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कृषि:आखातीज से मुहूर्त करने के लिए खेत तैयार किए, 50 हजार पैकेट की डिमांड, बाजार में उपलब्ध नहीं

कसरावदएक महीने पहले
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कपास बुवाई के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं। - Dainik Bhaskar
कपास बुवाई के लिए खेत तैयार किए जा रहे हैं।
  • कोरोना के चलते बीटी कॉटन को डिलिवरी की मंजूरी नहीं, भटक रहे किसान

पिछले 5 दिनों से मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। तापमान में कमी आते ही किसान बीटी कॉटन की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। लेकिन बाजार में बीज उपलब्ध नहीं है। किसान दुकानों के चक्कर लगा रहे हैं। बीज विक्रेता कोरोना के चलते बीटी कॉटन की डिलिवरी की अनुमति नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। साथ ही इस बार बीज कम मात्रा में मिलने की आशंका है।

निमाड़ में अक्षय तृतीया से किसान कपास बुवाई का मुहूर्त करता है। इस साल अधिकमास के चलते यह एक माह आगे बढ़ गई। पिछले साल 1 मई से बीटी कॉटन का वितरण शुरू हो चुका था लेकिन इस बार 5 दिन ऊपर होने के बाद भी अब तक बीज नहीं पहुंचा है। व्यापारी कह रहे कोरोना संक्रमण के चलते शासन ने अब तक कंपनियों को डिलिवरी के लिए मंजूरी नहीं दी है। सबकुछ ठीक रहा तो अगले सप्ताह तक बीज पहुंचने की उम्मीद है।

बीज विक्रेता इंदरसिंह राठौर ने कहा- इस बार 50 हजार पैकेट की मांग की है। जनवरी-फरवरी में ही आर्डर किया जा चुका है लेकिन पहली खेप में मात्र 10 हजार पैकेट पहुंचने की उम्मीद है। राजेंद्र राठौर ने कहा बीज कम आने की आशंका में किसान अभी से दुकानों पर पहुंचकर बुकिंग करवा रहे हैं ताकि बीज आते ही बुवाई का काम शुरू कर सके। बीज की मात्रा कम आने से किसानों को परेशान होना पड़ सकता है।

पहली खेप में पहुंच सकते हैं 10 हजार पैकेट

बीटी कॉटन को दे पहली प्राथमिकता

नगर के किसान रंजीत पाटीदार व विजय पाटीदार ने कहा- बीटी कॉटन की डिमांड बढ़ रही है। गर्मी सीजन की शुरुआत से ही इसकी बुवाई की जाती है। अब तक बीज नहीं पहुंचा है। माकड़खेड़ा के किसान दिलीपसिंह पटेल ने कहा बीटी कॉटन का इंतजार नर्मदा किनारे के किसान लगातार कर रहे हैं। क्योंकि सिंचित क्षेत्र होने से सबसे ज्यादा कपास की बुवाई हाेती है।

रुपखेड़ा के किसान चंदरसिंह पटेल ने बताया बीटी कॉटन उपलब्ध कराना शासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। क्योंकि किसान 1 साल की खेती में नकद फसल कपास पर ही अधिक निर्भर होता है। शासन को इसकी व्यवस्था कर शीघ्र अनुमति देना चाहिए। किसान नरेंद्र पटेल सावदा व जितेंद्र पाटीदार बिठेर ने कहा कपास बुवाई की तैयारी हो चुकी है। मौसम भी अनुकूल है। तापमान में कमी आने से अभी बुवाई की जा सकती हैं। कृषि अफसरों ने कहा वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों की समस्या से अवगत करवाया है।

नहर में भी नहीं छोड़ा पानी

क्षेत्र की नहरों में भी अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। जिन किसानों के पास सिंचाई के संसाधन नहीं है वे नहरों में पानी आने का इंतजार कर रहे है। लेकिन इंदिरा सागर व ओंकारेश्वर परियोजना की नहर फिलहाल खाली है। किसानों ने कहा नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि खेतों को तैयार करने में सहूलियत मिल सके।

अफसरों को समस्या बताई है

किसानों को विभिन्न कंपनी का 75 किलो मिर्च बीज उपलब्ध करवाया है। इसके हर पैकेट में 10 ग्राम की मात्रा होती है। जल्द बीटी कॉटन भी बाजार में पहुंचेगा। अफसरों को समस्या बताई है।
बीएस सेंगर, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी

कपास के बीज बेचने व नहरों में पानी छोड़ने की मांग

सनावद, विधायक सचिन बिरला ने कृषि मंत्री को पत्र लिख कर जिले में कपास बीज के विक्रय की अनुमति व इंदिरा सागर परियोजना के मुख्य अभियंता से नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है। कृषि मंत्री को पत्र के माध्यम से बताया जिले के कपास उत्पादक किसान प्रतिवर्ष गर्मी का कपास अपने खेतों में लगाते हैं लेकिन इस वर्ष कोरोना आपदा के कारण किसान कपास की बोवनी नहीं कर पाए।

अभी तक मप्र में कंपनियों को कपास बीज विक्रय की अनुमति नहीं दी गई। इसके कारण कपास की बोवनी में देरी हो रही है। इसके लिए अन्य राज्यों की कपास बीज कंपनियों को मप्र में कपास बीज की आपूर्ति व विक्रय की तत्काल अनुमति दी जाए। विधायक ने इंदिरा सागर परियोजना के मुख्य अभियंता को पत्र लिख कर नहरों में तत्काल पानी छोड़ने की मांग की है।

बिरला ने पत्र के माध्यम से बताया प्रत्येक वर्ष ग्रीष्मकालीन फसलों की सिंचाई के लिए 15 से 25 अप्रैल के बीच नहरों में पानी छोड़ दिया जाता है लेकिन इस वर्ष नहरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। बड़वाह, सनावद, बेड़िया व अन्य ग्रामीण क्षेत्र के किसान नहरों में पानी छोड़ने की लगातार मांग कर रहे हैं। जिससे गर्मी की फसलों की सिंचाई की जा सके। इसके अतिरिक्त नहरों में पानी आने से क्षेत्र के कुओं, बावड़ियों व अन्य जल स्त्रोतों में पानी का स्तर बढ़ता है। पशु-पक्षियों को भी पानी मिलता है। नहरों में तत्काल पानी छोड़ा जाए।

खेतों में तैयारी पूर्ण, नहरों में पानी आने का इंतजार

बासवा, क्षेत्र में किसानों ने खेतों में काकड़े लगाने की पूरी तैयारी कर ली है लेकिन किसानों को नहरों में पानी आने का इंतजार है। किसान रामेश्वर बागड़ा, राजपालसिंह पंवार, शैलेंद्र सेजगाया, राजेंद्रसिंह पंवार, सीताराम इंगला ने बताया किसानों ने 42 डिग्री तापमान में भी खेतों में बीज बोने की पूरी तैयारी कर ली है। किसानों को पानी व बीज की आवश्यकता है। समय पर दोनों चीजें मिल जाएं तो काकड़े लगा सकते हैं। किसानों ने नहरों में पानी छोड़ने की मांग की है।

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