ओंकारेश्वर परियोजना / नदी और नालों में रिस रहा नहर का पानी क्योंकि बगैर सफाई व मरम्मत के छोड़ दिया

Canal water seeping into the river and drains because left without cleaning and repairing
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Canal water seeping into the river and drains because left without cleaning and repairing

  • कपास की बुवाई कर चुके किसान सिंचाई के लिए परेशान
  • कार्यपालन यंत्री बोले- मरम्मत करवा रहे हैं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

कसरावद. ओंकारेश्वर बांध परियोजना की नहर में पिछले दिनों पानी छोड़ा गया। लेकिन नहर की मरम्मत व सफाई नहीं करने से प्रेशर से आया पानी नदी-नालों में रिस रहा है। ऊपरी क्षेत्र में पानी रिसने से कसरावद व डोंगरगांव क्षेत्र में अब तक पानी नहीं आया है। कपास की बुवाई कर चुके किसान सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं। किसानों का आरोप है कि परियोजना से जुड़े मैदानी कर्मचारी नहर की मानिटरिंग करने तक नहीं आ रहे हैं। समस्या किसको बताएं। 
कार्यपालन यंत्री का कहना है कुछ जगह नहर में रिसाव है। इसकी मरम्मत करवाई जा रही है।

पिछले साल अतिवृष्टि से कपास फसल खराब होने से नुकसान उठा चुके किसान इस साल इसकी भरपाई करना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने गर्मी के सीजन की बुवाई कर दी। लेकिन अब सिंचाई के लिए परेशान हो रहे हैं। किसान वीरेंद्र पावटावाला ने बताया ग्राम लौंदी तक पानी पहुंचा है। इसके बाद वंशावली डेम से पानी रिसने से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसे देखने वाला कोई नहीं है। नहर क्षेत्र के 20 किलोमीटर के किसानों की फसल को लेकर चिंता बढ़ गई है। कुछ किसान ट्यूबवेल व कुओं से सिंचाई कर फसल बचाने में लगे हैं।
6 साल से भोग रहे हैं परेशानी
किसान गजानन बर्डे, महेंद्र पाटीदार, भरत यादव, ओम हार्डिया व हमीद खान ने कहा वर्ष 2008 में ओंकारेश्वर नहर परियोजना का काम पूरा होना था। समय पर काम नहीं होने से मामला न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग के रिकार्ड अनुसार वर्ष 2014 में काम पूरा किया गया। लेकिन किसानों को नहर से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलने की उम्मीद अब तक पूरी नहीं हो पाई। 6 साल से किसान परेशान हो रहे हैं। जबकि नगर से 8 किलोमीटर दूर डाेंगरगांव तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य है।
लॉकडाउन में इंदौर से हो रही मानिटरिंग
किसानों ने कहा पानी छोड़ने के बाद भी नहरें कंटीली झाड़ियों से पटी है। कहीं दरारें है। प्रेशर के कारण नहर फूटकर पानी खेतों में भर जाता है। रबी सीजन के दौरान भी कसराड़ नाले में रिसाव हुआ था। विभाग काे लीकेज ठीक करने में 10 दिन लग गए थे। कसरावद के कुशवाह मोहल्ले के पास दो बार नहर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसके बाद भी अधिकारी सबक नहीं ले रहे हैं। वर्तमान में भी परियोजना से जुड़े कुछ अधिकारी-कर्मचारी इंदौर रहते हैं। वे अब तक फील्ड में नहीं आए हैं। मोबाइल लगाने पर कोरोना संक्रमण के कारण फील्ड में नहीं आने व घर से ही काम करने की बात कही जा रही है। इस बार भी मेंटेनेंस नहीं करवाया गया। जबकि विभाग को पानी छोड़ने से पहले नहर का मेंटनेंस करवाना था ताकि किसानों को समय पर लाभ मिल सके।
कुछ किसान नहर को फोड़कर पानी ले रहे हैं। इससे पानी आगे प्रेशर से नहीं पहुंच पा रहा है। किसानों को समझाइश दी जा रही है। 4 दिन में कसरावद क्षेत्र में पानी पहुंच जाएगा। 
- वीके जैन, एसडीओ, ओंकारेश्वर नहर परियोजना
विभागीय कर्मचारी मौके पर जाकर नहर का निरीक्षण कर रहे हैं। जहां नहर फूटी है या कंटीली झाड़ियां हो गई है उसकी मरम्मत करवाई जा रही है। 
- ललित वर्मा, कार्यपालन यंत्री ओंकारेश्वर नहर परियोजना

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