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कोरोना इफेक्ट:घर में ही होगी प्रतिमा स्थापना, ईद की नमाज राखी पर भाई-बहन का आना भी प्रतिबंधित

बुरहानपुर10 महीने पहले
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  • 2 माह नहीं मना सकेंगे सामूहिक उत्सव, सांकेतिक रूप से ही मनाएंगे त्योहार

जिले में अगले 2 महीने तक कोई भी सामूहिक उत्सव नहीं मना सकेंगे। गणेशोत्सव में भी सार्वजनिक प्रतिमा स्थापना नहीं होगी। घर में ही प्रतिमा स्थापित कर गमले या बाल्टी में विसर्जित करना होगी। मोहर्रम के सभी कार्यक्रम घर में होंगे। ईदुज्जुहा की नमाज भी घर में ही पढ़ी जाएगी। यही नहीं महाराष्ट्र और मप्र की सीमा बंद होने से रक्षाबंधन पर भाई-बहन के आने-जाने पर भी पाबंदी रहेगी। मंगलवार शाम हुई शांति समिति की बैठक में जिला प्रशासन ने सभी सामूहिक उत्सवों पर पाबंदी लगाने की जानकारी दी। सोमवार को गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान आया था कि गणेश, दुर्गा उत्सव व ताजिए के बड़े सार्वजनिक पंडाल नहीं लगेंगे। इसके बाद मंगलवार को कलेक्टर प्रवीण सिंह ने शांति समिति की बैठक बुलाई। कोरोना संक्रमण के मद्देनजर सभी सदस्यों ने सामूहिक त्योहारों पर पाबंदी का समर्थन किया। हालांकि इस निर्णय से विभिन्न उत्सव समितियों में आक्रोश शुरू हो गया है। पिछले दो दिन से अंदर ही अंदर समितियों में विरोध पनप रहा है। हालांकि अब तक कोई खुलकर सामने नहीं आया है। कुछ सार्वजनिक मंडल सरकार की पाबंदी के निर्णय के पक्ष में हैं। राज्य सरकार से जारी गाइडलाइन के अनुसार प्रशासन सख्त कदम उठाएगा। कलेक्टर प्रवीण सिंह ने कहा जिले की भौगोलिक स्थिति और जनसंख्या घनत्व से कभी भी संक्रमण फैल सकता है। जुलाई में 13 ऐसे संक्रमित सामने आए हैं, जो महाराष्ट्र से संक्रमित होकर यहां पहुंचे।

ये कार्यक्रम नहीं हो सकेंगे
किसी भी उत्सव में सार्वजनिक पंडाल नहीं लगेंगे। गणेशजी, माताजी की बड़ी प्रतिमाएं नहीं बनाना है। ताजिए की ऊंचाई छोटी रहेगी। इदुज्जुहा पर सामूहिक नमाज व कृष्ण जन्माष्टमी पर सामूहिक कार्यक्रम नहीं होंगे। त्योहारों पर जुलूस नहीं निकालेंगे। पोला पर्व पर तोरण तोड़ स्पर्धा नहीं हो सकेगी।

सदस्यों ने ये दिए सुझाव
सवाल : डॉ. आनंद दीक्षित ने कहा अनंत चतुर्दशी पर विसर्जन के लिए राजघाट पर क्या व्यवस्था रहेगी।
एसपी : सभी घरों में ही मिट्‌टी की प्रतिमा स्थापित करें। गमले में विसर्जित कर एक पौधा लगाएं।
जवाब : संतोष देवताले ने कहा जो निर्णय हो, सबके सामने हो। दीदी-भैया के दबाव में निर्णय न बदलें।
सवाल : आशीष शर्मा ने कहा रक्षाबंधन पर बहन या भाई को महाराष्ट्र या प्रदेश में आने की अनुमति मिलेगी या नहीं।
कलेक्टर : जलगांव, अमरावती, बुलढाणा और औरंगाबाद से नहीं आ-जा सकेंगे।

सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापना : 103 साल पुरानी परंपरा टूटेगी

बुरहानपुर | इस साल जिले में सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापना की 103 साल पुरानी परंपरा टूटेगी। आजादी का अलख जगाने के लिए इसकी शुरुआत हुई थी। महाराष्ट्र के बड़े शहरों तक प्रसिद्ध बुरहानपुर की प्रतिमाएं प्रदेश की सीमा सील होने से वहां नहीं जा सकेंगी। पड़ोसी राज्य में 4 फीट तक प्रतिमाएं स्थापित करने की छूट है। जिले के 60 से ज्यादा मूर्तिकारों को पहले से अंदेशा था कि ऊंची प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लग सकता है। इसलिए अधिकांश ने बड़ी प्रतिमाओं के कम ऑर्डर लिए थे। उन्हें मंडलों से 100 ऑर्डर भी नहीं आए हैं। उन्होंने 5 फीट से ज्यादा ऊंची प्रतिमाएं नहीं बनाई है। इससे छोटी 25 हजार से ज्यादा प्रतिमाएं बन चुकी हैं।

ऐसे हुई थी प्रतिमा स्थापना की शुरुआत
1917 में लोकमान्य तिलक के बुरहानपुर आने के बाद 103 साल पहले तिलक वार्ड स्थित तिलक भवन में सार्वजनिक प्रतिमा स्थापना की शुरुआत हुई थी। यहीं से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मार्तंडराव मुजूमदार ने आजादी का अलख जगाया था। जिले की प्रतिमाएं नागपुर, अमरावती, अकोला, बुलढाणा, जलगांव, भुसावल, चालीसगांव, चोपड़ा, सावदा, रावेर, खरगोन, खंडवा, बड़वानी, धार तक जाती हैं।

यह है शहर के गणेश मंडलों के निर्णय

  •  राजपुरा में स्वामी विवेकानंद गणेश समिति चंदे से स्वास्थ्य बैंक खोलेगी।
  •  बुधवारा में जय मां महाकाली व्यायामशाला तीन फीट की मूर्ति स्थापित करेगी।
  •  आलमगंज में जबरन सेना तीन फीट की मंगल मूर्ति स्थापित करेगी।
  •  सिंधीपुरा में गुलाल का राजा स्थापित करने पर संशय की स्थिति है।
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