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समर्थन मूल्य:अब तक ज्वार की खरीदी नहीं, किराए के गोडाउन में उपज रखने को मजबूर किसान

बुरहानपुरएक महीने पहले
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  • गरीब किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर बिचौलिए कम भाव में खरीद रहे ज्वार

शासन द्वारा 15 अक्टूबर से समर्थन मूल्य पर ज्वार की खरीदी शुरू करना थी लेकिन आज तक शुरू नहीं हो सकी है। इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं करने के कारण किसान खेत से उपज लाकर घर या गोडाउन में इसका भंडारण करके रख रहे हैं। जिन किसानों के पास भंडारण की जगह नहीं है, मजबूरी में उन्हें किराए से मकान और गोडाउन लेकर उपज रखना पड़ रही है। वहीं कई गरीब किसान बाजार में कम दाम पर उपज बेच रहे हैं। इसका सीधा फायदा बिचौलिए उठा रहे हैं। वे मजबूर किसानों से कम भाव पर ज्वार खरीद रहे हैं। किसानों ने समर्थन मूल्य पर खरीदी जल्द शुरू करने की मांग की है। किसानों ने बताया कि 15 अक्टूबर से समर्थन मूल्य पर ज्वार की खरीदी शुरू होना थी लेकिन इसको लेकर अब तक शासन-प्रशासन की ओर से कोई स्थिति साफ नहीं हुई है। इस कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। खेत से उपज घर लाने के बाद इसे धूप दिखाने, साफ-सफाई करने सहित अन्य रखरखाव मुश्किल हो रहा है। इसके लिए अतिरिक्त मजदूर लगाना पड़ रहे हैं। एक मजदूर को कम से कम 200 रुपए मजदूरी देना पड़ रही है। पहले से ही तंगहाली झेल रहे किसानों को ऐसे में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है लेकिन उनकी परेशानी की ओर कोई भी जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहा है।

समर्थन मूल्य 2620 रुपए, बिचौलिए 1100 से 1400 रु. में खरीद रहे उपज
किसानों ने बताया समर्थन मूल्य पर ज्वार की खरीदी 2620 रुपए के भाव से होना है लेकिन खरीदी अब तक शुरू नहीं हुई है। इस कारण कई किसान खुले बाजार में उपज बेच रहे हैं। इसका फायदा उठाकर बिचौलिए 1100 से 1450 रुपए के भाव से उनसे उपज खरीद रहे हैं। उपज का भंडारण कर बिचौलिए इसे ही अधिक दाम पर बेचेंगे। ऐसे में वो तो अच्छा मुनाफा कमाएंगे लेकिन किसानों के हाथ में कुछ नहीं आ पा रहा है। ज्वार खरीदी के लिए बिचौलिए गांवों में सक्रिय हो गए हैं। वे किसानों को बहला-फुसलाकर उपज खरीद रहे हैं।
मगरूल में करते हैं खेती, बुरहानपुर में किराए से गोडाउन लेकर रखी उपज
मगरूल में खेती करने वाले बुरहानपुर के किसान राजेश भावसार ने बताया उपज तो निकाल ली है लेकिन समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने के कारण ज्वार का भंडारण करके रखा है। इसके लिए बुरहानपुर में किराए से गोडाउन लिया है। ऐसे में अतिरिक्त खर्च झेलना पड़ रहा है। निंबोला के किसान विनोद भावसेकर और प्रभाकर चौधरी ने बताया अच्छी गुणवत्ता की ज्वार मजबूरी में 1175 रुपए के भाव से बेचना पड़ी है। वहीं रामदास बारी ने भी 1375 रुपए के भाव से ज्वार बेची है। इसी तरह कई किसान कम भाव पर उपज बेच रहे हैं।

अधिक बारिश के कारण झड़ गए दाने, कम हुआ उत्पादन
अकेले निंबोला क्षेत्र में किसानों ने पांच हजार एकड़ में ज्वार फसल लगाई थी। इसमें से 90 प्रतिशत उपज किसान निकाल चुके हैं। 10 प्रतिशत फसल अब भी खेतों में खड़ी है। किसानों ने बताया फसल पूरी तरह पकने के बाद पिछले दिनों हुई अधिक बारिश से यह बुरी तरह प्रभावित हुई है। पके हुए भुट्टों से दाने झड़ गए। इससे उत्पादन में कमी आई है। करीब 40 प्रतिशत खेतों में उत्पादन घटा है। किसानों के हाथ में प्रति एकड़ आठ से 10 क्विंटल ही ज्वार आई है। जबकि पिछले वर्षों में किसान प्रति एकड़ 12 से 15 क्विंटल तक उत्पादन लेते थे लेकिन इस साल अधिक बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने के बाद ही किसानों की परेशानी दूर होगी।
दीवाली सामने, किसानों के हाथ में रुपए नहीं
किसानों ने बताया कि साल का दीवाली जैसा त्योहार सामने है लेकिन शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं किए जाने से किसानों के हाथ में रुपए नहीं है। त्योहार पर बच्चों के लिए कपड़े, मिठाई सहित अन्य जरूरी सामान की खरीदी करना है लेकिन रुपए नहीं होने के कारण खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। त्योहारी सीजन में दुकानदार जरूरी सामान उधार भी नहीं दे रहे हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी जल्द शुरू हो तो किसानों की परेशानी दूर हो सकती है। इस तरफ शासन-प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।

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