यूरिया संकट / पिछले साल से 888 टन यूरिया अधिक बंटा, फिर भी कतार क्योंकि बड़े किसानों ने स्टॉक कर लिया

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  • कर्ज होने से छोटे किसान नहीं ले पाए थे, वेयरहाउस प्रबंधक बोले- जल्द पहुंचने की उम्मीद

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 08:13 AM IST

कसरावद. विकासखंड की 28 सहकारी समितियों में दो दिन से यूरिया का वितरण हो रहा है। यहां से किसानों को एक या दो बोरी खाद दिया जा रहा है। कई किसान बारी का इंतजार करने के बाद भी निराश लौट रहे हैं। इनमें अधिकांश छोटे किसान हैं। समितियों से इन्हें जल्द और यूरिया आने का आश्वासन देकर लौटाया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि क्षेत्र की सहकारी समितियों में पिछले साल से 888.255 टन यूरिया अब तक बांटा जा चुका है। बड़े किसानों ने मार्च-अप्रैल में ही अपने खाते नवीनीकरण कर यूरिया का स्टॉक कर लिया। छोटे किसान कर्ज होने से खाद नहीं ले पाए। अब इन्हें परेशान होना पड़ रहा है। 

वेयरहाउस प्रबंधक के अनुसार कसरावद व बोरावां वेयरहाउस से पिछले साल 1 अप्रैल से 30 जून तक 2693.34 टन खाद का वितरण हुआ था। जबकि इस साल 29 जून तक ही 3581.595 टन समितियों तक पहुंच चुका है। क्षेत्र के दो वेयरहाउस में शनिवार व सोमवार को करीब 548 टन यूरिया पहुंचा है। शनिवार को कसरावद वेयरहाउस में 168.075 व बोरावां में 27 टन और सोमवार को कसरावद वेयरहाउस में 157 व बोरावां में 206.730 टन यूरिया आया।
एक दिन में ही बंट गया 430 बोरी यूरिया
समितियों से यूरिया मिलने की सूचना मिलते ही समितियों में किसानों की भीड़ लग रही है। नगर की सेवा सहकारी संस्था में शनिवार को 430 बोरी यूरिया खाद पहुंचा लेकिन यह कुछ ही देर में खत्म हो गया। कई किसान बैरंग लौटे। माकड़खेड़ा के किसान नारायण वर्मा ने कहा खरीफ बुवाई पूरी हो चुकी है। अब खाद की जरूरत है। 10 दिनों से समिति व निजी दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। 4 दिन पहले एक निजी खाद विक्रेता के यहां कतार देख पहुंचा तो उन्होंने यूरिया के साथ डीएपी खाद भी लेने की अनिवार्यता बताई। इसे अतिरिक्त बोझ बताते हुए विरोध किया तो यूरिया खत्म होने की बात कहकर लौटा दिया। समिति प्रबंधक रामकृष्ण पाटीदार ने कहा यूरिया कम पहुंचने से एक ही दिन में वितरित हो गया। एक-दो दिन में और खाद उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। फिलहाल 100 क्विं. की मांग की है। हालांकि कसरावद सोसायटी के माध्यम से मार्च में बड़े किसानों ने यूरिया ले लिया था। सिर्फ लघु किसान ही यूरिया को लेकर परेशान हैं।

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