पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

भास्कर एक्सपोज:नशा बढ़ाने शराब में मिला रहे नौसादर, यूरिया, जले हुए सेल, ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन; ये सब धीमे जहर

बुरहानपुर4 दिन पहलेलेखक: अरविंद पटेल
  • कॉपी लिंक
  • आबकारी विभाग के पास इसकी जांच के कोई संसाधन नहीं, अफसर जांचते हैं सिर्फ अल्कोहल और पानी की मात्रा, घने जंगल और नदी-नालों किनारे ही नहीं घरों में भी बन रही अवैध महुआ शराब

घने वन क्षेत्र में झाड़ियों में छुपाकर रखा महुआ लहान। नाले किनारे धधकती भटि्टयां। इन पर उबलता सड़ा हुआ महुआ। ज्यादा नशा बढ़ाने के लिए इसमें नौसादर, यूरिया, जले हुए सेल, धतूरे के बीज और यहां तक कि मवेशियों को लगाने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन तक मिलाते शराब माफिया। भट्टी पर लगी नली से प्लास्टिक की कैन में बूंद-बूंद टपकती शराब। यहां से यह शराब गांव-गांव तक पहुंच रही।

यह दृश्य किसी एक जगह का नहीं। जिले का कोई भी क्षेत्र हो, जंगल और नदी-नालों किनारे इसी तरह कच्ची शराब बनाई जा रही है। शहर से सटी बलवार टेकड़ी हो या दूरस्थ देड़तलाई। इससे सटे बालापाट, चौखंडिया, सातोड़, दाहिंदा, शेखपुरा, रामाखेड़ाकलां, रामाखोड़ाखुर्द, साजनी, डवाली रैयत, दैयत रैयत, गोंद्री परेठा हो या निंबोला क्षेत्र के चमरिया का टांडा, शाहपुर क्षेत्र का मोहद, धुलकोट क्षेत्र हो या बसाड़ की ताप्ती नदी का किनारा।

नेपानगर क्षेत्र के अंबाड़ा, डवालीखुर्द, डवालीकलां, नावथा, सोनूद, मांडवा, अंधारवाड़ी हो या सीवल, हर जगह इसी तरह अवैध कच्ची शराब बन रही है। लेकिन इस पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है। हद तो यह है कि आबकारी विभाग के पास शराब में सिर्फ अल्कोहल और पानी जांचने के संसाधन है। मिलावटी और जहरीली शराब की जांच के लिए जिले की निर्भरता अब भी सागर सहित अन्य बड़े शहरों की प्रयोगशालाओं पर है।

जंगल व नदी-नालों किनारे ऐसे ही कच्ची शराब बनाई जा रही है-

शराब माफिया दो से तीन गुना कमा रहे मुनाफा

  • अमूमन शराब बनाने के लिए महुआ को डिब्बों मेंं आठ से दस दिन तक सड़ाया जाता है। लेकिन ज्यादा कमाई की लालच में अब इसे सिर्फ दिन ही रखा जा रहा है।
  • इसे जल्दी सड़ाने और नशा बढ़ाने के लिए इसमें गुड़, नौसादर, यूरिया और धतूरे के बीज सहित अन्य जहरीली सामग्री मिलाई जा रही है।
  • छोटे माफिया रोजाना पांच से 10 लीटर शराब बना रहे हैं। बड़े माफियाओं की शराब की कोई मात्रा सीमित नहीं है।
  • पांच किलो महुआ से 20 लीटर शराब बनती है। 10 लीटर शराब बनाने पर महज 500 रुपए खर्च आता है।
  • पहली धार की शराब 100 रुपए लीटर और पानी मिलाने के बाद 60 रुपए लीटर तक बिक रही है।

शराब पीना खुद हानिकारक इनकी मिलावट से जहर जैसा

  • नौसादर : इससे किडनी को नुकसान पहुंचता है। यह काफी घातक है।
  • जले हुए सेल : इससे लीवर खराब होता है।
  • धतूरे के बीज : इससे आंखों पर असर पड़ता है। आंखों की रोशनी भी जा सकती है।
  • यूरिया : इससे भी लीवर को नुकसान पहुंचता है।
  • ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन : यह इंजेक्शन मवेशियों को दूध बढ़ाने के लिए लगाया जाता है। इससे हार्मोन्स गड़बड़ाते हैं। वहीं पेट में छाले भी हो जाते हैं।

विभाग जांचता है सिर्फ अल्कोहल व पानी की मात्रा

मिलावट जांचने के लिए विभाग के पास कोई संसाधन नहीं हैं। विभाग शराब में सिर्फ अल्कोहल और पानी की मात्रा जांचता है। -एससी चौधरी, जिला आबकारी अधिकारी बुरहानपुर

पुलिस, आबकारी से ज्यादा पुख्ता माफियाओं का मुखबिर तंत्र

माफिया भले ही घने जंगल में अवैध शराब बना रहे हैं, लेकिन इनका मुखबिर तंत्र पुलिस और आबकारी विभाग से कहीं ज्यादा पुख्ता है। शराब बनाने वाले स्थान के आसपास माफियाओं के गुर्गे मुश्तैद रहते हैं। दबिश के लिए पहुंची टीम की सूचना मोबाइल सहित अन्य माध्यमों से साथियों को देते हैं। यही कारण है कि अधिकांश दबिश के दौरान टीम को मौके पर सिर्फ शराब, महुआ लहान, भटि्टयां और अन्य सामान ही मिलता है। आरोपी हाथ नहीं आते। धुलकोट चौकी प्रभारी सुनील पाटील ने बताया आठ महीने में ही हमने क्षेत्र से तीन हजार लीटर महुआ शराब और दो हजार लीटर से अधिक महुआ लहान जब्त किया है।

देड़तलाई के 100 से ज्यादा घरों में बन रही अवैध शराब

घने जंगल तो छोडि़ए, देड़तलाई में तो 100 से ज्यादा घरों में अवैध शराब बनाई जा रही है। इसके अलावा आसपास के गांवों से भी ऑर्डर पर शराब बनवाकर बुलवाई जा रही है। क्षेत्र के एक से डेढ़ किमी के अंदरूनी रास्तों किनारे टपरी बनाकर यह शराब बेची जा रही है। यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचकर शराब पी रहे हैं। एक टपरी से एक दिन में 20 से 25 लीटर तक शराब खपाई जा रही है। लेकिन यहां कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

खबरें और भी हैं...