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अब तक का सबसे महंगा:60% बढ़े यार्न के दाम, टेक्सटाइल उद्योग काे प्रति मीटर एक से तीन रुपए तक नुकसान

बुरहानपुर2 महीने पहले
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  • अगस्त से सितंबर तक अंतरराष्ट्रीय बाजार से देश में यार्न के दाम कम थे

कपड़ा बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले यार्न (धागे) के दाम में अब तक की सबसे बड़ी तेजी आई है। इसके दाम 60% तक बढ़ गए हैं। इसका सीधा असर शहर के टेक्सटाइल और पावरलूम उद्योग पर पड़ रहा है। टेक्सटाइल उद्योग घाटे में जा रहा है। एक मीटर कपड़े पर एक से तीन रुपए तक नुकसान उठाना पड़ रहा है। यार्न के दाम में इससे पहले 2010 में तेजी आई थी। लेकिन तब भी दाम इतने ज्यादा नहीं बढ़े थे। लॉकडाउन के बाद देश में यार्न के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी कम हो गए थे। ऐसे में चीन, इजिप्ट और दूसरे देशों ने खरीदी बढ़ा दी थी। अगस्त से सितंबर के बीच बड़ी मात्रा में कच्चे माल का निर्यात विदेशों में हुआ। जब देश का टेक्सटाइल उद्योग शुरू हुआ तो यहां यार्न की कमी हो गई। अगले एक महीने यही स्थिति रही तो पावरलूम सेक्टर में बेरोजगारी बढ़ सकती है।

यार्न एसोसिएशन अध्यक्ष बोले- बड़े बाजार खुलने के बाद निर्यात में आई कमी
यार्न एसोसिएशन अध्यक्ष पवन लाठ ने बताया लॉकडाउन के बाद बाजार खुलने पर यार्न के दाम मे उतार-चढ़ाव हो रहा था। लेकिन बड़े बाजार खुलने के बाद यार्न का निर्यात प्रभावित हुआ है। हर तीसरे दिन दाम बढ़ रहे हैं। फरवरी तक दाम कम होने की उम्मीद फिलहाल नहीं है। लॉकडाउन के बाद जून-जुलाई में बुरहानपुर का कपड़ा उद्योग शुरू हो गया था। लेकिन सूरत, भिवंडी और मालेगांव के बड़े बाजार नवंबर-दिसंबर में शुरू हुए। यहां कपड़ा उत्पादन शुरू होने से यार्न की मांग में अचानक तेजी आ गई। मिलों में काम करने वाले मजदूर भी अब तक काम पर नहीं लौटे हैं। इस कारण मिलों में यार्न का उत्पादन 40 से 50% क्षमता से ही हो पा रहा है।

हर दिन 500 टन यार्न की की जरूरत, सबसे ज्यादा कॉटन की मांग
शहर में हर दिन 500 टन यार्न की जरूरत होती है। इसमें सबसे ज्यादा मांग कॉटन की है। कॉटन का यार्न 60% तक उपयाेग में आता है। इसके अलावा पॉलिस्टर, पॉलिस्टर विस्कोस और दूसरा फायबर यार्न भी उपयोग में आता है। शहर में यार्न की आपूर्ति मप्र सहित आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से होती है। पंजाब से मोटा धागा सप्लाय होता है। इसके अलावा बुरहानपुर की ताप्ती मिल से भी यार्न आता है, लेकिन यहां फिलहाल उत्पादन बंद है। फिलहाल 60% प्रतिशत यार्न की आपूर्ति ही हो पा रही है।
एक मीटर कपड़ा उत्पादन का खर्च 20 रुपए, व्यापारी 18 में मांग रहे
टेक्सटाइल संचालक जयप्रकाश लखोटिया ने बताया टेक्सटाइल उद्योग घाटे में चल रहा है। कपड़ा उत्पादन में एक मीटर पर 20 रु. खर्च आ रहा है लेकिन व्यापारी उसे 18 रु. में मांग रहे हैं। पुराने ऑर्डर पर हम घाटा उठाकर माल सप्लाय कर रहे हैं। यार्न के दाम बढ़ने से रोज लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। इससे आने वाले समय में बेरोजगारी बढ़ने का डर है। संचालकों को पुराने अनुबंध के आधार पर कच्चा माल नहीं मिल रहा है। नए रेट में अनुबंध के लिए भी आपूर्ति करने वाली मिल और व्यापारी तैयार नहीं हैं।

नुकसान उठाकर कर रहे कपड़े की आपूर्ति
टेक्सटाइल संचालक अभी दोहरा नुकसान झेल रहे हैं। कपड़ा आपूर्ति के लिए पहले से अनुबंध होता है। व्यापारी यार्न के दाम घटने-बढ़ने पर भाव में किसी तरह की कमी नहीं करते। टेक्सटाइल संचालकों ने कहा यार्न के दाम कम नहीं हुए तो हमें उत्पादन घटाकर 50 से 60% तक करना पड़ेगा। यार्न के निर्यात व प्रबंधन के लिए देश में कोई पॉलिसी नहीं है। इसे लेकर स्थानीय व्यापारी व उद्योगपतियों ने केंद्र सरकार को पत्र भी लिखा है। पॉलिसी बनने से यार्न के दाम को भी नियंत्रित किया जा सकता है।
बिजली सब्सिडी 150 यूनिट तक बढ़ाना जरूरी
शहर में टेक्सटाइल व पावरलूम में बिजली पर 25 यूनिट तक 40% सब्सिडी मिलती है लेकिन जिले से 20 किमी दूर महाराष्ट्र में 150 यूनिट पर सब्सिडी मिल रही है। टेक्सटाइल व पावरलूम क्षेत्र में देश में सबसे ज्यादा मजदूरी बुरहानपुर में देते हैं। इसका बड़ा कारण बिजली के दाम है। 100 से 150 यूनिट सब्सिडी मिलने से यह उद्योग देश की बड़ी मंडियों की बराबरी में आ सकता है।

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