के कच्चे रास्तों से जिले में पहुंच रहे लोग

बुरहानपुर4 महीने पहले
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  • पांडल्या के रास्ते से भी दिनभर महाराष्ट्र से लोगों की आवाजाही चलती रही
  • जलगांव जिले के पांडल्या, निरूल, पातोंडी के रास्तों पर कोई रोक-टोक नहीं

महाराष्ट्र के जलगांव में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के कारण जिले से लगी इसकी सीमाएं सील करने के आदेश दिए गए हैं। महाराष्ट्र जाने वाले सीधे रास्ते को तो सील कर दिया है, लेकिन जंगल और गांवों से होकर गुजरने वाले कच्चे रास्तों से बेरोक-टोक आवाजाही जारी है। भास्कर ने शहर से 15 से 20 किमी की दूरी पर जलगांव से लगी इन सीमाओं की ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर हकीकत देखी।
महाराष्ट्र के जलगांव जाने के लिए सीधा रास्ता लोनी फाटे से होकर जाता है। इस रास्ते पर मंगलवार सुबह से पुलिस ने सख्ती कर दी है। बिना पास के यहां से किसी को भी आने-जाने की अनुमति नहीं है। लेकिन गांवों और जंगल के रास्ते जलगांव के निरूल, पांडल्या, अजनाड़ और पातोंडी गांव जाना आसान है, यहां से बेरोक-टोक महाराष्ट्र से जिले में लोगों का आवागमन हो रहा है। लॉकडाउन में सीमाएं सील हाेने के बाद इन रास्तों को भी बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया था, लेकिन फिलहाल ये सभी रास्ते खुले हुए हैं।
गुरु पूर्णिमा के कारण खंडवा की सीमाएं भी सील
खंडवा जाने के लिए भी अब लोगों को परेशानी उठाना होगी। गुरुपूर्णिमा पर्व के चलते शहर से बाहर से आने वाले लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। ऐसा दादाजी मंदिर में गुरुपूर्णिमा पर लगने वाली भीड़ को रोकने के लिए किया गया है। 5 जुलाई को गुरुपूर्णिमा पर्व है।

रिश्तेदारी से लेकर व्यापार तक के संबंध, इसलिए सबसे ज्यादा आवाजाही यहीं
महाराष्ट्र की सीमा से लगे होने के कारण बुरहानपुर और जलगांव में स्थानीय लोगों की काफी रिश्तेदारी है। इस कारण यहां से आवाजाही भी ज्यादा है। शादी, उत्सव, त्योहार और गमी में शामिल होने के लिए हजारों लोग हर दिन यहां आते-जाते हैं। इसके अलावा जलगांव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और डॉक्टर हैं। कोरोना संक्रमण के कारण लोग इंदौर जाने से कतराते हैं।इसलिए इलाज कराने जलगांव जाते हैं। वहीं व्यापार-व्यवसाय की दृष्टि से जलगांव से किराना, मोबाइल, सब्जी से लेकर हर तरह के सामान की भी आपूर्ति यहीं से होती है। इस लिहाज से जलगांव आना-जाना सबसे ज्यादा होता है।

बिरोदा से जलगांव जिले के पांडल्या-निरूल जाना सबसे ज्यादा आसान
जिले से जलगांव की ओर जाने का सबसे आसान रास्ता बिरोदा से पांडल्या और निरूल का है। पांडल्या जाने के लिए तो आधे से ज्यादा रास्ता सीमेंट का है। ये दोनों रास्ते शहर से 15 किमी की दूरी पर हैं। लोनी फाटे पर रोक-टोक के कारण अब लोग इन दो रास्तों से सबसे ज्यादा आना-जाना कर रहे हैं। पांडल्या और निरूल होकर लोग फैजपुर-रावेर पहुंच रहे हैं। यहां से जलगांव का सीधा रास्ता मिल जाता है। इन दो रास्तों से ही महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा अवैध शराब की तस्करी जिले में होती है। यहां कई बार अवैध शराब की तस्करी करते वाहन पकड़ाए हैं।
नागुलखेड़ा से अजनाड़, नाचनखेड़ा से पातोंडी के रास्ते जा रहे मजदूर
जिले के हतनुर-नागुलखेड़ा से अजनाड़ और नाचनखेड़ा से पातोंडी जाना भी काफी आसान है। गांव और जंगल का रास्ता होने से यहां किसी तरह की रोक-टोक नहीं है। कई ग्रामीणों के खेत दोनों प्रदेशों की सीमा में हैं। ऐसे में खेती के काम से मजदूर और किसान हर दिन यहां से आना-जाना कर रहे हैं। शहर से करीब 20 किमी दूर इन दोनों रास्तों से भुसावल, जलगांव और अमरावती जाना काफी आसान है।

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