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यह कैसी सुरक्षा:बिना सुरक्षा डॉक्टर ने टटोली नब्ज, महिला की सांस टूटी, परिजन बोले- यहां भोजन और पानी तक नहीं

बुरहानपुर11 दिन पहले
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कोरोना वार्ड में मौत होने पर चादर ओढ़ाई। बेड के पास अंदर और बाहर 7 से 8 लोग खड़े रहे। - Dainik Bhaskar
कोरोना वार्ड में मौत होने पर चादर ओढ़ाई। बेड के पास अंदर और बाहर 7 से 8 लोग खड़े रहे।
  • जिला कोविड केयर सेंटर में प्रवेश पर रोक, फिर भी बेरोक-टोक चल रही लोगों की आवाजाही
  • मरीजों के साथ परिजन भी यहीं रह रहे, क्योंकि मरीजों की देखरेख के लिए यहां कर्मचारी तक नहीं

मंगलवार दोपहर 12.30 बजे। जिला कोविड स्वास्थ्य सेंटर का 212 नंबर कोरोना वार्ड। यहां आमजन के प्रवेश पर रोक है। फिर भी लोग बेखौफ मरीजों को देखने पहुंचते रहे। भास्कर ने इसकी पहले बाहर से पड़ताल की। लोगों की आवाजाही थम नहीं रही थी। फिर रिपोर्टर सेंटर के प्रथम तल पर पहुंचा। यहां आईसीयू से सटा एक वार्ड है। अंदर देखा तो यहां गाइडलाइन की सारी हदें टूटती नजर आईं। यहां करीब 18 बेड पर 18 मरीज थे। बेखौफ परिजन उनके बीच बैठे थे। कोई मरीज को हवा दे रहा था तो कोई पानी पिला रहा था। कुछ लोग वार्ड के बाहर बैठे थे। स्टाफ नर्स सिर्फ यूनिफार्म में दिखीं।

किसी ने भी पीपीई किट नहीं पहनी। इनमें से एक स्टाफ नर्स से पूछा तो बोलीं यह कोरोना संदिग्ध मरीजों का वार्ड है। यहीं एक कैबीन में ड्यूटी डॉक्टर राजिक कुछ फार्म भर रहे थे। पूछने पर कहने लगे कई बार लोगों को समझाया। यहां तक कि डॉ. गर्ग ने भी उन्हें लताड़ा लेकिन कोई भी मानने को तैयार नहीं है। पूछने पर बोले पॉजिटिव मरीज ऊपर हैं। रिपोर्टर दूसरे तल पर भी पहुंचा। यहां एक हिस्से में 8 पॉजिटिव मरीज हैं। सामने वार्ड में कोरोना के गंभीर मरीज हैं। यहां भी परिजन मरीजों के पास बैठे दिखे। दायीं तरफ बेटा मां को नारियल पानी पिला रहा था।

महिला मरीज के पति ने कहा- खाना तो छोड़ो, यहां पर पानी तक नहीं मिल रहा
महिला मरीज के पति प्रतापसिंह सारंग ने बताया अटेंडर को तो रहना पड़ेगा। यहां पानी तक नहीं मिल रहा। भोजन बाहर से खरीदकर ला रहे हैं। रात को गैलरी में सो रहे हैं। दूसरे कोने में पत्नी मरीज पति के पास बैठी है। खकनार के मरीज की पत्नी शारदा बोली डॉक्टर से पूछकर बैठे हैं। यहां कोई भोजन नहीं दे रहा। हम खुद खाना ला रहे हैं।

महिला की बेटी बोली- आप ठीक हो उठो और टूट गई अम्मी की सांसें
यहीं दरवाजे के ठीक सामने बेड के आसपास 7-8 लोग खड़े थे। डॉ. राजिक ने बिना पीपीई किट के महिला मरीज की नब्ज टटोली। महिला की बेटी बिलख रही थी। उसने कहा अम्मी आप ठीक हो। कुछ देर बाद 12.44 बजे महिला ने दम तोड़ दिया। डॉ. राजिक परिजन से बोले इन्हें ले जा सकते हैं। उनमें से एक ने महिला पर चादर ओढ़ाई। इस बीच कुछ युवक नम आंखों से बाहर आए। पूछने पर बोले नेपानगर की महिला है।
डॉ. राजिक ने कहा- खंडवा एमजीएम रेफर किया लेकिन परिजन नहीं ले गए
कुछ देर बाद डॉ. राजिक भी बाहर आए और अपने कैबीन में चल दिए। पूछने पर उन्होंने कहा दो दिन से महिला की स्थिति खराब थी। उन्हें खंडवा मेडिकल कॉलेज रैफर किया था लेकिन परिजन नहीं ले गए। फिर यहीं हाईफ्लो मशीन लगाई। कल रात और ज्यादा तबीयत बिगड़ गई। ऑक्सीजन सेचूरेशन 36 से 37 पर चल रहा था। फेफड़े करीब 80 प्रतिशत खराब हो चुके थे। यहां हर दो-तीन दिन में एक-दो मरीज दम तोड़ रहे हैं।

सोमवार रात 4 शव ले गए थे- एंबुलेंस ड्राइवर

महिला के परिजन ने घर और रिश्तेदारों को इंतकाल की खबर दी। डॉक्टर को कागजी प्रक्रिया में शाम हो गई। शाम 4.50 बजे शव एंबुलेंस से नेपानगर ले गए। एक एंबुलेंस के ड्राइवर ने बताया सोमवार रात 4 शव ले गए थे। ऊपर वार्ड में आपको सब बता देंगे।

हमारा नाम ले रहे तो हम जिम्मेदार
हम जिला अस्पताल की व्यवस्था देखते हैं। कोरोना की पूरी जानकारी गर्ग साहब ही देंगे। यदि वो हमारा नाम ले रहे हैं तो हम जिम्मेदार हैं। आप सुबह आईए। व्यवस्था देखते हैं।
-डॉ. शकील अहमद खान, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल

(सीधी बात- डॉ. एमपी गर्ग, प्रभारी सीएमएचओ)

डीसीएचसी में प्रवेश पर रोक तो है लेकिन फिर भी नहीं मानते लोग

भास्कर : डीसीएचसी में प्रवेश पर रोक है, फिर भी परिजन पहुंच रहे हैं। रोक-टोक क्यों नहीं कर रहे? सीएमएचओ : जाने पर रोक तो है लेकिन फिर भी नहीं मानते। संदिग्ध हो या पॉजिटिव हो, नहीं जाना चाहिए। संक्रमण फैलेगा। भास्कर : डॉक्टर पीपीई किट में नहीं हैं। सरकार से सुरक्षा के साधन नहीं मिल रहे क्या? सीएमएचओ : मैं उन्हें पहना तो नहीं सकता। उन्हें समझना चाहिए, किट पहनेंगे तो संक्रमण नहीं फैलेगा। यदि किट नहीं है तो बताएं। व्यवस्था कराएंगे। भास्कर : मरीजों को भोजन और पानी की व्यवस्था नहीं है। स्टाफ भी कम है, क्यों? सीएमएचओ : जिला अस्पताल के कैंटीन से बांटते हैं। उन्हें भी मिलना चाहिए। सीएस को देखना चाहिए व्यवस्था। भास्कर : कोविड वार्ड में मरीज दम तोड़ रहे हैं, फिर भी प्रशासन रिकार्ड में दर्ज क्यों नहीं कर रहा? सीएमएचओ : मैं 1-1 मरीज नहीं देखता। स्टाफ रिकार्ड मेंटेन कर रहा है। कोरोना में मौत हुई है तो दर्ज करेंगे।

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