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शाहजहां-मुमताज की Love story के चौंकाने वाले राज:MP में परवान चढ़ा इश्क; मिट्टी में दीमक न होती तो ताजमहल आगरा में नहीं, बुरहानपुर में बनता

रईस सिद्दीकी (बुरहानपुर)9 महीने पहले

आपने देश के कई राजा-महाराजाओं की लव स्टोरी पढ़ी और सुनी होगी। इसमें इश्क की निशानी आगरा के ताजमहल बनने की कहानी भी है, लेकिन यह बात कम लोग जानते हैं कि ताजमहल बनने की शुरुआत मध्यप्रदेश के बुरहानपुर से हुई थी। वैलेंटाइन डे पर पढ़िए शाहजहां और मुमताज की शाही लव स्टोरी के चौंकाने वाले राज…

मुगल शासक शाहजहां और मुमताज की लव स्टोरी वैसे तो आगरा से शुरू हुई थी, लेकिन यह परवान बुरहानपुर में चढ़ी। बुरहानपुर की मिट्टी में दीमक न होती तो ताजमहल भी बुरहानपुर में ही बनता। दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल का बेस यहीं पर तैयार हुआ था।

इतिहासकार मोहम्मद नौशाद के अनुसार मुगल बादशाह शाहजहां जब बुरहानपुर आए, तो अपनी बेगम को साथ लाए थे। मुमताज की 3 डिलीवरी बुरहानपुर में हुई। बदकिस्मती यह रही कि चौदहवीं संतान की पैदाइश के समय उनका निधन हो गया। मुमताज की ख्वाहिश के मुताबिक शाहजहां ने उसकी याद में ताजमहल बनाया। छह माह तक मुमताज को बुरहानपुर में ही दफनाकर रखा गया। इसे पाइन बाग कहते हैं।

शाहजहां की इच्छा थी कि ताजमहल बुरहानपुर में ही बने। यहां की मिट्टी में दीमक होने और ताप्ती का जलस्तर कम होने के कारण उस समय के आर्किटेक्ट ने ताजमहल यहां न बनाने की सलाह दी। ताजमहल में 65 क्वालिटी का संगमरमर लगना था, जिसे राजस्थान और ईरान से यहां लाना उस समय मुश्किल था, लेकिन ताजमहल का बेस, डिजाइन बुरहानपुर में बना था। इसी की प्रतिकृति काला ताजमहल बुरहानपुर में मौजूद है। इसे देखने देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।

बुरहानपुर में मुमताज की कब्र का लगा बोर्ड।
बुरहानपुर में मुमताज की कब्र का लगा बोर्ड।

शाहनवाज खान का मकबरा है काला ताजमहल

इतिहासकार मोहम्मद नौशाद के मुताबिक काला ताजमहल में शाहनवाज खान का मकबरा है। वैसे, शाहनवाज खान अब्दुल रहीम खानखाना का बड़ा बेटा था। उनकी परवरिश बुरहानपुर में ही हुई। उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें मुगल फौज का सेनापति बनाया गया। 44 साल की उम्र में उनकी मृत्यु हो गई, जिसे बुरहानपुर में उतावली नदी के किनारे दफनाया गया।

कुछ दिन बाद उनकी पत्नी का भी देहांत हो गया। उन्हें भी इसी स्थान पर दफनाया गया। इसी की याद में बना है यह शाहनवाज खान का मकबरा। इसे साधारण भाषा में काला ताजमहल कहते हैं, जो काले पत्थरों से बना है। जिसमें ताज की तरह ही नक्काशी की गई है। यही नक्काशी शाही किले में भी नजर आती है।

काला ताजमहल में शाहनवाज खान का मकबरा है।
काला ताजमहल में शाहनवाज खान का मकबरा है।

ताजमहल का डिजाइन बुरहानपुर में तय हुआ था

बुरहानपुर में ताजमहल बनाना भले ही संभव नहीं हो पाया, लेकिन इसका डिजाइन यहीं तय किया गया था। ताजमहल के वास्तु के लिए कई इमारतों और डिजाइनों से प्रेरणा ली जा रही थी। मध्यप्रदेश के मांडू स्थित होशंगशाह का मकबरा भारत में पहला ढांचा है, जो संगमरमर से बनाया गया था। इससे प्रेरित होकर शाहजहां ने ताजमहल को संगमरमर से बनाने का निर्णय लिया।

ताजमहल के डिजाइन को लेकर मान्यता है कि बुरहानपुर के शाही किले में मुमताज महल के लिए बनवाए गए शाही हमाम के एक टाइल्स पर मौजूद डिजाइन ही ताज महल का डिजाइन है। इसके साथ ही बुरहानपुर में काला पत्थर से बना आकर्षक मकबरा है, जो ताजमहल के बनने से पहले का है और डिजाइन ताजमहल जैसा है। इसे ही स्थानीय लोग काला ताजमहल कहते हैं। ताजमहल के लिए इस मकबरे से भी प्रेरणा ली गई थी।

मुमताज का शव आगरा ले जाने में खर्च हुए थे आठ करोड़

ताजमहल बनाने के लिए ईरान, तुर्की, फ्रांस और इटली से शिल्पकारों को बुलाया गया। उस समय वेनिस से प्रसिद्ध सुनार और जेरोनियो को बुलवाया गया था। शिराज से उस्ताद ईसा आफंदी भी आए, जिन्होंने ताजमहल की रूपरेखा तैयार की थी। उसी के अनुरूप कब्र की जगह तय की गई। 22 सालों बाद जब इसका काम पूरा हो गया तो मुमताज के शव को पुनः दफनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। बुरहानपुर के जैनाबाद से मुमताज के जनाजे को एक विशाल जुलूस के साथ आगरा ले जाया गया। ताजमहल के गर्भगृह में दफना दिया गया। जुलूस पर उस समय आठ करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

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