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परेशानी:लॉकडाउन में लौट गए 60% कुशल मजदूर

कसरावद4 महीने पहले
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  • उत्पादन पर असर व नए आर्डर नहीं मिलने से गहराया आर्थिक संकट

लॉकडाउन का औद्योगिक क्षेत्र निमरानी स्थित फैक्ट्रियों पर भी गहरा असर पड़ा है। अब गाइड लाइन के हिसाब से इनमें काम शुरू हो गया लेकिन पर्याप्त व कुशल मजदूर नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ रहा है। जहां उत्पादन हो रहा है उसका उठाव नहीं होने से आर्थिक संकट गहरा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी करीब 130 फैक्ट्रियां हैं। यहां सामान्य दिनों में 3 पाली में करीब 10 हजार मजदूर काम करते हैं। इनमें अधिकांश मजदूर अन्य जिलों व प्रदेशों के थे। कोरोना संक्रमण व लॉकडाउन के चलते करीब 6 हजार मजदूर अपने घर लौट गए। रात पाली में काम नहीं हो रहा है।

इससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। प्रबंधनों की माने तो आगामी 6 माह में स्थिति और बिगड़ सकती है। प्रबंधकों का कहना है नए ऑर्डर नहीं मिलने व पुराने निरस्त होने से आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आर्डर मिलते भी है तो मजदूर कम होने से समय पर आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। भीलगांव स्थित धागा कंपनी में फिलहाल 30 फीसद काम हो पा रहा है। प्रबंधक शांतनु डे ने बताया कोलंबिया, साउथ अफ्रीका, पुर्तगाल आदि की कंपनियां माल तैयार करवाती है। पूर्व के आर्डर निरस्त हो गए और नए आर्डर भी जारी नहीं होने से काम ठप है। यहां के 197 कुशल मजदूर लौटने से एक खाता बंद है। दूसरे में 150 मजदूरों से काम चलाया जा रहा है। नए मजदूरों को प्रशिक्षण देने में 6 से 8 माह लग जाएंगे। इसी क्षेत्र की एक अन्य धागा कंपनी के 180 मजदूर घर लौट गए हैं। यहां अहमदाबाद व अन्य स्थानों के बड़े व्यापारी धागा तैयार करवाते हैं। प्रबंधक ब्रजेश चौधरी ने कहा- मजदूरों के जाने से उत्पादन पर असर पड़ा है। अभी 270 मजदूर काम कर रहे हैं।
रात की पाली बंद, 1000 मजदूर घटे
एबी रोड स्थित धागा कंपनी के 1800 में से 800 मजदूरों के ही काम पर पहुंचने से 40 प्रतिशत काम प्रभावित हुआ है। कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी राजकुमार गीते ने बताया यहां अधिकांश मजदूर बुरहानपुर, अलीराजपुर, बैतुल आदि के थे। वे चले गए हैं। इसलिए रात का प्रोडक्शन पूरी तरह से बंद हो चुका है। नए आर्डर नहीं मिलने व पुराने निरस्त होने से आर्थिक स्थिति गड़बड़ाई हुई है। इसे सुधारने में समय लग सकता हैं। मजदूरों का सहयोग मिले तो विकास की पटरी पर दोबारा लौट सकते हैं। बलखड़ स्थित ग्लूकोज बॉटल बनाने वाली फैक्ट्री में भी यही स्थिति है। प्रबंधक राजेश लोहानी ने बताया जीवन रक्षक मेडिसिन होने से उठाव में कोई असुविधा नहीं है लेकिन कंटेनमेंट एरिया व कोरोना के भय से कई मजदूर नहीं आ रहे हैं। फिलहाल आसपास के गांव के मजदूराें से सोशल डिस्टेंसिंग से काम लिया जा रहा है। सामान्य दिनों में रोजाना 4.50 लाख ग्लूकोज बॉटल तैयार होती थी। अब एक लाख बॉटल उत्पादन कम हुआ है।

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