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अनदेखी:200 क्वार्टर थे, 30 ही बचे, इन पर हो रहा कब्जा, संभाल नहीं पा रहा नेपा मिल प्रबंधन

बुरहानपुर10 महीने पहले
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नेपा मिल के पीडी क्वाटर्स में अवैध कब्जे हो रहे हैं। - Dainik Bhaskar
नेपा मिल के पीडी क्वाटर्स में अवैध कब्जे हो रहे हैं।
  • बुधवारा के पीछे बने हैं नेपा मिल के क्वार्टर, यहां हो रहे कब्जे से संपदा विभाग बेखबर

कागज कारखाने नेपा लिमिटेड के अधिकारियों की लापरवाही के कारण बुधवारा के पीछे पीडी क्वार्टर्स के नाम से बसी काॅलोनी वीरान हो गई है। कभी यहां 200 क्वार्टर हुआ करते थे, लेकिन लापरवाही का आलम यह रहा कि प्रबंधन ने इन्हें सहजने की कोशिश नहीं की। धीरे-धीरे अधिकांश क्वार्टर जर्जर होकर रहने लायक भी नहीं बचे। जो 30 क्वार्टर बचे हैं, उन्हें भी नेपा मिल का संपदा विभाग सहेजने में नाकाम साबित हो रहा है। यहां कुछ लोग कब्जा कर क्वार्टर हथियाने में लगे हैं। वहीं तीन-चार लोगों ने यहां अतिक्रमण कर क्वार्टर अपने कब्जे में भी ले लिए हैं। इन दिनों नेपा मिल के रिनोवेशन का काम चल रहा है। मिल की आय के सारे साधन बंद हैं। सिर्फ एक पेट्रोल पंप ही संचालित हो रहा है। ऐसे में मिल की संपत्ति पर भी अधिकारी-कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। मिल के अस्तित्व में आने के बाद नेपानगर बसा था। तब करोड़ों रुपए खर्च कर अधिकारी-कर्मचारियों के लिए क्वार्टर बनाए गए थे। लेकिन अनदेखी के कारण ये आज बदहाल पड़े हैं। नेपा मिल के संपदा विभाग में करीब एक दर्जन से अधिक कर्मचारी पदस्थ हैं। मिल की संपत्ति पर अवैध कब्जे हो रहे हैं। पीडी क्वार्टर्स के आसपास झाडि़यां भी उग आई हैं। अधिकांश क्वार्टर्स की छत भी गायब हो चुकी है। जर्जर हो चुके कई क्वार्टर आवारा मवेशियों का ठिकाना बन चुके हैं। रहवासियों का कहना है यहां साफ-सफाई पर भी ध्यान नहीं दिया जाता। अक्सर जहरीले जीव-जंतु निकल रहे हैं। 

अधिकारी-कर्मचारी भी नहीं खाली करते क्वार्टर, प्रभारी एसडीएम नहीं दे पाते समय

नेपा मिल की ओर से सरकारी सेवाओं में स्थानांतरित होकर आने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को कम किराए पर क्वार्टर मुहैया कराए जाते हैं। लेकिन अधिकांश अधिकारी-कर्मचारी यहां से स्थानांतरित होने के बावजूद क्वार्टर खाली नहीं करते। संपदा विभाग द्वारा महज कभी-कभार नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर ली जाती है। कुछ महीने पहले संपदा विभाग द्वारा एक सूची जारी की गई थी, जिसमें क्वार्टर खाली नहीं करने वाले अधिकारी-कर्मचारी और पुलिसकर्मियों के नाम दिए गए थे। नेपा मिल से जुड़े लोगों के मुताबिक यहां स्थायी सीएमडी नहीं होने के कारण ये सारी समस्याएं हो रही हैं। प्रभारी सीएमडी होने से वह यहां समय नहीं दे पाते। ऐसे में अन्य अफसर-कर्मचारियों के बीच सामंजस्य नहीं बन पा रहा है। यही वजह है कि अब तक मिल का काम 15 से 20 फीसदी ही होना बताया जा रहा है। जबकि यहां वर्ष 2016 से प्रोडक्शन बंद है।

नेपा मिल प्रबंधन की वो सुस्ती जिससे काम अधूरे

  •  मिल में देशी-विदेशी कंपनियों के ठेकेदारों के कर्मचारी काम कर रहे हैं। जबकि अधिकांश स्थानीय कर्मचारियों के पास कोई काम नहीं है। लेकिन वेतन हर महीने मिल रहा है। प्रबंधन अधिकांश अधिकारी-कर्मचारियों से कोई काम नहीं ले पा रहा है। ऐसे में खर्च का बोझ कम नहीं हो पा रहा है।
  •  कुछ महीने पहले दिल्ली से आए अधिकारियों ने यहां निरीक्षण किया था। इसके बाद इधर मुड़कर भी नहीं देखा। हालांकि वे अधिकारियों को ताकीद कर गए थे कि काम समय पर पूरा कराएं। लेकिन अब तक 15 से 20 फीसदी काम ही हो पाया है।
  • नेपा मिल के पास स्टाफ की भी कमी है। इस कारण भी अधिकारी-कर्मचारी मिल की संपत्ति की देखरेख नहीं कर पा रहे हैं।
  • नेपा मिल द्वारा नगर पालिका को अब तक 300 एकड़ जमीन भी आवंटित नहीं की गई है। नेपा मिल से जमीन आवंटित हो जाए तो सारी व्यवस्था नगर पालिका के हाथ में आने से अवैध कब्जे और जर्जर भवनों की स्थिति में भी सुधार आ सकता है।

प्रक्रिया चल रही है, अभी हैंडओवर नहीं की जमीन
^नेपा मिल से जमीन लेने की प्रक्रिया चल रही है। अब तक नगर पालिका को जमीन हैंडओवर नहीं की गई है। भोपाल स्तर पर भी प्रक्रिया चल रही है।
-राजेश मिश्रा, सीएमओ नगर पालिका नेपानगर

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